– ओ. पी. सिंह


सुदर्शन के लिखल कहानी – हार की जीत – आजु बरबस याद आ गइल. ओह कहानी में त बाबा भारती से छीनल घोड़ा खड़ग सिंह लवटा दीहले रहल बाकि आजु के खड़ग सिंह से ओह नैतिकता के उमेद कइल बेकार बा. आजु के खड़ग सिंह घोड़वा त लेईए लिही, बाबा भारतियन के गरदनवो उतार लेबे में ओकरा कवनो हिचक ना होखी. काहे कि खड़ग सिंह के जमाना त पता ना कहिये खतम हो गइल, जब डकइतनो में थोड़ बहुत नैतिकता बाँचल रहत रहे. अब त केजरीवालन के जमाना आ गइल बा. आजु के ई डकैत बाबा भारती के चेला बनि के उनुका के अस बुड़बक साबित करा दिहलसि कि एक त ऊ अब दुबारा फेरु कवनो जन आन्दोलन खड़ा करे से हिचकिहें, आ दोसरे अगर कोशिश करबो करींहे त लोग भरोसा ना करी. लोग खड़गे सिंह प भरोसा नइखे छोड़ले अब ओकरा बाबा भारती जइसन संतो पर भरोसा नइखे रहि गइल जेकरा सही गलत के पहचान करे ना आइल आ अइसन आदमी के आपन प्रतिनिधि बना दीहलन जे महाधूर्त निकलल. अपना बेटन का नामे लीहल किरियो भुला दिहलसि आ एगो नए तरह के भठियरपन के पनपा दिहलसि. ऊ त धन्य बाड़ें गोवा आ पंजाब के वोटर जे एकरा जाल में ना फँसलन.
अब एह झाड़ूमार के नया कारस्तानी सामने आइल बा. अनका धन प कनवा राजा वाला कहाउत के सही साबित करा दिहलसि ई आदमी. जनता के धन के ई दूनू हाथे लुटवलसि दोसरा-दोसरा राज्यन में आपन महिमामंडन करे में. से लेफ्टिनेंट गवर्नर एकरा गोल से ऊ सगरी रूपिया असूल करे के आदेश दे दीहलन बाड़ें. बाकि तय मानीं कि ई मनई अब एकरो के आपन मुद्दा बना ली. ई त देखत आइल बा कि सरकार में बइठल गोल सरकारी धन के अपना बाप के धन समुझ के राखेला आ दूनू हाथे लुटे आ लुटावे में लागल रहत आइल बा. ओकरा का मालूम रहल कि घोटालाबाजन के सरकार वाला जमाना बीत गइल बा. अब त कहल जात बा ना खाएब, ना खाए देब. ना सूतब ना सूते देब. फरजी सर्टिफिकेट वालन आ राशन कार्ड बनावे वालन के दिन लदा गइल बा. अब ओकरे झाड़ू ओकरे मूड़ी प बरसे के मौका खोजत बा. खस्सी के माई कहिया ले खरजिउतिया मनाई ! देर सबेर ओकरा जाहीं के बा.
खस्सी कटाए के बाति आ गइल त याद पड़ल कि नवराति चलत बा आ अबकि हमरा यूपी में गोश्त के कारोबारी हड़ताल प बाड़ें. बड़ा मजा रहत आइल रहुवे एहलोग के अबहीं ले. वोट बैंक के लालसा में कवनो सिकूलर गोल; सही हिज्जा बा; में अइसन बेंवत ना रहल कि ऊ एह कसाईयन से ओकर लाइसेंस माँग सकसु. आ अब बिना कवनो नया कानून बनवले, पुरनके कानून आ अदालती आदेश का सहारे एह नाजायज कारोबार के डाँड़ तूड़ दिहलसि योगी सरकार. दीदियो सन्न बिया आ प्रेश्याओ. अब ना त केहु सुने वाला बा, ना गुने वाला. बेजरुरत आपन सगरी इज्जत असहिष्णुता का नाम प गँवा देबे वाला लोग के अफसोस होखत होई कि अगर रिले रेस का तरह कुछ लोग आपन इज्जत बँचा के रखले रहीत त आजु एह मुद्दा प लुटा सकत रहुवे कुछ लोग. अब पछताए होत का जब चिड़िया चुग गई खेत ! वोट बैंक आ नोट बैंक धराइले रहि गइल आ ई छप्पन इंचिहा आपन कमाल देखा दिहलें. जेकरा के फ्रींज एलीमेंट कहात रहे ऊ अब मुख्यधारा बनि गइल बा आ जे एह गलतफहमी में रहल कि मुख्यधारा तय करे के अधिकार ओकर बपौती ह, ऊ अब फ्रींज बनि के रहि गइल बा. खतरा ई हो गइल बा कि पता ना अब ऊ कहिया फ्रींज से एक्सटिंक्ट बनि जाई. एक लाख पूत सवा लाख नाती ओकरा घरे दिया ना बाती.

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