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– जयंती पांडेय

जान जा राम चेला अबकि के चुनाव के अजबे हाल बा. नेताजी हार गइले लेकिन दुखी नइखन. काहे कि उनका दुख में शामिल होखे वाला केहु नइखे. सबलोग पार्टी के खुशी में शामिल बा. पार्टी जीत गइल ओह में नाच रहल बा. एगो नेताजी जीत गइले लेकिन खुशी नइखन मना पावत काहे कि उनका साथ के सब लोग पार्टी के हार से दुखी बा. माने जब ‘चना रहे तऽ दांत ना आ जब दांत बा तऽ चना ना.’ ई चुनाव के बात इहे भइल बा. स्कूल कालेज के रिजल्ट निकले ला त चर्चा होला कि ओकरा अतना परसेंट नम्बर आइल आ ओकरा कम आ गइल. लेकिन चुनाव में जे जीते ला ऊ सब फस्टे डीविजन. केहु नीचे ना.

ई चुनाव में केहु कहऽता कि लहर रहे. अरे रामचेला बतावऽ कि लहर रहित त अमेठी में रोड शो के बाद स्मृति ईरानी काहे हार जइती. बनारस में अजय राय काहे हरते. ई बात से साफ लागऽता कि कवनो लहर फहर ना रहे बस सब दोष ई जे पाब्लिक बा न ओही के रहे. अब कुफूत ई बा कि ई लोग नाया पब्लिक ले कहां से आवो लोग. जे बहरा से आवतो बाड़े सन ओकनी के आटा में नून अस कहल जा सकेला. आ मोदी भाई बाड़े कि ओकनियो के खेदे के चक्कर में परल बाड़े. ई चुनाव में खुशिओ देखल गइल आ दुखो. लेकिन अपना पंचायत अस खुशी कहीं देखे के ना मिलल. पहिले जे पंचायत के सदस्य रहे ओकरा परधान जी तेल लगावस. स्कूलन में दुपहरिया में बांटे वाला चाउर दाल तक भेजत रहले. काहे कि पूरा मेजरीटी बा. अब त लोग के गरज बा कि ओकरा संगें बनल रहे. ई मात के दरद लोग का बूझि? पहिले गहठबंधन रहे. गांठ खोल के धमकी देला पर पर सत्तादल के नेताजी आपन गांठ ढील क देत रहले. पहिले मंगला पर सहयोग मिलत रहे अब त सहयोग ले लऽ कहत चलऽता लोग. अब एह तरह के लोग के पता चली कि जीत के बाद के अइसन मात के पीड़ा का होला. शायद, ऊ लोग आपन अच्छा दिन बना लेउ त अपनो गाड़ी के तेल पानी मिल जाई.

अब जे जीत गइल त जीत के हरान बा. एगो नेताजी कहले रहले कि जे मोदी के वोट ना दी ओकर जगहि पाकिस्तान में बा. दोसर कहले कि जे मोदी के वोट दी ओकरा समुन्दर में बिग दियाई. लोग सोचल चलऽ पाकिस्तान गइला से निमन बा कि समुन्दर में डूब जाइल जाउ. जे जीत गइल उ हरान बा कि कइसे जीत गइनी आ जे हार गहइल ऊ हरान बा कि हार कइसे गइनी. खैर एहिजा त जीते के बात नइखे इहां त हरला वाला कहल जाता ‘हरला के हरिबोल’.


जयंती पांडेय दिल्ली विश्वविद्यालय से इतिहास में एम.ए. हईं आ कोलकाता, पटना, रांची, भुवनेश्वर से प्रकाशित सन्मार्ग अखबार में भोजपुरी व्यंग्य स्तंभ “लस्टम पस्टम” के नियमित लेखिका हईं. एकरा अलावे कई गो दोसरो पत्र-पत्रिकायन में हिंदी भा अंग्रेजी में आलेख प्रकाशित होत रहेला. बिहार के सिवान जिला के खुदरा गांव के बहू जयंती आजुकाल्हु कोलकाता में रहीलें.

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