– ओ. पी. सिंह


जे सुधरल बा ऊ त चुपाइल बा बाकिर जेकरा अपना मरजी का खिलाफ सुधरे के पड़ल बा ओकर पीड़ा उहे बता सकेला जे भोगत बा भा भोगले बा. नोटबन्दी के मार से जेकरा प कवनो असर ना पड़ल ओह फकीर के का मालूम कि ओकरा प का बीतत बा जेकरा आपन नोट अइसे पचावे के पड़ल कि ढकचे के ना पड़े. पेट फूलल जात बा बाकिर ढकार लीहल मना बा. आ आयकर में अइसन अइसन लोग भरल बा जे गुदगुदवले जात बा कि कवनो तरह से डकार निकल जाव आ ओकरा गन्ध से मालूम हो जाव कि का आ कतना पचा के बइठल बाड़ें. जब नोटबन्दी के एलान भइल त पहिला दिने सोनारन के बहार रहे. फेरू कुछ दिन ले बैंक कर्मचारियन के बहार के दिन आइल आ अब आयकर वालन के दिन आवत लागत बा. एकरा बाद सीबीआई वालन के दिन आई. कहे के माने कि सृष्टि में सभका ला इन्तजाम रहेला देर सबेर.

अतना दिन बात आजु नोटबन्दी याद पड़ल त ओकरा पीछे महाराष्ट्र के लोकल चुनाव नतीजा बा. एह देश में सिस्टम से अधिका सिस्टम के काट चलेला. तू डाढ़ डाढ़ हम पात पात. बस अबकी इहे पता ना चलल कि एह चोर सिपाही वाला खेल में बाजी केकरा हाथे लागल. कुछ त एहू चलते कि खेल अबहीं चालू बा आ पता ना कब ले चालू रही. नोटबन्दी का एलान का बाद जेकर करेजा जेतने फाटल ऊ मोदी के ओतने गरियवलसि आ गरियवले जात बा. पता ना ई कइसन तानाशाह ह जवना के अपना विरोधियन के इचिको परवाह नइखे. ना त पीएम के त बाते छोड़ दीं अइसन अइसन सीएम बाड़न कि अपना आलोचकन के मुँह बन्द करे में इचिको देरी ना करसु आ अपना के लोकतन्त्रिओ बतावत रहेलें. वइसे हमरा त इहो लागत बा कि एह देश में आन्दोलन चलावे के बेंवत नइखे रहि गइल केकरो में. देश शुक्रगुजार बा अन्ना हजारे के जिनका जनाआन्दोलन से अइसन जहर पैदा हो गइल कि अन्नो नीलकंठ बने के बेंवत ना जुटा पवलें. आ आन्दोलन का अभाव में जनमत जाने के सोर मेटा गइल.

नेतवन के घेरले चमचा उनुका के जानहीं ना द सँ कि जनता का चाहत बिया. भाड़ा के भोंपू आ दलाल पत्रकार एह लोगन के अस अन्हार में रखले रहलें कि एह लोग के सचाई के पतो ना चलल. जब से होश सम्हरले बानी तब से इयाद नइखे पड़त कि केन्द्र सरकार के कवनो अइसन फैसला आइल होखो जवना से देश के आदमी आदमी पर तुरते असर पड़ गइल होखो. आम आदमी के कम परेशानी ना भइल बाकि ऊ अपना के बस इहे सोच के तोस दे दिहलसि कि एह लाइन का बाद शायद अब फेरु कवनो लाइन में लगला के मजबूरी ना रहि जाई. आ बरीसन से देश के लूटत नेतवन के लागल कि जनता अपना परेशानी के बदला वोट में निकाल ली. अब लागत बा कि ओह लोग के आस हमेशा हमेशा ला टूट गइल. काहे कि नोटबन्दी का बाद जतना चुनाव आइल सभ में भाजपा आपन परचम लहरा देखवलसि. कुछ दिन ले त एकरा के पंचायत चुनाव का नाम प महटियावलो गइल कि लोकल चुनावन के मुद्दा कुछ दोसरे होला. आ जब राज्यन के चुनाव होखी तब जनता के मूड के असल थाह लागी.

मुम्बई आ महाराष्ट्र के अउरी नगरपालिकन के चुनाव में शिवसेना आ भाजपा के सीधा लड़ाई एक दोसरा से हो गइल त विरोधियन के लागल कि अब आइल बा ऊँट पहाड़ का नीचे. बाकि इहो आस पूरा ना हो सकल. ओहिजो भाजपा के कमल खिल गइल. आ हिन्दुत्व के समर्थकन के एह लड़ाई में विरोधिए खेते लाग गइलें. आ कुछ दिन में सुने देखे के मिल जाई कि अबीर कहाँ गिरल, पता जलल कि थरिए में. यूपी चुनाव के चार दौर बाकिए रहल जब महाराष्ट्र वाला रीजल्ट आ गइल. देखल जाव कि एह रीजल्ट के का असर पड़त बा राज्यन के बाकी चुनाव पर. हिन्दुत्व के सिपाहियन के ताकत अतना त होइए गइल बा कि अब अपने में दू दू हाथ क लेवे के मौका निकाल लेत बा. यूपी जइसन राज्य में एकहू टिकट दोसरा के दिहले बिना लड़ि लेवे के, रमजान जस बिजली दिवाली में माँगे के, कब्रिस्तान का साथे शमशान माँगे के हिम्मत आ जात बा.

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