– ओ. पी. सिंह


अबहीं चुनाव में हार के दरद कमो ना भइल रहे कि मोदी के राजनीति के तिरशूल आ के करेजा में धँसि गइल. आहो नइखे निकल पावत, आ निकले त केहु सुनहू वाला नइखे. अबले जवना राजनीति का राहे चलत रहुवे लोग त बुझत रहुवे कि राजनीति एही राहे चलत रही आ ओह लोग के सत्ता बरकरार रही. बाकिर राजनीति अइसन करवट बदललसि कि पूरा उघार क दिहलसि. लोकतंत्र में बहुमत के राज चलेला बाकिर हमनी का देश में बहुमत के अइसन छिन्न भिन्न क दीहल रहुवे कि एहिजा अल्पमतियने के शासन चलत रहुवे. हिन्दुस्तान के सबले बड़का जमात के दलित, पिछड़ा, अगड़ा में टुकड़ा टुकड़ा कइलो से सन्तोष ना रहल त कबो असहिष्णुता का बहाने त कबो आजादी का नाम प आपन बढ़त बनवले राखे के कुचक्र चलावल जात रहुवे. कुछ चुनिन्दा पत्रकार, कुछ चुनिन्दा लोग सत्ता के चाबी अपना हाथ में पकड़ले बइठल रहला के गुमान में आ गइल रहुवे, एह लोग के इचिको अनेसा ना रहल कि कबो अइसनो हो जाई कि ई लोग एकदमे अकेला पड़ जाई.
एक जमाना में जइसन हनक इन्दिरा गाँधी के बन गइल रहल ओहू से बरियार हनक मोदी के बन गइल बा. मीडिया पर आपन कब्जा बनवले ई पत्रकार लोग सपनो में ना सोचले रहुवे कि कबो देश के सत्ता एह लोग के अनदेखा करत जनता से सीधा संवाद बना लेबे में सफल हो जाई. आ जब सत्ता आ जनता का बीच सीधा संवाद बन जाव त बीचवनियन के धंधा चउपट होखहीं के रहल. पिछला सरकारन में राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री का साथे विदेशी दौरा प मौज मस्ती करे वाला एह पत्रकारन के अब अपना भा अपना कंपनी का खरचा प विदेश जाए के पड़त बा. दलाली आ ब्लैकमेलिंग से आपन खेवा खरचा निकाले वाला एह पत्रकारन का चलते पूरा पत्रकार जमात के छवि खराब हो गइल रहल. एह कींचकाँच में कायदा के पत्रकारिता करेवालन के कवनो पूछ ना रहि गइल रहल. ई लोग त अतनो कहे लायक ना रहल कि –
संगही खेलनी, संगही पढ़नी संगही कइनी छलछंदर.
हम चोन्हर साठो ना पवनी, तू पवलऽ पचहत्तर.
का भईया, तोहरा चाहीं आ हमरा ना चाहीं ?
कवनो राजपरिवार में जनमले बिना राजगद्दी पा जाए वाला मोदी अगर राजपरिवारन के आ ओकरा दलालन के हिकारत के नजर से देखत बाड़न, त शिकायत करे के मुँह केकर बा ? बाकिर मोदी में सबले बडका खासियत बा कि अपना राजनीतिक विरोधियन के फेरू से पनपे नइखन देत. एह लोग के सबले बड़हन समस्या बा कि मोदी वाड्रा, नेशनल हेराल्ड, आगस्ता वेस्टलैंड, चारा घोटाला, आमदनी से बेसी के हैसियत वगैरह सगरी मामिला के लटका के छोड़ दिहले बाड़न. ओह दिसाईं कुछ करीतन त एह लोग के मौका मिलित रोए आ जनता के सहानुभूति बिटोरे के. बाकि अबहीं उहो नइखे मिल पावत. हिन्दुत्व के सबले प्रखर प्रतीक योगी आदित्यनाथ के यूपी के सीएम बना के अइसन दाँव चलि दीहलन कि कुछ कहते नइखे बनत. हिन्दू उभार के ताकत देखि कुछ बोलहूं के हिम्मत नइखे होत. सबले साँसत में ओह लोग के जान पड़ गइल बा जे हिन्दूवन के अपना राज्य में दोयम दर्जा के नागरिक बना दिहले बा. जेकरा राज्य में हिन्दू सरस्वती पूजा ना कर सकसु, दुर्गा पूजा, मूर्ति विसर्जन वगैरह के त बातो छोड़ दीं, जहाँ अपना परिजन के दाहसंस्कारो कइला प रोक लगा दीहल बा. कब्रिस्तान आ शमशान के एगो छोट इशारा एह राजनीति प जवन कयामत ढा दिहलसि ओकरा के देखत अब ई लोग अपनहूं केसरिया चोला धरे लागल बा. बूचड़खाना का खिलाफ कार्रवाई होखे लागल त पता चलल कि सौ में निनान्बे गो लगे कवनो लाइसेन्से परमिट ना रहल. आजु एह राजनीति के ठकुआ मरले बा त चौकन्ना रहला के जरुरत बा. सभे लागल होखीहें कवनो षडयंत्र रचे में. पिछला बेर लिखले रहीं कि एते प सुल्तान है, मत चूको चौहान. आ अब कहत बानी कि चौकन्ना रहला के जरुरत बा. जवन आ जइसन एका बनल बा ओकरा के केहु तूड़ ना पावे अइसनका सीमेट लगा के रखे के बा.

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