– जयंती पांडेय

रामचेला बड़ा उदास रहले. बाबा लस्टमानंद पूछले कि का हो मुँह काहे लटकवले बाड़ऽ ? रामचेला कहले, ई मीडिया वाला भाई लोग केहू तरह जीये ना दी. अब देखऽ ना, ओह दिन राजघाट पर अनशन पर बइठल भाजपाई भाई लोग के उदासी मेटावे खातिर भाजपा के बड़हन नेता सुषमा स्वराज एगो देशभक्ति गीत पर चार गो ठुमका लगा दीहली. अब त मच गइल बवाल. केहू कुछ कहे लागल केहू कुछ कहे लागल. अब तूहीं बतावऽ बाबा कि एहमें का गलत भइल ?

अब ई जान ल कि हिंदी में एगो ढेर पुरान कहाउत बा कि “नाच ना जाने आंगन टेढ़ा.” अब एकर मतलब बड़े बड़े ग्यानी गुमानी लोग लगावे ला कि नाचे ना आवे आउर नाचे वाला कहत बा कि अंगने टेढ़ बा. लेकिन जान ल रामचेला कि एकर मतलब होला कि “जब नाचे के मन क जाई त अंगना टेढ़ बा कि सोझ बा ना बुझाई.” अब एकर सही माने का होई ई त बतकुच्चन वाला ओमप्रकाश भाई सही सही बतइहें. हाँ त हम कहत रहनी कि जब नाचे के मन होखो त टेढ़ अंगना ना लउकी. ओसहीं जब सुषमा भउजी के नाचे के मन हो गइल त राजघाट का लउकी ! अब नाचे के धुन में ई ना याद परल कि इहवां खाली प्रार्थना कइल जाला आ गाँधी बाबा के फूल चढ़ावल जाला, ढेर भइल त एगो पौधो रोप दिआला. अब जान जा कि ऊ मौका ना पार्टी के रहे ना फगुआ ना केहू के बियाह रहे आ ना केहू के बेटा भइल रहे कि नाचल जाव. लेकिन जब राजघाट ना याद परल त ई सब बात कहाँ से मन परी. सब भउजी बिसभोर क दिहली.

अब एकरा पर जवन विवाद हो गइल बा ओह से सुषमा जी बहुत नाराज बाड़ी आ कहत फिरऽतारी कि सोनिया जी आ उनुकर सास इंदिरा जी के आदिवासियन के साथ नचला के वीडियो त तमाम बा. भाजपा के लोग ऊ वीडियो टीवी पर देखइबो कइल लोग. अब सुषमा जी के के बतावे कि ऊ लोग जब आदिवासियन का एरिया में गइल लोग, ओकनी का अपना परम्परा के मोताबिक जे नाचऽतारी सन आ ओकनी के मन राखे खातिर ई लोग ठुमका लगाइये दिहल त कवन अन्याय हो गइल ? ओह नाच पर त केहू कुछ ना कहल.

अब सुषमा जी के नाराजगी के अउरी कारण बा. उनुकर कहना बा कि मीडिया उनुका नचलके के बात उड़ा दिहलसि आ धरना के खबर गोल क दिहलसि. अब भउजी के के बतावे कि मीडिया में त अनशन के समय आडवाणी जी दूध पीयत लउकले आ गडकरी के दिल्ली के एगो मशहूर मालिसघर में मालिस करवाये के खबर आइल रहे. अब उनका खीस एह बात के बा कि खाली उनुका नचले के बात हाईलाईट भइल. अब मीडियो बेचारा का करो ? जे खबर ना दीत त हो सकेला कि भउजी के ओहू से शिकायत हो जाइत. जइसन नेता लोग के अक्सर होला. वइसे नाचल कवनो गारी त ह ना. भगवान कृष्णो त गोपियन का साथे नाचत रहले. लेकिन भउजी के तकलीफ हो गइल बा. अरे कवनो मौका रहे नाचे के का ?अगर रामलीला मैदान में लाठीचार्ज का खिलाफ ई धरना रहे त नारा लगावल जाइत, भजन गावल जाइत, ई नचला के कवन दरकार रहे ? कहीं ई नाच ई बतावे खातिर त ना रहे कि हे बाबा देखऽ अब तूं सुराज ले आ के नेहरू जी का झोरा में डाल दिहलऽ आ देखऽ बाबा रामदेव ई राज के हमरा फाँड़ में डाल दे तारन. लेकिन का करब बाबा त फेल क गइले. अब राज ना मिलल त झूठहू नाराज हो तारी. एही पर कहल जाला बे जनले नचला पर गोड़े टूट जाला.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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