– ओ. पी. सिंह

एगो पुरान गीत के मुखड़ा आजु याद आ गइल. इयरवा से लागल बाटे इयरिया घरवा का चोरिया-चोरिया ना. अब चुनाव का माहौल में इयार के इयारी के चरचा से ई मत बूझीं सभे कि हम वेलेंटाइन डे के कवनो चरचा करे जात बानी. हमनी किहाँ त वसन्त पंचमीए से शुरू हो जाले बेलाग रसिकता जवन फगुआ ले इजाजती तौर प आ ओकरा बादो कुछ दिन ले चइता में सनाइल हैंग ओवर में. एह मौसम में भर फागुन बूढ़ देवर लागे भा चुनरी में लागताटे हवा बेल-बॉटम सीया द ना – जइसन गीत भा एक से एक फूहड़ गीतन के आवाज राहे-पेड़ा सुनाए लागेला आ रउरा चुप रहि जाए होला. फगुआ के बहुते गीत-गवनई से नीमन बुझाए लागेला डोमकच. बारात निकलला का बाद दुलहा का घरे होखे वाला डोमकच के त साफे मनाही होला कि कवनो मरद के ई डोमकच ना त देखे के चाहीं ना सुने. एकरा के मेहरारूए मंचित करेली आ एही बहाने रतजगो हो जाला. बाकि अब एकाध जगहा एकरो लाइव ब्रॉडकास्ट लाउड-स्पीकर लगा के होखे लागल बा. अब बाति बहकि के डीरेल हो जाव ओहसे पहिले लवटल जाव असली मुद्दा प.
हम जवना इयारी के बात उठवनी ह तवन सीधे चुनावे से जुड़ल बा. जइसे नोटबन्दी क एलान के बाद अकूत करियाह धन राखे वाला आ सरकार का बीचे तू डाढ़-डाढ़, हम पात-पात वाला खेल चलल वइसने खेल अब चलत बा. जइसे घर वालन के नजर बचा के नवहियन के इयारी परवान चढ़ेले वइसहीं चुनाव आयोग के नजर बचा के वोटरन प जाल फेंकात रहेला. अपना देश के बकुलाह सेकूलरिज्मो गजबे के ह. सरस्वती पूजा, दुर्गा पूजा, विसर्जन, इहां ले कि दाह संस्कारो रोकल जा सकेला बाकि तजिया का राह में कवनो बाधा ना आवे के चाहीं. मुसलमान आ ईसाई वोटरन के खुलेआम लुभावल जा सकेला बाकि हिन्दुवन के ना. बाकी गोल खुले आम दावा कर सकेलें कि ऊ हतना टिकट मुसलमानन के दिहले बाड़ें बाकि दोसर गोल ई दावा ना कर सके कि ऊ हिन्दू के कतना टिकट दिहले बाड़ें. से दोसरका गोल के मजबूरी हो जाले कि ऊ घुमा के नाक पकड़े. यूपी में जब भाजपा का विरोधी गोलन में हाराबाजी लागल बा कि मुसलमान वोट के बिटोरत बा, भाजपा एको मुसलमान के टिकट ना दे के आपन इरादा जाहिर क दिहलसि आ प्रचार के जिम्मेदारी मीडिया प डाल दिहलसि. सरदेसाई, दत्त, घोष, थापर, कुमार जइसन एंकरन के त पतो ना चले कि ऊ लोग कतना चाव से भाजपा के प्रचार क देला. दीदीया खुलेआम पक्षपात ना करे त ओकरा किहां भाजपा के गोड़ो धरे के जगहा ना भेंटाइत. बाकि बकुलाह सेकूलरिज्म के ई पैरोकार लोग देश के माहौल अइसन बना दीहल कि भाजपा अकेले बहुमत पा लिहलसि केन्द्र में, अयोध्या के राम मन्दिर के मुद्दो अइसने बना के ध दिहले बा लोग. भाजपा अगर नाम लेव तब हल्ला आ नाम ना लेव तबो हल्ला. राम मन्दिर के मामला देश के सुप्रीम पंचायत में बा. एगो फोन प बेल देबे वाला आ रात के दू बजे सुनवाई खाति अदालत खोल देबे वाला एह कोर्ट का लगे राम मन्दिर जइसन मुद्दा प फैसला देबे के समय नइखे. ऊ एह मामिला प रोज आ लगातार सुनवाई क के हमेशा ला मामिला खतम क सकेले बाकि पता ना काहे अइसन हो नइखे पावत जबकि हाई कोर्ट एह बारे में आपन फैसला दे चुकल बा.
अइसने एगो मुद्दा बा लव जिहाद के. वो कत्ल भी करते हैं तो चर्चा नहीं होती, हम आह भी भरते हैं तो हो जाते हैं बदनाम. सही भा गलत बाकि दोसरा जाति-पंथ में शादी-बिआह प हमेशा से बवाल मचत आइल बा. अबहियों मचत रहेला. अपना असली नाम-जाति-पंथ के जानकारी बिना दिहले गैर जाति-पंथ वाला भा वाली के अपना इयारी में फँसावल नैतिक रूप से गलत काम ह आ एकर पुरजोर विरोध होखहीं के चाहीं आ तब अउरी जब एह तरह फँसावल मनई के जाति-पंथ बदलावल हिडेन एजेन्डा होखे. भाजपा अबकी यूपी ला जारी अपना घोषणा पत्र में लिखले बिया कि लइकियन का स्कूल कॉलेज भिरी रोमियो विरोधी बल के तैनाती कइल जाई. कुछ पत्रकारन के एहू प आपत्ति बा. उनुकर कहना बा कि चुनावी फायदा ला लव जिहाद के मुद्दा घूमा के उठवले बिया भाजपा. इहो कहना बा कि रोमियो भा मजनू जइसन ईसाई-मुसलमान नाम दीहल गलत बा. कुछ दोसरे नाम होखे के चाहीं. विरोध बजटो के कइल जात बा कि गाँव आ गरीबन के फायदा चहुँपावे वाला बजट वोटरन के लुभावे ला पेश भइल बा. अब अगर गाँव-गरीब का खिलाफ जाए वाला बजट रहीत त का विरोधी बकसि देतें ? शायद असल शिकायत त इहे बा कि गरदन मरोड़े के मौका काहे ना दिहलसि मोदी सरकार.

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