नानी का अँचरा में लुका गइल बबुआ – बतंगड़ 76


– ओ. पी. सिंह

लईकाईं में सुनल एगो कविता दोहरावल आजु प्रासंगिक लागऽता – नानी कीहाँ जाएब, पुअवा पकाएब, नानी कही बतिया रे, आइल हमार नतिया रे. फगुआ से ठीक पहिले अपना नानी के दुलरुआ बबुआ अपना ननिअउरा चलि गइल बा. आ आजु फगुआ का अगिला दिने देश के तीन गो राज्यन में पड़ल भोट गिना रहल बा. गिनिती देखत सुनत इहे लागत बा कि उनुका एकरे डर रहुवे कि लोग ई मत कहे लागे कि भल मुअनी, भल पिलुआ पड़ल. अध्यक्ष कुरसी सम्हारते मूड़ी पर बनौरी गिरे लागल. हम त इहे कहब कि ना बबुआ, घबरइला के कवनो बाति नइखे. तोहरा गोल में अइसन केहु नइखे जे कवनो सवाल उठा सके. सवाल उठावे के बेंवल राखे वाला कवनो नेता अब तोहरा गोल में बाचले नइखे. जे रहल ऊ सभे गँवे गँवे निकल चुकल बा भा निकालल जा चुकल बा. हँ मणिशंकर जइसन कुछ लोग निकाल दिहला का बादो गोल में मौजूद बा. इहो गौर करे जोग बा कि ठहाका मारे वाली के नाक काटे के इन्तजाम हो रहल बा, काहेकि अबकी उनुकर ठहाका तोहरे सोझा आ तोहरे प लाग गइल रहल आ एकरा के बरदाश्त करे जोग मा मान सकऽ तू. .
बाकिर ओह लोग के का कहल जाव जे कहत बा कि बबुअवा भोट गिनाए का चलते नइखऽ गइल, ऊ त अतवार का दिने पड़े वाला भोटिंग में शामिल होखे गइल बाड़न. उनुका ममहर के कानून ह कि हर ओह आदमी भा औरत के ओहिजा के नागरिकता दे दीहल जाला जेकर जनम ओकरा सीमा का भीतर होला. आ हर नागरिक के कर्तव्य होखे के चाहीं कि भोटिंग में शामिल होखे. से बबुअवा आपन भोट डाले गइल बा अपना ननिअउरा.
आ एहू ले गंभीर बाति त ई कहाता कि जमानत पर चले वाला आदमी के सरकार विदेश जाए काहे दिहलसि. अगर विजय माल्या, ललित मोदी, मेहुल चौकसी, आ नीरव मोदी का तरह बबुअवो भारत लवटे से इन्कार कर देव त एकर दोष केकरा के दीहल जाई. कहीं अइसन त नइखे कि जानत बूझत सरकार ई जोखिम लिहले बिया. हाथी के परेशान करे ला एगो चिउँटिओ बड़ हो जाले आ अपना प्रतिद्वन्दी के कमजोर ना समुझे के चाहीं. अगर बबुअवा अपना ननिअउरे में रूक जाव त सरकारी गोल के सुविधा हो जाई अगिला चुनाव के मैदान मारे में.
बाति जवने होखे. देर सबेर त ममहर से लवटहीं के पड़ी. एहिजा दादी-परदादा के जोगावल अथाह संपतिओ पड़ल बा ओकरो के जोगावल जरुरी बा. अपना ननिअउरा वाला नागरिकता से डेरइला का जरुरत नइखे. ऊ दिन नइखे आवे वाला जब ओह चलते एहिजा के राज कुरसी पर बइठे जोग ना मानल जाई बबुअवा के. काहे कि ना त नव मन तेल होखी ना भउजी के नाचे पड़ी. अइसन बहुमते नइखे मिले वाला कि ओकर दिन आवे. तब ले बबुआ मजा करे आ मजा से रहे. बाजपेयी बन के रहला से नीमन होखी कि घर बसा के रहे. का जाने ओकरे भाग से बबुअवो के किस्मत चमकि जाव.
तले सुनत बानि कि अपना गोल के गुलाम आ अहमद के शिलांग जाए के आदेश भेजले बाड़न बबुआ. उनुका डर बा कि कहीं गोवा वाला हाल मत हो जाव मेघालय के. दूध से जरल अगर मट्ठो फूंक फूंक के पियो त सहिए कहाई.

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