– जयंती पांडेय

आजकाल लोग के ना जाने का हो गइल बा. ना केहु के भूखि लागऽता ना पियास, ना गरमी के परवाह ना लू के. जेकता के देखऽ परधानमंत्री बने के चक्कर में लागल बा. घूरहू से ले के रामचेला ले आ लस्टमानंद से ले के लंबोदर पांड़े ले जेकरा के देखऽ उहे खड़ा हो के घिघियाता कि हमार दावा बा हमरा के पीएम बनावऽ लोग. संसद मार्ग से ले के गाँव के खेतन के मेड़ पर जेकरा तनिको बइठे के जगहा मिलल कि ऊ ओहिजे बइठ के पीएम के कुर्सी के सपना देख रहल बा आ संगे संगे भाषण रटे में लागल बा. सब लोग इहे सोचऽता कि कहीं अचानक चुनाव भइल आ हम परधानमंत्री हो गइनी त लाल किला से अइसन भाषण देब कि लोग दांतन तले अंगुरी ना दबाई बलुक अंगुरिए काट ली. जेकरा कनस्तर में दू गो रोटी के आटा नइखे उहो रोटी के जोगाड़ छोड़ के प्रधानमंत्री के कुर्सी के जोगाड़ में लाग गइल बा. अइसन बुझाता कि पीएम के कुर्सी ना भइल लाटरी हो गइल. कहीं हमरे ना निकल आवे. वइसे इ पद अब लाटरी हो गइल बा. माने कि अनगिनत आँख आ सपना एके गो. इहां तकले कि जेकरा आँख में जोत नइखे, चाहे दुपहरियो मे जेकरा अन्हार लउकत बा उहो प्रधानमंत्री होखे के सपना देखे में लाग गइल बा. कतना लोग आँखि के डाक्टरन के नाक में दम कर देहले बा कि अइसन चश्मा द कि सपना एकदम साफ लउके. ऊ त ऊ सबसे दर्दनाक त बात बा कि हमरा बगल के सुदामा चौधरी ले जे पार्टी के आजु ले पाल्टी कहले उहो सपना देखऽतारे. एकदिन त लस्टमानंद के खद्दर के कुर्ता धोती फींच के सूखे खातिर पसारल रहे ओहि के ऊ काँखि में दाबि के दिल्ली निकल गइले. सवचला पर पता चलल कि ऊ पीएम बने के चक्कर में ओहिजा घूरी काटऽतारे. कई हाली अखबारन में, टीवी में कहल जाला कि जनता के काम सपना देखल ना ह, खाली घोटाला ग्रस्त देश के अर्थ व्यवस्था सुधारे खातिर टैक्स दीहल ओकर काम ह. सपना देखल खाली नेता लोग के काम ह, उहो सत्ताधारी दल के नेता के काम ह लेकिन लोग बा जे मानते नइखे. हम त ई कहब कि पीएम पद के हाई वोल्टेज सपना देखला से आँखि खराब हो सकेला. लेकिन केकरा डर बा ? आँखि बा तबो सपना, आ ना रही तबो सपना.

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