जम्हूरिजत के जमूरा – बतंगड़-87


जमूरा, जो पूछेगा बताएगा ? हाँ मालिक. जो बताएगा सो करेगा ? हाँ मालिक.
अब पिछला हफ्ता देश में अइसन जमूरन के जगहे-जगह देखल गइल. हर जगहा जमूरा अपना मालिक के हुकुम पर काम करत लउकल. आ लउकीत कइसे ना, ना लउकीत त जमूरा कइसे कहाईत ?
बहुत पहिले से इहो सुनत आइल बानी जा कि ऊँट के चोरी निहुरले-निहुरले कइला से कवनो फायदा ना होखे काहें कि ऊँटवा त लउकिए जाई. बाकिर पिछला हफ्ता इहो देखनी कि खुलेआम बिना निहुरले ऊँट चोरावल गइल आ केहू ओकरा के देखे के जहमत ना उठवलसि. देश के अदालत, मीडिया, अवार्ड वापसी गैंग सभे जमूरा का तरह रहि गइल. मालिक कहलसि ना त जमूरा देखलसि ना. देश के दू गो राज्यन के चुनाव देखा दिहलसि कि एह देश में जमूरन का आगे केहू के ना चलि पावे. जम्हूरियत के जिहादी देवी के जमूरा बिना कवनो पक्षपात कइले अपना काम में लागल रहलें. दोसरा गोल के वोटरन के त बाते छोड़ दीं अपनो गोल के वोटरन के हैसियत के ऊ घास-फूस से अधिका के भाव ना लगवलें. वोट हमरे के नू देबऽ, त ल तोहरा अंगुरी पर सियाही लगा देत बानी, बिरयानी के पैकेट लऽ आ चुपचाप घरे चलि जा. तोहार वोट डाल दीहल जाई. आ जे कहीं केहू विरोधी गोल वाला निकलल त ओकरा से सोझ सवाल – वोटवा तोर कि मोर ? आ अगर जे कहि दिहलसि कि – मोर त शुरु हो गइल कपरवा फोड़. जम्हूरियत के ई जमूरा अपना एह काम में केहू के परवाह ना कइलें. बूथ पर काम कम रहि गइल त काउंटिगो टेबुल पर वोट छपाई के काम बेखौफ क देखवलें सँ आ जिहादी देवी के पुलिस चुपचाप देखत रहि गइल. ताकत रह जाए के बाति एह से ना कहनी कि ओकनी का लगे कवनो ताकते ना रहुवे त तकते सँ का ? सगरी देश के धेयान दखिन का तरफ रहल आ पूरब टोला में गाँव के गाँव लूटा गइल आ केहू के खबर तक ना हो सकल.
ई त भइल पूरब टोला में. दखिन टोल में त अस नौटंकी चलल कि मेरठ के नौचंदी मेला में हिन्दुवन के सांस्कृतिक कार्यक्रमन पर रमजान का नाम पर लगावल बसपाई मेयर के आदेश के अनदेखी करत टीवी पर अइसन मनरंजन भइल कि आईपीएलो फेल हो गइल ओकरा सोझा. बड़का गोल का खिलाफ दू गो छोटका गोल हाथ मिला लिहलें आ भरपूर कोशिश कइलें कि बड़का गोल सिंहासन पर मत बइठ पावे. काहे कि तब भठियरपन के देवी के आखिरी टोल प्लाजा बन्द हो जाई आ उनुकर खेवा-खरचा चलावल मुश्किल हो जाई. अइसन-अइसन कुतर्क रचाइल आ सभे देखल कि कइसे एह देवी का इशारा पर इनकर जमूरा अदालतो के नाच नचा दिहले सँ. इशारा त पहिलहीं दे दीहल गइल रहुवे कि हमरा कहला पर ना नचबऽ लोग त महाभियोग के सामना करे के पड़ी. आ तब अदालतो मान लिहलसि कि आजु ले एह देश में कबो कवनो बड़का गोल के सरकार बनावे ला ना बोलावल गइल रहुवे, केहू के आपन विश्वास मत जीते ला समय ना दिआइल रहुवे, राज्यपालन के अपना विवेक के इस्तेमाल करे के अधिकार ना रहुवे, हर बेर कांग्रेस अपना से छोटका गोल के दीहल समर्थन बीचे में ना हटवले रहुवे आ हमेशा स्थायी सरकार दिहले रहुवे. थोक भाव में गदहन के झुंड खरीदला से जम्हूरियत पर खतरा ना आवे. खतरा फुटकर में घोड़ा खरीदला पर होखेला. गोल के मुखिया अपना कुरसी ला कुछऊ करि लेव ओकरा विधायकन के अपना कुरसी ला बदले के छूट ना दीहल जा सके.
नइखीं जानत कि दखिन टोला में चलत नौटंकी के अंत कइसन होखे वाला बा काहे कि हमरो ऊपर एगो अदालत बा जेकरा बतावल समय ले काम पूरा कर लेबे के बा ना त बिना बतंगड़े के अखबार छपि जाई. शायद रउरो नीक ना लागी.

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