आतंक मे जियत जेहादी – बतंगड़ – 92

हमनी के हिन्दुस्तानो गजब के देश ह. कहे के त लोकतंत्र बा बाकिर सगरी, एकाध गो के छोड़ के, राजनीतिक गोल राजवंशी परम्परा पर चलेली सँ. कांग्रेस के मलिकान नेहरु खानदान का लगे गिरवी राखल बा, त सपा के मुलायम परिवार, राजद के लालू परिवार, ममता के बनर्जी परिवार, त माया का जियते केहू दोसर सपनो ना देखि सके बसपा सुप्रीमो बने के. कश्मीर में अब्दुल्ला आ मुफ्ती परिवार का लगे आपन आपन गोल बा, आंध्र में नायडू परिवार, तमिलनाडु में करुणानिधि परिवार, अउर ओडिशा में पटनायक परिवार. देश के सुयोग से अगर एहमें कवनो निर्वंशी निकल जासु तबो पकिया तौर पर कहल ना जा सके के कि एह गोलन में लोकतंत्र आइए जाई. दोसरा तरफ बँवारा आ दहिनवारा गोल बाड़ी सँ जे एह बीमारी के छूत से बाचल बाड़ी सँ.

कांग्रेस के मौजूदा अध्यक्ष पता ना कुंवारे मरीहें कि बाद में पता चली कि ई शादीशुदा हउवें आ कम्बोडिया भा कवनो दोसरा जगहा इनकर परिवार बसल बा. जवना आदमी के असल नाम, असल मजहब, असल डिग्री, असल नागरिकता का बारे में कुछ पकिया नइखे ओकरा बारे में कवनो बाति कहलो बेजाँय होखी. आ अगर ऊ जमानत पर चलत होखे त अउर सावधान रहे के जरुरत होला.
त एही देश में इहो देखे के मिलल कि आपने सरकार गिरा के जश्न मनावल गइल. जेकर पद गइल ओकरा बारे में त दावा का साथे त कुछ कहि ना सकीं बाकिर जवना लोग के भक्त कहल जाला, ऊ लोग त गजबे के खुशी मनावल. लागल कि सरकार एह लोग के गरदन में जबरिया टाँगल ढोलक रहुवे जवना के बजावल मजबूरी रहल. एगो त ई बाति भइल कि गठबन्हन का सरकार में एह लोग के जतना ना चलत रहुवे ओह ले बेसी अब राज्यपाल सरकार में चलल करी. एहिजा इहो बतावल जरुरी बा कि राज्यपाल शासन कश्मीरे के खासियत ह. बाकी राज्यन में अइसनका हालात में राष्ट्रपति शासन लागल करेला. कश्मीर में राज्यपाल शासन के छह महीना चलावे ला संसद के कवनो सदन के मंजूरी लीहल जरुरी ना होखे. हँ छह महीना बाद जरुरी भइल त राष्ट्रपति शासन लगावे के पड़ी आ तब संसद के दुनु सदन से मंजूरी लीहलो जरुरी हो जाई.

राज्यसभा में सबकुछ का बावजूद अबहियों राजग का लगे बहुमत नइखे जुटल आ अबहीं कुछ महीना अइसहीं रहे के बा. एह से देश के विरोधी गोल के दबावो झेले के मजबूरी नइखे. ई लोग परेशान बा कि कश्मीर के जेहादियन, अलगाववादियन के अब मोदी के आतंक में जिए के मजबूरी हो गइल. जबरा मरबो करी आ रोवहूं ना दी. सरकार जाते पत्थरबाजन के टोल गायब हो गइल बा. अब जीप का बोनट पर कवनो ढेलामार के बान्हलो के जरुरत नइखे. एही से ई लोग अब भाजपा के आतंकी गोल बतावे लागल बा. सभे एही आतंक में जी रहल बा कि कहीं हमरो राज में मोदी मत आ जाव. कांग्रेसी नेता मोदी का आतंक से अतना डेराइल बाड़ें कि हाफिज सईद से राय मशविरा करे लागल बाड़ें. ओने हाफिजो कहले बा कि ओकरा आ कांग्रेस का सोच में शुरुए से एका रहल बा. दुनु के सोच एके तरह के बा. तबे मणिशंकर पाकिस्तानी हुक्मरान का सोझा गोहार लगावत लउकेलें कि कुछ करीं सरकार एह मोदी के केहू तरह से हटाईं. केहू तरह में हर तरह के तरह शामिल बा.

सचहूं जेहादियन के आतंक में जियत देखि के एक तरह के संतोष होखत बा कि एहू लोग के पता चलल कि मोदी आतंक पसारे में इनकरो बाप हउवन. अब तोहरा के कहलो से त रोकल ना जा सके. कहि ल जी भर के आतंकी. एहसे इहे पता चलत बा कि कतना आतंक में जियत बा ई लोग.

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