– जयंती पांडेय

दिल्ली में एगो बड़ भयानक घटना घटल. वइसे दिल्ली जगहिए बड़ा भयानक घटना के नतीजा ह. कलकाता के सिपाही विद्रोह के गोड़ से मसल दिहला का बाद ई शहर राजधानी बनल. मुगलो काल में कुछ अइसने भइल रहे आ कौरवो पांडव के जमानो में. बाबा कहलें, त हम कहत रहनी कि उनकर ज्ञान के गगरी के पेहान भड़ाक दे खुल गइल, अनासो कोठा अँजोर हो गइल, दिमाग के सब बत्ती भक्क दे जर गइल. ऊ गद्दौ पर पसरल पसरल हठात ज्ञानी हो गइले. ज्ञान के केंवाड़ी कइसे खुलल केहु ना जानल.

ना घूमें परल ना मेहनत करे परल, चट दे ज्ञानि हो गइले. ना तप करे के परल ना हिमालय के गुफा उफा में जाए के परल. दिल्ली में गैंगरेप भइल आ नवयुक समाज के गोस्सा भड़कल. ओही गोस्सा के हवा दे के ऊ चट दे ज्ञानी का कटेगरी में ढुकि गइले. लस्टमानंद त ई देखि के दांते अंगुरी काटऽतारे कि जसहीं रेप के बवाल के आग जरल उनकर दिमाग के बत्ती जर गइल. वइसे आमतौर पर होला कि जबले देश के जनता के क्रोध के आगि जरत रहेले त केहु ना केहु कुछ बोलत रहेला, हाथ जरावे के भांजा आ जिम्मा त सरकार के रहे. मनमोहन जी अपना खास अंदाज में, आ शिंदे जी माओवादियन के डर देखा के आ शीला जी बड़का कोतवाल साहेब पर खीस उतार के हाथ जरावे के जिम्मेदारी पुरा क लिहल लोग. अब ई लोग के भांजा रहे. राते रात ई लोग ज्ञानी हो गइल.

अबले उनका केहु कहल ना कि ऊ बोलस. लेकिन भीतर ज्ञान के अंजोर उनका के बेचैन क दिहलस कि ऊ कुछ बोलस. अबले उनकर बोली केहु सुनत ना रहे. उनकरा से बेसी त दिग्गी भाई बोलेलें. मनमोहन भईया के ज्ञान उनका के कोंचलस कि ऊ बोलस. काहे कि बे बोलले चरचा कहाँ आ बे चरचा सब सून. बे बोलले त कुछ ना होला.

धीरे धीरे लोग में फुसफुसाहट होखे लागल कि कहीं छठे छमाही उनका के चाह पिया के बोला लिहल लेकिन चर्चा में आइल अलत बात होला आ ज्ञानी हो गइल अलग बात. ज्ञान जब हो जाला त ओकरा छलकावे के परेला जइसे लोटा से जल छलकावल जाला. अब मोहन बईया जब ज्ञान छलकवल त चारू ओर लोग लागल कपार पीटे. उनका के देख कई गो साधु संतो के ज्ञान छलकावे के शौक जाग गइल. ऊ लोग के लगे ज्ञान जियादा आ हमनी लगे जगह कम. अब जनता ज्ञान धरो त कहाँ धरो.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू ज्योति आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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