– जयंती पांडेय

सियावर बाबू के मुँह पर बड़ा दिन का बाद हँसी लउकल. बाबा लस्टमानंद से ना खेपाइल. सियावर बाबू सरकारी अफसर हउवन. सरकारी कर्मचारी अउर आफिसन के बारे में सब कुछ जाने ले. एही से जब ऊ भेंटास त मुँह माहुर अस कइले रहस. बाबा का संगे एगो पत्रकारो रहे. जब उनका ई पता चलल कि बाबा के संगे वाला आदमी पत्रकार ह आ कलकाता के अखबार में लिखेला त एक दम पायजामा से बाहर हो गइले. जइसे देस के बनावे के जिम्मा पत्रकारने के होला. कहले – तूं पत्रकार लोग खाली घूमत रहेलऽ. देस में आतना कुछ हो रहल बा आ तूं लोग कुछ लिखत नइखऽ. जब उनुका बुझाइल कि बात कुछ बेसि कह गइले त कहले कि अरे देस के सुधारे के जिम्मेदारी त पत्रकारे लोगन पर रहेला न. अब इहे देखऽ करप्शन के हाल. पत्रकार ना रहिते सँ त ई बार आतना खुलित का ? लेकिन फिर कहले कि ओकरा से का होई. आजु ले भ्रष्टाचार का मामिला में कवनो नेता के सजा भइल बा का ? गिरफ्तारी ले त सब कुछ ठीक चलेला, ओकरा बाद फुस्स ! लेकिन अचानक सियावर बाबू के चेहरा पर हँसी आ गइल.

कहले – भाई बड़ा दिन के बाद मन के शांति मिलल बा. जब मिस्र के होस्नी मुबारक का बारे में सुननी. भाई वाह ! ऊ त भ्रष्टाचार का मामिला में राजा आ कलमाडिओ के पीछे छोड़ दिहलसि. अबले त इहे मालूम रहे कि हमार देस भ्रष्टाचार का मामिला में सिरमौर बा लेकिन अब बुझाइल कि करप्शन का मैदान में एक से एक कलाकार बा लोग. लेकिन हमरा हँसे के कारण ई ना हऽ भाई. हमरा हँसे के कारण ह कि वाह रे मिस्र के जनता. तीस बरिस ले बर्दाश्त कइलस आ जब ना बर्दाश्त भइल त ओकरा के गद्दी पर से घिसिया के उतार दिहलस.

बाबा पूछले कि का हमनियो का देस में अइसन होई ? सियावर बाबू कहले कि हमनी में सबसे बड़हब कमी बा कि हमनी का अपना के तीसमार खाँ बुझेनी सँ. ई बुला जानी सँ कि सबसे बड़हन तीसमार खाँ त ऊपर बइठल बा. ऊ जब लाठी चलाई त नीमन नीमन लोग के हवा निकल जाई. अब ऊ हजारे काका का हाथ में डंडा थमा दिहले बा. देखत चलव भ्रष्ट लोगन के दाशा.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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