– ओ. पी. सिंह

आजु एगो गीत बरबस याद आ गइल – तोहरा से राजी ना ए बलमुआ, तोहरा से राजी ना. हमके नीम्बुआ बिना तरसवले बलमुआ तोहरा से राजी ना. एह प्रेमगीत में नायिका के ओरहनो बा आ प्रेम निवेदनो बा. बाकिर जालिम बलमुआ समुझे तब नू बाति बने. पहिले सुनत रहनी कि अगर कवनो लालसा, वासना, कामना पूरा भइला बिना आदमी के मौत हो जाय त ओकरा प्रेत बने के अनेसा बनि जाला. साथही इहो सुने में आवेला कि कलियुग में आपन सगरी सरग-नरक एहिजे भुगत लेबे पड़ेला.

एह घरी एह तीनो बाति के नमूना साक्षात देखे के मिल रहल बा. मोदी का दुकान में बहुते लोग मनसा रखले रहुवे कि कवनो ना कवनो काउन्टर सम्हारे ला मिल जाई आ ओहु लोग के रोजी रोजगार बनल रही. बाकिर मोदी एह लोग के लालसा पूरा ना होखे दिहलन आ तबे से एह लोग के रहि-रहि के प्रेत बाधा घेर लेत बा. एह पीड़ित लोगन में शूरबीर से ले के बयानवीर लोग के देखल जा सकेला. खास क के बिहारी सिन्हा आ झारखण्डी सिन्हा के पीड़ा देखे लायक होला, सिन्हा लोग के बात आइल त याद पड़ गइली तारकेश्वरी सिन्हा. अपना राजनीतिक जीवन के आखिरी दौर में ऊ राजनीति के बैरोमीटर बन गइल रही. उनुकर खासियत हो गइल रहल कि एन चुनाव का मौका प पलटी मार जासु आ जीते वाला गोल छोड़ि के हारे वाला गोल में शामिल हो जासु. बाकिर तबहियों उनुका के अपना गोय में शामिल करा लेत रहलें कवनो ना कवनो गोल.

झारखण्डी सिन्हा के त चुनावो लड़े जोग ना मनले रहल भाजपा तबहियों उनुका भरपूर उमीद रहल कि कवनो ना कवनो मिनिस्टरी मिलिए जाई. बाकिर उनुकर पीड़ा तब अउर बढ़ु गइल जब पता ना कवना कारण चुनाव हारत जेटली के त मौका मिल गइल बाकिर झारखण्डी सिन्हा के ना. रहि-रहि के उनुका बयानन में एह पीड़ा के आह सुनातो रहेला. आ एह लोग के पीड़ा का साथे आपनो कराह मिलावत विपक्षियन के आवाज से गजबे कोलाहल मच जाला. मौका कुमौका अपना खामोशी के तूड़त बिहारीओ सिन्हा आपन बयान फेंकत रहेलें. काहें कि खबर में बनल रहला ला ई जरुरी होला. एह बेचारा के पूरा आस रहल कि भाजपा इनका के आपन एनटीआर भा एमजीआर बना ली आ बिहार के चीफ मिनिस्टरी इनका गोड़ प चढ़ा दी. बाकिर इनका मालूम नइखे कि इनका नाम में आर शामिल नइखे एहसे एनटीआर भा एमजीआर के सपना इनका तबले ना देखे के चाहीं जबले कवनो जोतिषी से सलाह लेके ई आपन नाम नइखन बदलि लेत. आ अब त समयो बीत गइल बा इनका ला. से अब का ओढ़ावेलऽ चदरिया हो चलन का बेरा. चुपचाप नामजप कइल करसु त शायद टिकट भलही मत भेंटाव हो सकेला कि कवनो ठेहा मिल जाव नामजप करत रहे ला.

जीयते प्रेत योनी मैं घूमत बँड़रात लोगन में एगो अधबूढ़ जवानो शामिल हो गइल बा. जे पुरनका बूढ़ के पद सम्हार लिहले बा. ई पद ह पीएम इन वेटिंग के. ओकरा लालसा पुरावे ला गाय के माँसभोज देबे वाला उनुकर गोल उनुका के मंदिरे मंदिरे घुमावत बा एह घरी. आ उनुका के देखि के गुरुजी के कहल बाति याद आ जात बा कि जहिया हिन्दू एकवट जइहें तहिया जालीदार टोपी पहिर के आ चरखाना के गमछा कान्ह प डाल के इफ्तार करे वाला नाम से हिन्दू बाकिर सुभाव आ रहन से अहिन्दू नेतवो कुरता का उपर से जनेऊ पेन्हल शुरु क दीहें. से एह अधबूढ़ के मंदिरन के परिक्रमा करत देखि के ओतना अचरज नइखे होत जतना ओह मंदिरन के पंडितन के देखि के होत बा जे एगो गैर हिन्दू के बिना संस्कार करवले ओकरा से पूजा करावत बाड़ें. नमाजी का स्टाइल में हवन प बइठे वाला एह अधबूढ़ के रिलीजन का ह से त पता चलो पहिले. अलगा बाति बा कि इनकर असल नाम का ह सेहु आजु ले पता नइखे लाग पावल.

(अतवार 8 अक्टूबर 2017 का दिने कोलकाता से छपे वाला अखबार समाज्ञा में अँजोर भइल.)

Advertisements