– ओ. पी. सिंह


एहसे पहिले कि हम असल मुद्दा प आईं एगो घटना बतावल जरुरी लागत बा. एक दिन हमरा पड़ोसी के नौकर हमरा से अपना मालिक के शिकायत करत कहलसि कि – देखीं ना ओमप्रकाश जी, संजय जी गजब के आदमी बाड़ें. जहिया हम उनुकj दूध पी लीहिलें तहिया त कुछ ना कहसु आ आजु नइखीं पियले त अछरंग लगावत बाड़न कि हम उनुकj दूध चोरा के पी लिहले बानीं !

ओकरा शिकायत में गजब के मासूमियत रहल. हमहूं मान गइनीं कि ठीक कहत बाड़ऽ, संजय के अइसन ना करे के चाहीं. अरे पकड़े के बा त ओह दिन पकड़ऽ जहिया चोरी होखे. रउरा का लागत बा, हम ठीक कहनी कि ना ?

अब ई घटना एहसे याद पड़ गइल कि कुछ दिन पहिले एनडीटीवी के मालिक मलकिनी का घरे छापा पड़ गइल. प्रणय राय, हम त इहे जानत बानी आ इहे कहब, के नाम का बारे में सोशल मीडिया प तरह तरह के नाम उछालल जात बा. बहुते लोग के कहना बा कि प्रणव जेम्स राय नाम ह उनुकर. अब नाम कुछुवो होखे ओहसे राय त ना बदले के चाहीं. कहे वाला त अंगरेजी में एनडीटीवी लिखत ओकरा पहिले हिन्दी में र लगा देत बाड़न. लेकिन ई बहुत नाजायज बात बा. आखिर रंडियनो के आपन इज्जति होला. ऊ जवन करेली खुलेआम करेली. ई उनुकर पेशा ह आ अपना पेशा में ऊ लोग पूरा ईमानदारी बरतेला. केहू के पेशा के एह तरह से बेइज्जति ना करे के चाहीं. रहल बात एनडीटीवी के त हम त ओकरे बात करब.

चोर चोरे होला. ऊ ई ना कह सके कि हम खानदानी चोर हईं आ पुलिस हमरा से पूरा इज्जत का साथ पेश आवे. कुछ लोग कहत बा कि घोटाला त दस बरीस पुरान ह, ओकरा प अब कार्रवाई काहे होखत बा. अरे भाई, ई त बताव कि तब घोटाला भइल रहुवे कि ना ? कव बरीस पुरान मामिला ह, एहसे का फरक पड़त बा. सीबीआई जानत रहल कि ई लोग खानदानी ह आ एह लोग से बहुते सम्हरि के पेश आवे के पड़ी. पूरा धेयान रखलसि कि एनडीटीवी के आफिस में, ओकरा न्यूज रुम में ना घुसल जाव आ ना घुसलसि. अलग बाति बा कि न्यूज रुम न्यूज रुम होला कवनो मंदिर, मस्जिद, चर्च ना होखे कि ओकर तलाशी ना लीहल जा सके. आ अगर लेइयो लीहल जाव त कवन अपराध हो जाई. कुछ ना मिले तब गलत कहल जा सकेला. बाकिर प्रणय राय का साथे एगो पूरा जमात छाती पीटत खड़ा हो गइल. केजरीवाल आ ममता जइसन ईमानदार नेता लोग तुरते बयान परोस दीहल कि मीडिया पर भइल एह हमला से लोकतंत्र कमजोर होखी. एगो कार्टून बनवला का चलते, एगो पोस्ट शेयर करे का चलते केहू के गिरफ्तार क लीहल गलत ना होखे, एकरा से लोकतंत्र कमजोर ना पड़े. काहे कि ईमानदारी के देवी प कवनो तरह के अछरंग बरदाश्त ना कइल जा सके. लोकतंत्र अइसने टूकड़खोरन आ देश के टुकड़ा टुकड़ा करे करावे के बात कहे वालन प टिकल बा. देश बरबाद हो जाव त हो जाव बाकिर खानदानी चोरन के चोरकटई प कवनो तरह के एक्शन ना होखे के चाहीं.

मीडिया मलिकान सैकड़न कर्मचारियन आ पत्रकारन के हटा फेंके त मीडिया के आजादी मजबूत करेला. एह प कवनो चरचा ना होखे के चाहीं. मीडिया के आ मीडियावालन के हर तरह के कुकर्म होखे के छूट मिले के चाहीं. का हो गइल कि कवनो एंकर के सहोदर भाई सेक्स रैकेट चलावे का मामिला में फरार चलत बा. भाई के कुकर्म खातिर ओह एंकर के त दोषी ना ठहरावल जा सके. ऊ त बाति बाति में दोसरा से पूछत रहेला – कवन जात हो भाई ? बाकिर का कबो आपन जात बतवले बा ? त ओकरा से ई उमेद काहे राखल जात बा कि ऊ अपना भाईयो के कच्चा चिट्ठा अपना चैनल प खोल के देखावे. अरे भाई, हँसुआ केतनो तेज भा भोथर होखी, खींची अपने ओरि. मालिक के नमक खात पत्रकार से नमकहरामी करे के उमेद काहे लगावल जात बा. मालिक के घोटाला प पैनल ऊ काहे बइठावो जब कवनो चैनल एह प बहस नइखे करत. अइसहीं ना नू कहाव कि – चोर चोर मौसेरा भाई.

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