जोगीरा सारा रा रा – बतंगड़ 75


– ओ. पी. सिंह

चार दिन बाद फगुआ मनावल जाई. कुछ बदलल संस्कार, कुछ सेकूलरी, कुछ पर्याबरनियन के चीत्कार. सभ मिला के माहौल अइसन बनि गइल बा कि अबहीं ले कहीं रंगाइल पोताइल चेहरा नइखे लउकत. बरातियो लोग झमकावत चलत बा निफिकर हो के कि केहू रंग अबीर डाले वाला नइखे. आखिर हिन्दू परब ह फगुआ आ हिंदुवन के परब-तेवहार एही तरह गँवे-गँवे खतम हो जाई आ होखत-होखत हिन्दुस्तानो से हिन्दु ओही तरह बिला जइहें जइसे अगल-बगल के देशन से बिलात गइलें आ बिलात जात बाड़ें. अब कहब कि फगुआ के नाम ले के हम ई कवन कांदो-पाँको करे लगनी. का करीं, अबहीं ले देह में फगुनहट बयार छुआइल ना. पर्यावरण सचहूं खराब हो चलल बा.
फगुआ का मौका पर जोगीरा गावे के परंपरा रहल बा. तरह तरह के कमेंटबाजी एही बहाने क लीहल जाला. एगो जोगीरा याद आवत बा – कव हाथ के धोती पेन्हा, कव हाथ लपेटा ? कव पान के बीड़ा खाया, कव बाप के बेटा ? जोगीरा सारा रा रा.
एह जोगीरा के जवाब आखिर में देब. ओकरा पहिले कुछ हमहूं जानल चाहब. रउरा सभे के जवाब मालtम होखे त बताएब जरूर, अतना उमीद त हम करिए सकीलें रउरा सभन से. चलीं पहिला सवाल करत बानी – ऊ कवन आदमी ह जे गुजरात में जनेऊधारी बरहमन बनि जाला, कर्नाटक में जालीदार टोपी पहिर के सिजदा करे लागेला आ मेघालय में अपना के आर्थाडॉक्स ईसाई बतावे लागेला ? ओकर असल नामे ना, अगर मालूम होखे त ओकर जातो धरम बता देब.
दोसर सवाल – कवना राज में नमाज पढ़ाए वालन के सरकारी तनखाह मिलेला आ मदरसन के हर तरह के इमदाद. मुसलमानी त्योहारन पर हर तरह के छूट आ सुविधा बाकिर हिन्दू त्योहारन पर तरह-तरह के रोक आ हिन्दू स्कूलन पर पाबन्दी ? ऊ के ह जेकरा के पूजा करत कहियो ना देखब बाकिर सिजदा में हाथ उठवले ओकर फोटू हमेशा देखे के मिल जाला ? जेकरा बुलु रंग पसन्द ह बाकिर भगवा रंग से भड़केला ? जेकरा विवेकानन्द से चिढ़ ह आ नजरूल ला नजर बिछा देला ?
तिसरका सवाल – ऊ कवन हड़बड़ी रहुवे कि अपना सरकार के जात देखत ओह घरी के वित्त मंत्री आनन फानन में एगो कानून बना के चोर कारोबारियन के फायदा चहुँपा गइल ? रिजर्व बैंक के ओह गवरनर के का कहब जे एह विधान के फटाफट मंजूरी दे दिहलसि आ नयकी सरकार के एकरा बारे में कवनो जानकारी ना दिहलसि ?
चउथा सवाल ई कि ऊ कवन गोल ह जवन भोट ला हिन्दूवादी रहेले आ जीतला का बाद सभकर साथ ले के चले के बाति करे लागेले ?
पाँचवा सवाल – आखिर का बाति बा कि कांग्रेस का राज में कवनो करिखाह कारोबारी देश छोड़ के ना भागल बाकिर सरकार बदलते भागे लगले सँ ? अगर भाजपा से ओहनी के मिलिभगत बा त भगले काहें, आ कांग्रेस ओहनी के दुश्मन रहल त मौज कइसे मनावत रहलें ओह सरकार में ?
आखिरी सवाल – इन्दिरा गाँधी बैंकन प सरकारी कब्जा का एही ला कइले रहुवी कि नागरवाला कांड करे में आसानी रहो, अपना लगुअन-भगुअन के अरबों-खरबों के करजा दीहल जा सके आ ओह करजा के लवटावे के जरुरत ना पड़े ? एही से जुड़ल सवाल इहो बा कि आखिर ऊ कवन धंधा भा कारोबार रहल इन्दिरा, राजीव, सोनिया के जे आजु ई परिवार दुनिया के माथ धनाढ्यन में गिनल जाला ?
चलत-चलत शुरू वाला जोगीरा के जवाब ले लीं – सात हाथ का धोती पेन्हा, पाँच हाथ लपेटा. चार बान का बीड़ा खाया, एक बाप के बेटा. बाकी सवालन के जवाब रउरा सभे के खोजे के बा

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