– ओ. पी. सिंह


लइकाईं के गावल सुनल दू गो लाइन याद आवत बा – नानी किहाँ जाएब, पुअवा पकाएब। नानी कही बतिया रे, आइल हमार नतिया रे. ममहर जाए के तब अलगे आनन्द रहल रहुए. बाकिर लइकाईं छूटल त गँवे गँवे ममहरो छूट गइल. लेकिन कांग्रेस के युवराज किस्मत वाला हउवन जे अधबूढ़ होखल जात उमिरो में युवराज कहात बाड़ें आ जब जब देश में गरमाहट बुझाला चलि देलें नानी किहाँ. अब पता ना नानी किहाँ कवन पुआ पकावत बाड़न कि एक महीना बादो उनुकर छुट्टी पूरा होखे के नाम नइखे लेत. वइसे कहे वाला इहो कहत रहेलें कि ई नतिया हर बेर एगो बखेड़ा खड़ा क के भादृग पराला. त कुछ लोग एहमें कवनो खड़यन्त्र खोजत कहेला कि जब जब ई बाहर जालें ओह घरी देश में चलत बवालन के फंडिंग आ आदेश लेबे खातिर इनका बाहर जाए के पड़ेला. पहिले ई काम महतारी का जिम्मे रहत रहुवे बाकिर तबियत खराब रहला का चलते अब बबुआ के ई जिम्मेदारी उठावे के पड़त बा. आ शायद एही चलते मोदी विरोध के हर मुहिम मार खा जात बा काहे कि जिम्मेदारी का बारे में एह नबाब के नाती से कवनो उमेद ना राखत जा सके. पिन्डी वाला पाशा जरुरे परेशान होखी कि केकरा जिम्मे आपन काम डाले.

एही बीच राष्ट्रपति के चुनाव सामने आ गइल बा. कहे खातिर सतरह गो गोल मिल के मीरा कुमार के खड़ा करवले बाड़ें. पता लगाईं त पता चली कि दल गो के लोकसभा में कवनो सांसद नइखे त छह गो के राज्यसभा में. कुछ गोल चाहत रहलें कि कवनो गैर कांग्रेसी के नाम दीहल जाव. सभे जानत बा कि विपक्षी के हार तय बा अबकी बारी. एकरा बावजूद कांग्रेसी महारानी के मंजूर ना भइल कि दोसरा गोल के केहू के उमीदवार चुनल जाव. जे अपना बेटी प भरोसा ना कर सके. जे अपना बेटा के कांग्रेस अध्यक्ष नइखे बने देत ओकरा से एह बात के उमेदे कइल गैरवाजिब कहल जाई. आन्हर धृतराष्ट्र के मेहरारु गाँधारी अपना आँख प पट्टी बान्ह के सत्ता के खेल खेलत गइली बाकिर सुयोधन के गद्दीनशीन ना होखे दिहली. एह फ्रस्ट्रेशन में सुयोधन कब दुर्योधन बन गइल ई शायद ओकरो थाह ना लागल होखी.

राजनीति के मँजल खिलाड़ी नीतीश शायद एह बाति के बढ़िया से समझ गइल बाड़न. एही चलले भाजपा का तरफ से राष्ट्रपति उमीदवार रामनाथ कोविन्द के आपन समर्थन दे दिहलन. ना त कांग्रेस से पूछलन ना लालू से. पीएम बने के साध त मने में रही गइल बाकिर अइसन मत होखे कि सीएमो बनल रहे के मौका गँवा देबे के पड़े. उऩुका मालूम बा कि अबहीं जनता मोदी का साथे बिया एह सचाई का बावजूद कांग्रेस उनुका के देशव्यापी गठबन्हन के नेता ना बने दी 2019 में. त काहे ना आपन गोटी लाल बनवले राखत अपना सहज साथी के साथ फेरु ध लीहल जाव. कम से कम बिहार के कुरसी त बनल रही.

राजनीति का खेल में आपन मात भाँपत लालू बेचैन हो उठल बाड़ें. चपरासी के जिनिगी से शुरुआत करत आजु खरबो के मालिक बनला का बावजूद भविष्य अन्हार लउके लागल बा. शायद सोचले रहुवन कि राजनीति के अमर्ता पैक्ट उनुकर चेहरा दागदार ना होखे दी. बाकिर मोदी सरकार में उनुकर घोटालन के गाँठ खोलल शुरु हो गइल बा त देर सबेर पूरा परिवार प फाँस लागल तय बुझाए लागल बा.

आ आखिर में भीड़ के फैसला प बतिया लीहल जरुरी लागत बा. दिल्ली में एगो भीड़ डॉ नारंग के जान ले लिहलसि, वइसने एगो भीड़ श्रीनगर में पुलिस आफिसर अयूब पंडित के पीट पीट के जान ले लीहल गइल. जब कवनो सवाल ना उठवलसि सेकूलर गिरोह. केरल आ बंगाल में हिन्दूवन के सरेआम होखत खून प चुप्पी साध राखे वाला लोग देश में जहें-तहें विरोध प्रदर्शन क के भीड़ के फैसला का खिलाफ जनमत जगावल चहलें बाकिर कवनो सुगबुगाहट पैदा ना करा सकल लोग. काहे कि जनता अब जान गइल बिया एह गिरोह के असल चेहरा. उमीद कइल जाव कि नानी किहाँ गइल नतिया तनी जल्दी लवटि आवे काहे कि देश में बहुले लोग उनुका के भाजपा के स्टार प्रचारक मानेला.

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