अरबा सहिओ रहला पर कुनबा डूबे के डर बा – बतंगड़ – 88

लोकतंत्र में लोक के चलेला बाकिर लोक के घोड़ा चलावेला तरह तरह के घुड़सवार मौजूद बाड़ें अपना देश में. केहू का लगे खानदान के नाम बा त केहू जाति आ फिरका का भरोसे अपना लोक के हाँकत आपन लोक-परलोक बनावे-सुधारे में लागल रहेलें. हालही में कर्नाटक का चुनाव में एह घुड़सवारन के करतब देखे के मिलल आ लोक ठकुआइल-भकुआइल देखते रहि गइल. एक दिन पहिले ले जे लोग एक दोसरा के हरावे-गरियावे में लागल रहुवे ऊ चुनाव के परिणाम का बाढ़ में दहात एके गाछ पर आसरा ले लीहल. एगो होला रामराज जब बाघ बकरी एके घाट पर पानी पिए लागेलें आ एगो होला बाढ़ के आफत जब साँप छुछुन्दर एके गाछ पर आसरा ले लेलें. ओह घरी उनुका सोझा आपन-आपन जान बचावे के फिकिर एक दोसरा के जान लिहला से अधिका होला.
बाकिर ई आपद धरम कतना दिन ले निभावल जा सकेला. एक ना एक दिन आपुस के विरोधाभास हावी होखहीं के बा. ज्ञान के बहत गंगा सोशल मीडिया पर एक दिन सीता स्वंयवर के कथा नयका संदर्भ में पढ़े के मिलल. सीता स्वंयवर में शर्त रहुवे कि जे शिवजी के धनुष पर प्रत्यंचा चढ़ा के देखा दी सीता के बिआह ओकरे से होखी. सगरी राजा जब आपन-आपन बल लगा के हार गइलें त सभे मिल के ओह धनुष के प्रत्यंचा चढ़ावे के कोशिश करे लागल. ई देखि के एगो विप्र पूछ बइठलें कि महाराज सभे, अगर जे कहीं रउरा सभे मिल के ई काम करिओ लेब त सीता केकरा से बिआहल जइहें. जबाब मिलल कि तब हमनी का अपना में लड़ के एकर फैसला कर लेब आ जवन राजा आखिर में जीयत बाँच जाई ओकरे से सीता के बिआह होखी.
एह घरी एगो नाकाबिल फेंकू प्रधानमंत्री का खिलाफ तरह तरह के काबिलन के जमात एक दोसरा से हाथ मिला के देश के एह नाकाबिल पीएम से छुटकारा दिआवो के सपना देखे-देखावे में लागल बा. ई लोग अपने तर्क के कि मोदी सरकार एगो नाकाबिल सरकार बिया तुरते कुतर्क साबित कर देत बाड़ें जब सभे मोदी के हरावे ला एक दोसरा के एकजुट हो जाए के गोहार लगावत बा. कुमारस्वामी के सत्यवादिता के लोहा त हमहूं मानत बानी जे चुनाव का पहिले कहले रहुवे कि अगर हमार सरकार ना बन पावल त हम जान दे देब. ओने बबुओ के गोल का सोझा जियला मरला के सवाल खड़ा हो गइल रहुवे. अगर जे कहीं कर्नाटको हाथ से बेहाथ हो गइल त बबुआ के जिनिगी नरक होखल तय रहुवे. दुनु गोल के मजबूरी कर्नाटक में अन्हरा-लंगड़ा के सरकार बनवावे में सफल हो गइल आ मौका देखते देश भर के मोदी विरोधी हाजिर हो गइलें जयकारा लगावे खातिर.
सभ छँवड़िन के झूमर पाड़े जात देखि के दिल्ली के लंगड़िओ कूद पड़ल. भलहीं ओकरा के मंच पर पहिला कतार में केहू आवे ना दीहल. सभका लागत बा कि अगर सगरी मोदी विरोधी गोल एकजुट हो जासु त मोदी के आसानी से हरावल जा सकेला. आ ई लोग ओह कहाउत के सही साबित करावे में लागल बा जब एगो महान साँख्यिकीविद् नदी के औसत गहराई निकाल के अपना कुनबा के पार करे के सिग्नल दे दिहलसि. ऊ हिसाब लगवलसि कि नदी के औसत गहराई ओकरा परिवार के औसत लम्बाई से कम बा आ ओकर कुनबा आराम से नदी पार कर जाई. बाकिर नदी में हेलवला का बाद जब ओह पार चहुँपल त देखलसि कि ओकर पूरा कुनबा नदी में डूब चुकल रहुवे. ओकरा तबो समुझ में ना आ पावे कि आखिर अरबा सही रहला का बावजूद कुनबा डूबल त कइसे.
एह लोग के अरबा के काट एगो अउर अरबाबाज निकाल के बतवले बा कि अगर सभे मिलिओ गइल तबहियों भाजपा सबले बड़का गोल बन के उभरी आ ओकर कम से कम 226 गो सांसद जीत जइहें. बाकिर हमनी के एह अरबाबाजन के फेर में नइखे पड़े के. नोटा के बटन दबावहूं के गलती नइखे करे के काहे कि ऊ सगरी वोट देश के हरावे के काम करी. सुनत नइखीं चर्च आ मस्जिद से एके आवाज उठत बा कि सभे मोदी का खिलाफ वोट करे. दुख त ई देख के होखत बा कि एकरा जबाब में मठ आ मन्दिरन से नइखे सुनात कि सगरी वोट मोदी का गोल के दीहल जाव.
आ चलत चलत एगो अउर कहाउत रेघरियावल चाहत बानी – चार बाँस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण. एते प सुल्तान है मत चूको चौहान.

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