अमला के माई : बतंगड़ – 101

बबुअवो कमाल के आदमी हवे. जबे लागेला कि अब ई सयान होखे लागल बा तबहिऐं कुछ ना कुछ अइसन बोल देला कि लोग माथा ठोक लेला कि हे भगवान, ई कहिया सयान होखी. आ जब लोग के ई हालत बा त ओकरा महतारी के पीड़ा सहजे समुझल जा सकेला.

बेचारी आन देश से का-का सोच के आइल रहुवे. सास मुअली त घर के मलकिनि बनला का नाते उऩुका गोलो-गिरोह के मलकिनी बनि गइल. आ भतार के मुअते त रानी हो गइल. ओकरा इशारा बिना कवनो आदमी-जन हिल ना सकत रहुवे. एक जने आपन बेंवत देखावे के कोशिश कइलन आ गोल-गिरोह के गद्दी पर बइठला का बाद ओकर हुकुम पर नाचे ला तइयार ना रहलन त उनुका के उघार क के दलान से फेंकवा दिहलसि आ अपने ओह गद्दी पर बइठ गइल.

अब एगो बेटा आ एके गो बेटी के महतारी घर के मलिकांव सम्हार लिहलसि. बिआहल बेटी बेटवा से जोग त रहुवे बाकिर दामाद अइसन गुरु घंटाल भेंटाइल रहुवे कि मौका मिलते पूरा ससुरारिए कब्जा ली. एहसे बेटिओ के घर के मलिकांव से फरके रखली. लोग त इहे जानत रहुवे कि बेटवा अबहीं अनुभवहीन बा बाकिर महतारी के त बढ़िया से मालूम रहुवे कि ऊ मतिहीनो हवे. ओकरा ऊपर कोढ़ में खाज का तरह ओकरा नशो धरा गइल आ बगैर नशा कइले ऊ रहिए ना सकत रहुवे. नशा त बेटिओ के धराइल बा आ साँझ होखते उहो टुन्न हो जाले. बाकिर बेटवा के अमल उनुका ला मुसीबत रहुवे.

महतारी पहिले त प्लान बनवली कि गाँवो के मलिकान अपने ध लीं बाकिर गाँव के बड़-बूढ एकरा ला तइयार ना भइलें त अपना एगो बराहिल के गाँव के गद्दी पर बइठवा दिहली आ ओकरे पाछे से गाँव के मलिकान सम्हार लिहली. ई इन्तजाम सबले बढ़िया साबित भइल काहे कि लूट-खसोट ई करसु बाकिर नाम जाव ओह बराहिल के. पूरा गाँवो जानत-मानत रहुवे कि एह बराहिल में अउर चाहे कवनो दोष होखे, ई बेइमान ना हो सके. बाकिर ओकर कमजोरी अइसन रहुवे कि अपना मलकिनी के इजाजत बिना मूततो ना रहुवे. ई इन्तजाम एह तरह ओह महतारी ला सबले नीमन रहुवे जे चाहत रहुवे के देर-सबेर बेटा एह जोग बनि जाव कि ओकरा के गद्दी पर बइठावल जा सके.

परदा पीछे से हर जतन कइली कि ओकर नशा छूटि जाव. एकरा ला ओकरा के बाहरो भेजली कई हप्ता के इलाज का बाद जब आइल त कुछ दिन ला लागल कि एकर अमल अब छूटि गइल बा. बाकिर ई भरम जल्दिए टूट गइल. एही बीच गाँव के गोतिया-देयाद गद्दी पर से इनका बराहिल के हटा के आपन आदमी बइठा दिहलें. आ ओहि दिन से महतारी बेटा के दुर्दिन शुरु हो गइल. पहिते त सोचली कि ई नयका आदमी उनुका के सजा करावे के इन्तजाम करी आ तब ई अपना ला गाँव के आम आदमी के दया-ममता बिटोर के फेरु गद्दी पर काबिज होखे के कोशिश करीहें. बाकिर ई नयका आदमी अतना चालाक निकलल कि गाँव का लोग के शिकायत अनसुनी करत रहल आ महतारी-बेटा का खिलाफ कवनो कार्रवाई ना कइलसि.

जबरा मारबो करे आ रोअहूं ना देव के हालत तब बनि गइल जब एगो दोसर आदमी चाणक्य बनि के आपन चोटी खोल के उनुका खिलाफ कानूनी लड़ाई के लगाम थाम लिहलसि. अब ऊ बेचैनो रहली बाकिर आम लोग के दया-ममता ना जीत सकत रही. काहे कि इहो आदमी आमे जनता रहुवे सरसरी निगाह में. अदालत से जमानत त मिल गइल बा बेटा-महतारी के बाकिर लोगो अब जाने लागल बा कि महतारी-बेटा कइसन घोटालेबाज ह लोग.

बेटा के लगा त दिहले बाड़ी जनता के नेता बने ला आ बेटा के सिखावे-पढ़ावे ला अपना खास आदमी-जन के लगाइओ दिहले बाड़ी बाकिर बेटवा रहि-रहि के कुछ ना कुछ अइसन बोलिए देत .बा जवना से ओकर मतिसून आ अमली भइला के राज खुल जात बा. कबो ई आलू से सोना बनावे लागत बा, त कबो बेरोजगारी से आतंकी. अरे पगला तेहूं त बेरोजगारे बाड़े, त एहिसे आतंकी बने के कोशिश करत बाड़े का. लोग के बूड़बक बनावे का फेर में एकरे बुड़बकाही सोझा आ जात बा. आ महतारी कपार ठोक लेत बाड़ी.

हे दइब, कुछहु करीह बाकिर केहू के अमला के माई जनि बनइह.

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