टाइम टाइम के बाति ह, अब टाइमिंगो गलत होखे लागल बा : बतंगड़ – 83


– ओ. पी. सिंह
पिछला हप्ता आपन बतंगड़ अधवे पर छोड़ले रहीं कि अगिला बेर एकरा के पूरा करब. बाकिर आजु के दुनिया में एक हप्ता बहुते लमहर हो जाला. चुनाव बीतते गुजरात के दलित समस्या, हरियाणा के जाट आरक्षण समस्या, पंजाब के नशाखोरी समस्या वइसहीं गायब हो जाला जइसे कबो गदहा का मूड़ी पर से सींग गायब हो गइल. अबकी कर्नाटक के चुनाव ला प्लान एनेलिटिका रहल कि हिन्दू के हिन्दुत्वे से नफरत करा दीहल जाव. ना रही बाँस ना बाजी बाँसुरी. तीन चार महीना पहिले का वारदात एह टाइमिंग पर हिन्दुवन के बलात्कारी बतावे के, ओकरा मंदिरन के बदनाम करे ला हथियार बना लीहल गइल. देखते देखत पोसुओ कुकुर अपना अपना दुआरी फेंकरल शुरु कर दिहले सँ आ एह कुकुरहट में कुछ हिन्दुओ लोग भूंकल शुरु कर दीहल. कउवा कान ले गइल का हल्ला में आपन कान ना टोअलें लगलें उहो लोग चिचियाए कि ई सब बहुते गलत होखत बा. बाकिर अबकी के टाइमिंग धोखा दे दिहलसि. साबित हो गइल कि रेप त भइबे ना कइल ओह बच्ची का साथे. हँ मर्डर जरुर भइल आ बहुते निर्दई तरीका से. मर्डर करहूं वाला लड़िकिया के कवनो करीबिए रहल होखी काहें कि ओकर जवन फोटो वायरल भइलीं सँ तवना में एगो फोटो में ओकर खुश चेहरा रहुवे आ दोसरका में ओकर लाश. दुनु के फ्राक एकही रहल. तय मानीं कि जे ई दुनु फोटो खींचल से पूरा तरह वाकिया से वाकिफ रहल होई. ओकरा मालूम रहल होई कि एकर का इस्तेमाल होखे वाला बा. बाकिर हाय रे किस्मत, टइमिंगवे खराब हो गइल अबकी.
कुछ दिन बाद अदालत के फैसला आ गइल कि ट्रेन में भइल जुनैब के मर्डर बीफ का मुद्दा पर ना होके महज सीट ले के भइल झगड़ा रहुवे. फेरु खबर आ गइल कि फगुआ प फेंकल गुब्बारा में सीमेन ना मिलल. तब एगो पत्रकारनी एकरा के बाकायदा सीमेन भरल आ ओहूमें कवनो हिन्दू के सीमेन होखे के दावा करत हिन्दुत्व का खिलाफ मोर्चा खोल लिहले रही. सोचे के बातो ना सोचली कि आखिर कइसे मालूम कि ई हिन्दू सीमेन रहल. शायद विज्ञाने ले बढ़के उनुकर निजी जानकारी रहल होखी आ तरह तरह के सीमेन के रंग गंध स्वाद से परिचित होखींहे. उनुका विशेषज्ञता के चुनौती हम त नाहिंए दे सकी. बाकिर टइमिंगवा बहुते खराब हो गइल रहे. बुझात बा कि देश के विरोधी गोलन के दिन सचहूँ अच्छा नइखे आवे वाला. सुप्रीम कोर्ट अपना फैसला में कह दिहलसि कि सीबीआई अदालत के जज रहल लोया के मौत प्राक़तिक मौत रहुवे आ ओहमें कवनो साजिश के कवनो संकेत नइखे.
ऊँट के पीठ एह आखिरी तिनका के भार ना सहि सकल आ ओकर पीठ टूट गइल. एही झँझुअवट में ई लोग सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस का खिलाफ महाभियोग ले के आ गइल. जानत बा लोग कि ओह लोग के बेंवत नइखे रहि गइल अइसनका कवनो प्रस्ताव पास करा लीहला के. एकरा बावजूद देश के न्यायपालिका के बदनाम करे के चाल चलले बा लोग. आ एहमें शामिल सात गो गोल में दौलत के बेटी के उहो गोल शामिल हो गइल जवना का लगे ना त राज्यसभा में एगो सांसद बा ना लोकसभा में.
बाकिर जब समय खराब होखेला त हर दाँव उलुटा पड़े लागेला. नोटिस करे वाला खोज निकललें कि एह महाभियोग पर मनमोहन सिंह के दस्तखत नइखे. सवाल उठल त कांग्रेसी गोल के सफाई आ गइल कि उनुका अतना बेंवत नइखे कि अपना मनमर्जी के कर सकसु. जब गद्दी प रहलन तब त कइबे ना कइलन, अब का करीहें. ई त कांग्रेसे उनुका के बकसि दिहलसि आ कहलसि कि तोहरा साइन के जरुरत नइखे. सोचले रहल लोग कि कांग्रेस के एह मुद्दा पर एकजुट देखावल जरूरी बा. तबले कांग्रेसे के अनेके नेता आ वकील एह प्रस्ताव का खिलाफ आपन बाति कहे लागल बाड़ें. कांग्रेस के इहो दाँव बेकार होखे वाला बा. वइसे कांग्रेस के कहना बा कि जेह लोग का खिलाफ अदालत में मुकदमा बा से एह प्रस्ताव के साथ कइसे दे सकेलें. अरे बुड़बक, मुकदमा त तोरा पुरनका मलकिनिआ आ नयका मालिको का खिलाफ बा. तोर बहनौईओ एही में शामिल बा त कव गो कांग्रेसी बिना मुकदमा वाला मिलिहें.
शायद एही से सुनत आइल बानी जा कि – जा के प्रभु दारुन दुख देहीं, तेकर मति पहिले हर लेहीं.
कांग्रेस के मति सचहूं हेरा गइल बा.

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