– जयंती पांडेय

रामचेला आज सबेरे बाबा लस्टमानंद के लगे अइले आ आवते बोलले, बाबा हो, अबकी चुनाव में तऽ कांग्रेस गइल. भाजपा के पक्का चांस बा.

उनका पहिले गांव के कई लोग बाबा से इहे कहले रहे. बाबा उबिया गइले. उनहुं के मन में झक उठ गइल. ई का मामला बा कि ‘ना सूत ना कपास आ जोलाहन में लाठा लाठी.’ अबहीं चुनाव के तारिखो ना आइल आ लागल लोग भाखे. बाबा के मन में ना जाने का आइल, कहले, हो रामचेला, जानऽ तारऽ भाजपा में प्रधानमंत्री के कंडीडेटन के लिस्ट बन रहल बा. ई अलग बात हऽ कि लिस्ट बनते मारा मारी, गारा गारी शुरू हो गइल बा. पार्टी तऽ तहरे अइसन मान लेले बिया कि अबकी ऊ जीत जाई एही से सब सीनियर नेतवा जे बाड़े सन अपना के प्रधानमंत्री के लायक बूझ्ऽतारे सन. पार्टी में बड़ा संकट आ गइल बा. हर केहुए मुंह उठवले चलल आवऽता कि हमरा के पीएम बनावऽ ना तऽ हम अलगा भइनी. अब बड़ा कठिन हालत हो गइल बा. एही से जइसे इम्तहान में होला ओसहीं आइडिया तैयार कइल गइल कि सब कंडिडेट के रेटिंग कइल जाई. माने कि, सबके रेट तैयार होई कि केकरा के केतना नम्बर दिहल जाउ. ओह में सबके एगो नम्बर दिहल गइल बा. इहो तय कइल बा कि जबले पार्टी कवनो कंडीडेट ना घोषित करी तबले सब केहु के ‘पी एम इन वेटिंग’ मान लिहल जाई. अब लिस्ट तैयार हो गइल बा आ कुछ शुरुआती नांव बा – लालकृष्ण आडवाणी, नरेंद्र मोदी, राजनाथ सिंह, नितिन गडकरी, अरुण जेटली, सुषमा स्वराज, वैंकया नायडू वगैरह. ई सब नांव के ले के भारी विवाद बा आ मोदी जी के लेहले सब केहु लिस्ट में अपना नम्बर पर खिसियाइल बा. ई बात जब राजद के नेता लालू भइया से पूछल गइल, तऽ ऊ कहले, भाग बुड़बक, रेलवे अस एक आदमी के आर ए सी में डाल दऽ आ बाकी लोग के वेटिंग में डाल दऽ. मामला ठीक हो जाई.

उनकर बात सुन के रामचेला चुप हो गइले. ई ना बतवले कि बाबा के बात उनका परतियाइल कि ना.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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