– ओ. पी. सिंह


समाज के अनुभव इहे बा कि नीमन काम करे वाला के आए दिन मुसीबत झेले के पड़ेला. ओकरा से सभकर उमीद अतना बढ़ि जाला कि ओकर छोटहनो कमी बहुते बड़ लागे लागेला. तीस बरीस बाद अपना दल के संसद में अकेले बहुमत दिआवे वाली भाजपा से उमीद होखे लागेला कि ऊ हर चुनाव जीत के देखावे. दिल्ली आ बिहार के हार ओकरा बेंवत प सवाल उठा देला आ सभले अधिका सवाल ऊ उठावेला जे खुदे हारे के रिकार्ड बनवले रहेला.
कई बेर जीत जीते वाला के दिमाग खराब क देला आ ओकरा लागे लागेला कि बस अब देश हमरे के तिकवत बा. कूद के बनारस, पंजाब, गोवा, गुजरात करे लागेला. आ जब अपने गली में पिछाड़ प भारी भरकम लात पड़ि जाला त भकुआए लागेला. सोचे लागेला कि कहवाँ कवन गलती हो गइल.
मजे के बाति बा कि एह तरह के तनाव बुढ़िया पार्टी के बबुआ युवराज के कबो ना होखे काहे कि ऊ जान गइल बाड़न कि – ना नीमन काम करे ना दरबारे ध के जाय. अब ई अलग बाति बा कि दरबारे धरा के जाए के अनेसा उनुका इचिको नइखे काहे कि ऊ त खुदे दरबार हउवन आ हर हार का बादो उनुकर जयकारा लागते रहेला. बाकिर उनुकर माई उनुका के सिखा के रखले बाड़ी कि पॉवर इज प्वायजन. से ऊ हमेशा सचेत रहेलन कि गलतिओ से पावर उनुका गरदन से लपटा मत जाव. अंगरेजी में एकरा ला एगो खास शब्द होला – क्रिएटिव इनकम्पीटेन्स. बहुत सोच समुझि के अपना के नाकारा बनवले राखे के गुण बहुते कम लोग का लगे रहेला. आ युवराज का लगे ई थोक में बा. एह बारे में उनकर जोड़ खोजल मुश्किल बा.
क्रिएटिव इनकम्पिटेन्स के विलोम होला स्यूडो कन्फिडेन्स. केजरीवाल एकरे शिकार बन गइलन. उनुका ईमानदारी के नमूना त उनकर नौकरी के इतिहास बता देला. ना त सतरह बरीस का नौकरी में एको बेर दिल्ली से बाहर ना भइल सभका बेंवत में ना होखे. एकरा बावजूद अपना के ईमानदार जतावत बहुते प्लानिंग रचि के ऊ राजनीति का मैदान में उतरल रहलें. रीडर्स डायजेस्ट में जीवनी छपले से ले के अन्ना जइसन सोझबक आदमी के भरपूर इस्तेमाल कइला ले सभ कुछ बेकार हो गइल काहे कि लोग उनुका के ओतना नीमन समुझ बइठल जतना ऊ रहलन ना. गुण रहतो अपना गुण के लुका के रखला में आ बिना गुण अपना के गुणगर बतवला में फरक त होखबे करेला. खराब कपड़ा के बनल चादर एके धोआई में गमछी बरोबर हो जाला. आ उहे भइबो कइल.
बाकि छप्पन इंची सीना वाला के नापे ला लोग हमेशा तइयार रहेला. ओकरा से उमेद रहेला कि ऊ हर समस्या के तोड़ निकाल ली. पाकिस्तान का तरफ से ढेला आइल ना कि ऊ एने से बमगोला फेंक मारी. पीएम ना भइल मोहल्ला के दादा हो गइल. ना बिरादरी के चिन्ता ना राजनय के. ओकरा अइसन वीर बाँकुड़ा होखे के चाहीं कि नीचे से केहू गरियावे त ऊ सीढ़ी से ना उतरि के सीधे छते से छलांग मार देव. बाकि पता ना काहे हमरा हमेशा लागेला कि जवन कुछ होखत बा सभ ओकरा योजना का कामे आवे वाला बा. कश्मीरी अलगाववादियन के, सुकमा के माओवादियन के, पाकिस्तानी सेना के खिलाफ आजु कत्लेआम मच जाव तबो कतहीं केहू बोले वाला ना लउकी. असहिष्णुता का नाम प आपन इज्जति नीलाम करे वालन का लगे अब कवनो सम्मान बाचले नइखे. जेएनयू के अब ऊ पुरनका भाव नइखे रहि गइल. आ हँ फिल्म इंस्टीच्यूट के हड़तलवा के का भइल ? बा केहू का धेयान में ? करन थापर अब कवना चैनल प बाड़ें ? बरखा रानी केने बरसत बाड़ी ? एगो भोजपुरी बोल ह – अइसन मार मारब कि तोहरा त नीमन लागी आ हमरा आँख का आगे अन्हार हो जाई ? जा बढ़ा के, मलमलिया मोड़ बचा के !

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