– ओ. पी. सिंह


तेज मीडिया का जमाना में रोजे एगो ना एगो मुद्दा पनपना के उठेला. कई बेर ओह मुद्दा के बढ़िया से भँजावे का पहिलहीं एगो दोसर मुद्दा उठ खड़ा होला. सोशल मीडिया प त एह काम खातिर बाकायदा बनल टीम बाड़ी सँ जवन तय करेली सँ कि कब कवना मुद्दा के हवा बनावे के बा आ कब कवना मुद्दा के हवा निकाल देबे के बा. पिछला हफ्ता भाजपा अध्यक्ष अमित शाह महात्मा गाँधी के चतुर बनिया बता दीहलें. गाँधी के चेला-चाटियन के फौज तुरते एह मुद्दा के हवा बनावे लागल. त दोसरा तरफ से कहल गइल कि बनिया के बनिया बतवला में कवन कसूर हो गइल. आ बनिया चतुर ना होखे त ऊ बनिया कइसन. पता ना के एह गाँधी के महात्मा के पदवी दे दीहल. हम अपना के ओह लोग में शामिल मानीले जे एह महात्मा के वक्रोक्ति में महान आत्मा भले कह देव, महात्मा कबो ना कह सके. ठीक ओही तरह जइसे कुछ लोग जवाहर लाल के पंडित मान लीहल. जवाहर लाल के रसिकता आ कामुकता के अनेके दृश्य मौजूद बा बाकिर अइसन कवनो उदाहरण नइखे जवन उनुकर पांडित्य देखावत होखे. शायद ब्राह्मण वोटबैंक का चलते उनुका के पंडित के नाम दे दिआइल रहुवे. जवाहर लाल के आपन आ उनुका खानदान के बेवहार वाला कवनो दोसर परिवार रहीत त ब्राह्मण समाज ओकरा के कबो ब्राह्मण ना मानीत. बाकिर कहले जाला कि बरियरका के सार बने वालन के लाइन लाग जाई, कमजोरका के बहनोई बने वाला के खोजे के पड़ेला. खैर बात तनिका बहक गइल.

जबले चतुर बनिया के मजगर इस्तेमाल हो पाइत तबले एगो सड़क छाप अनेरिया देश के सेना प्रमुख के सड़क छाप गुन्डा बोल दिहलसि. एकरा बाद जवन बवाल उठल तवना के बँड़ेरा में चतुर बनिया साफे बिला गइल. जब ले कश्मीर में सेना प ढेलाबाजी होत रहल तबले देश के सेकूलर जमात मगन रहुवे. बीच बीच में सवाल जरुर उठावल जात रहुवे कि कहाँ गइल छप्पन इंची सीना कि रोजे जवान कटात बाड़ें. ओहू बेरा हम कहले रहुवीं कि परीकऽ ए बिलार, एकदिन खइबऽ मूसर के मार. आ ऊ दिन जल्दिए आइओ गइल. टर्निंग प्वायंट बनल सेना के जीप प एगो ढेलामार के बान्हल. देखते देखत ढेलामार गायब हो गइलें. सेना आतंकियन के मार गिरावे लागल, पाकिस्तान के हर बेजा हरकत के सही जबाब दिआए लागल त सेकूलर जमात बेचैन हो उठल. ओकरा से सेना के ई गुन्डई बरदाश्त ना भइल. ऊ त इहे चाहत रहुवे कि सेना ठोकात रहो बाकिर अब सेने ठोके लागल त सड़क प आ चुकल लुहेड़न में से एगो बड़का लुहेड़ा सेना प्रमुख के सड़क छाप गुन्डा बोल दिहलसि. बाकिर ओकरा इचिको अन्दाज ना रहल कि देश के मिजाज बदल गइल बा. देश अपना सेना का साथे खड़ा बावे आ ओकरा तरफ आँख उठावे वाला के आँखि फोड़े ला तइयार बा. बड़ बड़ जने दहाइल जासु आ गदहा थाहे कतना पानी ! देश के बदलल माहौल देखि ओकरा नेता के नानी याद आ गइली आ चल दिहलसि ननिअउरा. एह नेता के सबले बड़का खासियत हो गइल बा कि जब जब कवनो बड़का मौका आवेला तब तब ई विदेश के सैर प चलि जालन. अब राष्ट्रपति चुनाव के मौका आइल त इनका ननिअउरा गइल जरुरी हो गइल. वइसे अधिका लोगन के इहे कहना बा कि नानी से भेंट करे नइखन गइल, अपना महबूबा से भेंट करे जात रहेलन विदेश. सत्ता के जहर पीये के शौकीन इनकर महतारी नइखी चाहत कि ई ओह विदेशी लइकी से बिआह क के आपन राजनीतिक भावी खराब क लेव. गइल ऊ जमाना जब मुसलमान से निकाह करे वाली के आपन नाम दे दिहले रहुवे एगो चतुर बनिया. आजु ले ऊ नमवे एह लोग के जिन्दा रखले बा. चतुर बनिया के चतुराई के ई सभले बड़हन नमूना बा देश का सोझा. बाकिर सड़क छाप गुन्डा एह चतुर बनिया के चतुराई के चरचा ना चले दिहलसि, हमरा एकरे अफसोस बा.

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