– ओ. पी. सिंह

कहे के त नेता लोग देश समाज के सेवा में लागल रहेला बाकिर असलियत में ऊ लोग एह सेवा का नाम पर मेवा खाए में डूबल रहेला. देश के सीमा प चीन आपन नजर गड़वले बा बाकिर कांग्रेस के लोग ओकरा साथे साँठ गाँठत लउकत बा. राहुल अपना कुछ चमचन का साथे चीन के राजदूत से भेंट करे गइलन आ ओकरा बाद अमरनाथ यात्रियन प हमला हो गइल. सुने में त इहे आइल कि चीन पाकिस्तान के सह देत बा आ एकरे बारे में प्लानिंग समुझावे खातिर ई मुलाकात भइल रहल. के केकरा के आ का सुमुझावल ई त उहे लोग बता सकेला. कुछ दिन बाद मैंगो रिपब्लिक के प्राइवेट परसन के साथे लेके प्रियंको चीनी दूतावास में पँहुच गइली. पूछला प कहली कि चाइनीज खाए के मन रहल से एहिजा चलि अइली. कहे के मतलब कि देश के दुश्मन चीन एह लोग के खियावे पियावे में लागल बा. ओकरा बदले में ई लोग कुछ ना कुछ भितरघात कर करा के ओह खियवला के भुगतान करिए दी. आजादी का बाद से हिन्दी चीनी भाई भाई के नारा लगावे वाला नेहरु का का चीन के ना दे दिहलें. संयुक्त राष्ट्र में मिलत स्थायी सदस्यता ला चीन के अधिका लायक बता के ओकरा के स्थायी सदस्यता दिअवा दिहलन आ देश आजु ले एकर परिणाम भुगतत बा. कश्मीर समस्यो नेहरुए के देन ह. हमेशा अफवाह रहल बा कि नेहरु परिवार के देश के दुश्मनन से करोड़ो रुपिया मिलत आइल बा. सोशल मीडिया प त खुलेआम आरोप लगावल जाला कि नेहरु वाला गाँधी परिवार पिण्डी का इशारा प नाचेला आ ई लोग जब जब विदेश जाला त अपना मालिकन से भेंट मुलाकात क के जरुरी निर्देश लेत रहेला. माई के तबियत खराब हो गइला का बाद से एकर जिम्मा बबुआ उठा लिहले बाड़न.
पाँच कौर भीतर तब देवता पितर वाला मथैला लगावे के पीछे सुशासन बाबू के मजबूरिओ रेघरियावल बा. अपना इमेज का नाम प सुशासन बाबू हवा त अउसन बन्हलन कि लागल कि सरकार अब गइल कि तब बाकिर सरकार आजु ले सलामत बा आ लागत बा कि आगहूं सलामते रही. नीतीश आ चीन के हाल एकही जइसन हो गइल बा. पहिला बेर चीन के ब्लफ काम नइखे करत आ भारत के धमकावे डेरावे के ओकर हर कोशिश बेकार लउकत बा. ठीक ओही तरह जदयुओ के लागल कि राजद के हड़का लीहि बाकिर राजद हड़क में ना आइल. दुनिया जानत बा कि ना त चीन भारत प हमला कर सकेला ना नीतीश लालू प. काहे कि दूनू के दाना पानी सामने वाला प टिकल बा. सोझ हिसाब वाला बात रहीत त नीतीश भाजपा के समर्थन बाहर से ले के आपन सरकार बचा लेतें बाकिर भितरी बहुत कुछ अझूराइल बा. जदयू के अनेसा बा कि ओकर नाहियो त 20 गो विधायक पलटी मारे ला तइयार बइठल बाड़ें. काहे कि ओह विधायकन के लालू के सहारा चाहीं. ऊ जानत बाड़ें कि लालू के माई समीकरण का बिना ऊ जीत ना पइहें आ उनुको ला जरुरी बा पाँच कौर भीतर.
पाँच कौर भीतर वाला फार्मूला में बहिना, दीदीया आ अम्मा के जोड़ खोजल मुश्किल होखी. बसपा वाली बहिना के अलगे मजबूरी बा. उनुका मालूम बा कि अगिला साल जब उनुकर सांसदी के दिन पूरा हो जाई त ओकरा बाद दुबारा राज्यसभा में आइल बहुते मुश्किल हो जाई. मजबूरी के नाम महात्मा जी वाला अंदाज में दलित मुद्दा के नौटंकी करत इस्तीफा त दे दिहली बाकिर पूरा सावधानी रखली कि इस्तीफा सकरा जनि पावे. वाह वाहियो लूट लिहली कि दलितन ला ऊ कवनो सीमा लाँघ सकेली आ कुछ छोड़हूं के ना पड़ल. बिना मंगले लालू का तरफ से सहारा मिल गइल कि ऊ अपना बल प इनका के राज्यसभा भेजवा दीहें. राजनीति के ऊंट कब कवना करवट बइठ जाई एकर भरोसा ना रहला का बावजूद अबहीं ले त सब इहे लागत बा.
आ आखिर में देश के सेकूलर जमात का घाव प मरीचा लगावे के मोह ना छोड़त बता दीहल चाहत बानी कि देश के तीनो माथ पद प अब संघिए विराजमान हो जइहें आ देर सबेर राज्यसभा के बहुमतो मिलहीं वाला बा. तब का का हो सकी एकर अन्दाजा लगावत छटपटात रहे ई लोग.


(बतंगड़ के हर कड़ी कोलकाता से छपे वाला हिन्दी अखबार समज्ञा में अतवार का दिने अँजोर होखल करेला आ कुछ दिन बाद एहिजा डालल जाला.)

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