घुन का फिकिरे दीयकन के दुबराइल : बाति के बतंगड़ – 17

– ओ. पी. सिंह


नोटबन्दी के मार से आम जनता के भइल परेशानियन से कुछ नेता बहुते परेशान बाड़ें. उनकर कहना बा कि जौ का साथे घुनो पिसाता आ सरकार के चाहत रहुवे कि घुन के बचावे के इन्तजाम पहिले कर लीत. आ हमरा लागत बा कि घुन का फिकिरे दीयका दुबरात बाड़ें सँ. जौ पिसाई त घुन के पिसाहीं के बा. काहे कि ओकरा के अलग ना कइल जा सके. पिछला सत्तर बरीस से देश आ समाज में लागल ई दीयका फोंफड़ क के राख दिहले बाड़न स देश आ समाज के. असल में एहनी के घुन के फिकिर त नाम लेबे ला बा, असल चिन्ता बा कि जौ काहे पिसात बा. आ हम सोचत बानी कि करिया धन वाला ई जौ जामल कइसे, केकरा चलते. आ पिसाई के इन्तजाम के करवलसि.

कांग्रेसे का राज में एह जौ के जमावे के इन्तजाम भइल आ कांग्रेसे का राज में अइसन इन्तजामो के शुरुआत भइल जवना सहारे एह जौ के महीन पिसाई के राहो खुल गइल. इन्दिरा गाँधी के राज में साल 1973-74 में इन्कम टैक्स के दर रहुवे 97.7 फीसदी. अब मतिहीनो समुझ सकेलें कि सौ रुपिया कमइला पर जब 97 रुपिया 70 पइसा टैक्स दे देबे के पड़ी त होखी का. या त कमाए वाला अपना कमाई के चोरा के राखि ना त कमइले छोड़ दी. आ भइबो इहे कइल. जम के करिया धन उपजल. आजु जे लोग छाती कूटत बा कि नोट खातिर लमहर लमहर लाइन लागत बा, शायद भुला गइल बा कि एगो हाथ घड़ी खरीदे खाति लोग दू दू दिन लाइने में सूतत बइठत रहुवे, प्रिया स्कूटर खाति साल साल भर के लाइन रहत रहुवे. तब कम्पनियन पर रोक रहत रहुवे कि अधिका सामान ना बना सकसु. मकसद बस इहे रहत रहे कि मोट कमाई के मौका मिलत रहो. सत्ताधारियन के आ लगुआ भगुअन के अरबो खरबो विदेशी बैंकन में जमा रहे. आजुओ बहुते लोग के बहुते धन विदेशन में जमा बा ओह देशन से अइसन समुझ बना के राखल रहे कि एह करिया कमाई के सुराग मत लागो. इलाज का नाम पर बेर बेर के विदेश यात्रा इलाज ला कम, अपना कमाई के बचवला के बेसी रहत रहुवे.

ई त भइल जौ के उपजला के किस्सा. अब जानल जाव कि पिसाई के इन्तजाम कइसे कर गइल इहे लोग. राजीव गाँधी का जमाना में मोबाइल आ गइल आ मनमोहन सिंह आधार कार्ड के इन्तजाम करा गइले. आज करिया धन का खिलाफ एही दुनू सरन्जाम के इस्तेमाल कइल जात बा. सभका के आधार कार्ड से जोड़ के बैंकिग पर अकुशा लाग गइल. पता लगावल बहुते आसान हो गइल कि कवन खाता केकर ह. गैस के सबसिडी का नाम पर जवन लूट होखत रहे, मनरेगा के लूट सब कुछ आधार कार्ड का सहारे काबू मे आ गइल. साधन उहे रहल बस साधे के लक्ष्य बदल गइल.

शासक के नीयत साफ रहो तो हर समस्या के समाधान आसान हो जाला. एगो जमाना रहुवे कि घोटालाबाजन के मौज रहत रहे आ पीएम मौह सधले सभकुछ चुपचाप देखत रहसु. उनुका बेंवत में ना रहल कि घोटालाबाजी पर रोक लगा सकसु. एगो ईमानदार पीएम का शासन मे जतना बेइमानी हो गइल ओकर कवनो दोसर नमूना ना मिली. ठीक वइसने जइसन भोजपुरी इलाका के कुछ विवेकी साहित्यकार अपना राय से भोजपुरी के जतना नुकसान चहुँपा गइलें ओतना दोसर केहु ना पँहुचा पाइत. अब एह सगरी दीयकन पर किरासन तेल डलात बा त ऊ माहौल बिगाड़े में लागल बाड़ें. गनीमत अतने बा कि जनता एह लोगन के चिन्ह गइल बिया आ एकनी के बहकावा में नइखे आवत. ओकरा मालूम बा कि दीदीया, बहीना, बबुआ के आपन चिन्ता बा, जनता के ना.

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