– जयंती पांडेय

बाबा लस्टमानंद अबकी चुनाव में खड़ा होखे के फैसला कऽ लेहले बाड़े आ ओकरा खातिर रणनीति बनावे में जुटल बाड़े. अब उनका खेलाफ बड़का दल के बड़ बड़ नेता खड़ा बा लोग आ ओकरा पर से अण्णा बाबा के चर लोग चारू इयोर घूम घूम के तरह तरह के बात करऽ ता लोग. एकरा से मैदान आउर बिगड़ल जाताऽ. एह में प्रचार के जे सॉलिड तरीका ना अपनावल गईल तऽ जमानतो ना बांचि. बाबा के मन में आइल कि काहे ना अपना लोगन से कहल जाउ कि ऊ अनशन के तरीका अपनावे. ना वोट देबऽ लोग तऽ हमनी का भूखे मरि जाएब. हालांकि गांधी जी के बाद अनशन के ताकत के अण्णा बाबा परीक्षण कइले. बेशक उनकर जोर आज काल्हु थोड़े कम हो गइल बा लेकिन अनशन जवन हथियार बा ऊ तऽ ठीके चलऽ ता. लेकिन सबसे बड़हन सवाल कि अनशन करी के? जइसे बाबा लस्टमानंद अपना वर्किग कमिटी में ई बात कहले सब लोग एने ओने तिकवे लागल. लोग भयाह गइल कि कहीं ओही के नांव ना प्रस्तावित हो जाउ. सब लोग तरह तरह के बहाना बनावे लागल, केहु कहऽ ता कि शुगर बा तऽ केहु कहऽ ता कि हाई बी पी बा. केहु कुछ त केहु कुछ. एह पर बाबा खिसिया गइले. कहले, केहु ना करी तऽ हम करेब. ई सुनते सब लोग मुरझा गइल. लागल लोग चिरौरी करे कि ऊ ना करऽ काहे कि कहीं कुछ हो हवा गइल तऽ चुनाव पर असर पड़ी. लेकिन सही बात तऽ ई रहे कि बाबा लस्टमानंद उपवास रहिहें तऽ कार्यकर्ता लोग जे चुनाव के नांव तर माल उड़ावऽ ता उनका ना भेंटाई, जे बाबा कहीं सरक गइले तऽ पइसवो डूब जाई.

एगो हुंसियार कार्यकर्ता सुझाव देहलस कि काहे ना एगो इवेंट मैनेजमेंट कम्पनी के साटा कऽ दिहल जाउ आ ओकरे लोग नेता के कपड़ा पहिर के अनशन करो. लेकिन लोग कहल कि कहीं ई बात अखबार वालन के लगे पहुंच गइल तऽ जवनो वोट मिले वाला होई उहो डूब जाई. काफी विचार मंथन के बाद तय भइल कि भाड़ा पर कार्यकर्ता भर्ती कइल जाउ आ उहे लोग अनशन पर बइठो. भाड़ा के रेट तनी बेसी रहे. भाव सुन के ओहिजा लाइन लाग गइल अनशन करे वाला लोग के. बाद में पता चलल कि विरोधी दल के नेता अफवाह उड़ा देहले बाड़े सन कि जे ई चुनाव में अनशन करी ओकरा बाबा जीतला के बाद अगिला लोकसभा चुनाव में टिकट दीहें. बड़ा मुश्किल से अनशन करे वालन के उहां हटावल गइल. बाबा अब फेर रणनीति सोचे में लागल बाड़े.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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