– जयंती पांडेय

का हो बाबा, काल्हु गइल रहीं नेताजी से भेंट करे. बड़ा उदास आ मायूस लागत रहले. हर बतिये में कहीं ना कहीं से बाढ़ के घिंच ले आवत रहले. हमरा कुछ ना बुझाइल. हम त बूझनी कि कहीं अण्णा बुढ़ऊ के भ्रष्टाचार मेटावे वाला आंदोलन का चलते उनुकर दिमाग त नइखे फिर गइल.

रामचेला के वचन सुनि के बाबा कहले कि एहमें बाबा अण्णा के आंदोलन के कवनो कारण नइखे. आ ऊ आंदोलन से अपना देश के खाऊ कमाऊ नेता लोगन के कुछ नइखे होखे वाला. ऊ त हरान बाड़े कि असो भादो जा रहल बा अबले बाढ़ि ना आइल. कुछ दिन पहिले रामभरोसे कुछ लोग के ले के नेताजी का बंगला पर गइल रहले. ई कहानी ओहिजे से शूरु होला. सुनबऽ त सुनऽ.

पछिलका चुनाव के पहिले जवनबाढ़ आइल रहे ओह में नेताजी भूतपूर्व मंत्री के कोस कोस के आपन माहौल बना लिहले आ फेर ओही के पानी आ डूब का सहारे आपन चुनावी नैया पार करा लिहले. अपना इलाका में बादर बरसबे ना कइल. कहीं बरिसबो कइल त अलग अलग इफेक्ट डललसि. कहीं सड़क के गड़हन के पोल खोललसि त कहीं कवि लोगन के करेजा में पिया मिलन के गीत के मौका दे दिहलस त कहीं गरमा गरम पकौड़ी के माहौल बना दिहलसि. अपना गाँव में त लोग अपना मड़ई का बहरा बईठ के बाढ़ के इंतजारी में नेताजी के पछिलका आश्वासन के माला जपत बा लोग. अब जइसे अन्हरन में कनवा राजा होला ओसहीं एगो काना राजा लोग बाग के उकसवलसि कि हमनियो का चलि के नेताजी से सवाचल जाउ कि ऊ बाढ़ में हमनी खातिर का तइयारी कइले बाड़े. एतना पूछे के हक त बड़लहीं बा. आखिर में उनुका के हमनी का वोट दिहले बानी सन. ई भाषण से लोग में थोड़ा जागृति आइल आ ऊ लोग नेताजी का बंगला पर पहुँच गइल. ओहिजा तैनात गनमैन के देखि के लोग के होश ठंडा हो गइल. बाद में सूर्ती के बीड़ा चढ़वला पर भीतर जाये के मिलल. कोठी के बरंडा में पीए कहलसि कि नेताजी अबहीं ना मिल सकिले, चुनाव क्षेत्र के बाति बा त गाछ का नीचे बइठ के इंतजार करऽलोग. खाली होइहें आ सँवास मिली त भेंट होई. अबही बात होते रहे तले नेताजी कृष्ण के भूमिका में आ के सुदामा लोगन से गले मिले लगलन. अब पीए त बेचारा गाछ पर से गिरल.

नेताजी कहले कि मौसम विभाग कहले बा कि असो शानदार बाढ़ आई, लेकिन हमरा विभाग के हेलीकाप्टर खराब. हम कइसे बाढ़ के जायजा लेब आ बजट बना के आप लोगिन के कल्याण खातिर रुपिया माँगब ? एगो ग्रामीण कहलसि कि हेलीकाप्टर के मरम्मत करवा लीहीं सरकार. नेताजी के आँखि डबडबा गइल आ कहले ई बड़ा गंभीर राजनीति ह. तू ना बुझबव.

अब गाँव के लोग का करे. ओही में से केहू पूछल कि अब हमनी का का कर सकीलें सँ ?

नेताजी कहले कि उहे जे बाबा अण्णा हजारे कइलन. तहरा लोग में से केहू अनशन पर बइठ जाउ आ माँग करे कि जबले हेलीकाप्टर ना सुधरवावल जाई तबले अनशन ! अण्णा के अनशन से डेराइल सरकार चट दे मरम्मत के पइसा ग्रांट कर दी आ ओकरा बाद आवे ना बाढ़ल

नेताजी के ई प्रोपोजल सुनि के सबके बाबा रामदेव के दुर्गति मन पर गइल आ सब लोग ओहिजा से सरक लिहल. तबसे नेताजी के बास के सन्निपात हो गइल बा. बूझि गइलऽ रामचेला !


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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