– जयंती पांडेय

अपना देश में मेहरारू जात हमेशा खतरा में रहेले. पहिले बंगाल में कवनो खतरा ना रहे पर अब त इहों खतरा बढ़ि गइल बा. अपना देस के मेहररूअन के समय-समय पर अनेकानेक दुश्मन से सामना होत रहेला आउर ओहमें सबसे पहिला नाम ओकनी के ‘सास’ के होला, जे बहू लोगन के मोताबिक सांस ले ना लेवे देली सन. ‘शुगर’ के बीमारीओ मेहरारुन के खतरनाक साथी ह आ जब बेमारी न हो त इहो जान लीं कि सिरदर्द मने कपरबथ्थी ऊ लोग के सबसे प्रिय बहाना ह. इहे ना सड़ल सब्जी आ सखियन से कम खतरा नइखे. शादी के पहले उनकर ‘सनम जी’ उनकी सहेलियन का ओर ना सरक जास इहो डर रहेला. जब सनम जी के कवनो सहेली सौगात देली सन त बूझि जाईं कि शक से सका जाली सन. एह बीच ‘सगाई’ नाम के एगो अउरि शत्रु से सामना हो जाला. ई ‘संक्रमण’ से बेचारी उबरबे ना करे कि ‘सुहागरात’ के डर सतावे लागेला. ई डर से ऊ सुस्त हो जाली सन.

ऊ खतरा से उबरके जब सामान्य होखे ली तबे रोज-रोज के साथी शत्रु के रुप ‘साजन’ सामने आ जाले. ई डर के भगावे के खातिर ऊ लोग हमेशा सजत संवरत रहेला. हालांकि ई ‘सजलो-संवरल’ एगो खतरा बन के आस पास के लईकन के जरिये ‘संदेह’ रुपी एगो खतरनाक बेमारी उनका पतिदेव में पैदा क देला आ बेमारी के सबसे खराब नतीजा सौत के रूप में सामने आवेला. अब मेहरारुन के सबसे खतरनाक शत्रु ‘सौत’ हो जाली सन. सौत के नांव से त सपनो में भी डेराली सन. अगर एतना सबकुछ हो जाए तो एतना ‘सदमा’ ऊ लोग के लागे ला कि जिनगी जहर हो जाला. ‘समाजो’ मेहरारुन खातिर बड़ा खतरा बा. समाज के देखावे ऊ का ना करे ली सन. ‘संत’ रुपी खतरा भी समाज क दिहल एगो शत्रु ह जे ‘संतान’ के नाम पर मेहरारून के डेरावत रहेला. एह ‘संत रुपी’ डर से ऊ अतना डेराइल रहेली कि ओह खातिर कुछुवो करे के तइयार हो जाली.

आधुनिक महिला लोग खातिर ‘सिनेमा’ एगो आर्थिक खतरा ह. एहमें जवन कपड़ा देखावे ला ओकरा चक्कर में ऊ जरूरी समान किने के भुला जाली सन.

मेहरारू मरदन क तुलना में अधिका भावुक होली सन. एही से संकट में फंसल लोग के समझावे लागे ली सन आ ई समझावल एगो नया शत्रु पैदा क देला आ घर में सास से, साजन से, सफाई देवे के परेला. एह से मेहरारू लोग ई बात के गांठ बांध लेउ कि ‘स’ से सारा उमर बांच के रहीं आ शान से बिना शक – शर्मिदगी के जिनगी गुजारीं.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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