– ओ. पी. सिंह

लरिकाईं में सुनल एगो कहानी याद आ गइल जब तृणमूलिया दीदीया कह बइठली के हमरा मोदी से शिकायत नइखे अमित शाह से बा. ओह कहानी के बुढ़ियो के बघवा के डर ना रहुवे टीपटीपवा के डर जरुर रहुवे. अब चूंकि हो सकेला कि नयकी पीढ़ी एह कहानी के ना सुनले होखे से संदर्भ समुझे में ओकरा दिक्कत होखो. सं संक्षेप में बता देत बानी.
बुढ़िया के गाँव प एगो बाघ के नजर पड़ गइल रहे आ ऊ जब ना तब गाँव में घुस आवे आ जेही भेंटा जाव ओकरे के उठा ले जात रहुवे. ओह दिन बुढ़िया का घरे एगो घुड़सवार राहगीर आ गइल रहे आ बुढ़िया उनुका के बाहरे खटिया दे दीहले रही. अब बाघ के चिन्ता एह ले ना रहुवे कि ओकरा ला खुराक के इन्तजाम क दीहले रही बाकिर आँगन में सुखावत अनाज के फिकिर बनल रहुवे कि रात में बरखा के टीपटीप जनि शुरु हो जाव.
अब कहानी में बघवा आ ओह राहगीर के कहानी लमहर खींचा जाई आ ओकर कवनो खास जरुरतो अबहीं नइखे. त तृणमूलिया दीदी के मोदी से डर नइखे. अमित शाह के डर जरुर बा. अमित शाह के संगठन बनावे के ताकत आ मुश्किल से मुश्किल लड़ाई फतह करवला के दाँव पेंच से सगरी देश वाकिफ हो गइल बा. अमित शाह के दाँवपेंच में हारलो राज भाजपा का हाथे लागे के लर बन गइल बा. बाकिर तृणमूलिया दीदी अपना आदत से बाज ना आ सकस. कई बेर त बुझइबे ना करे कि कहीं ऊ भाजपा खातिर जमीन त नइखी तइयार करावत बंगाल में. अपना मुसलमान मोह में ऊ जाने अनजाने, चाहे अनचाहे लगातार कुछ ना कुछ अइसन कइले जात बाड़ी कि बंगाल के हिन्दू जनमानस देर सबेर उनुका से छिटकल तय बा. आखिर केहू कब ले अनेत बरदाश्त कर सकेला.
तृणमूलिया दीदी के अनेत से देश भर के हिन्दू जनमानस के खून खउले लागल बा आ एकर असर बंगालो में पड़हीं के बा. दस बरीस से पहिले के सोच सकत रहुवे कि बंगाल से बँवारा गिरोह के एह तरह से बिदाई हो जाई कि लागी कि ओकरा के हिन्द महासागर में फेंक दीहल बा. रामधनु के नाम रंगधनु क देबे वाली तृणमूलिया दीदी पता ना अबले हिन्द महासागर के नाम बदले के सोचले बाड़ी कि ना. पूजा के सीजन बंगाल के साहित्यिक से लगवले आर्थिक हर गतिविधि में जाल फूंकत आइल बा. ओतना पूजा विशेषांक कवनो भाषा में ना छपे जतना बंगला में छपेला. बाकिर अब तृणमूलिया दीदी का राज में बंकिमचन्द्र आ रविन्द्रनाथ के कब प्रतिबन्धित क दीहल जाई केहू बता ना सके. तृणमूलिया दीदी जवना जमात के पोसत बाड़ी ओकरा वंदेमातरम से चिढ़ बा आ ओकरा चिढ़ का आगे सजदा करे में उनुकर जोड़ खोडले नइखे मिले वाला. ओहनिए का चलते कबो सरस्वती पूजा, कबो दूर्गा पूजा, कबो विसर्जन, कबो शवदाह प रोक लगावल रहेले तृणमूलिया दीदी के सरकार.
ई सब करे वाली तृणमूलिया दीदी अगर अमित शाह से डेरात बाड़ी त कवनो अचरज ना. उनुका डेराइहें के चाहीं. देखते देखत बंगाल में भाजपा दुसरका जगहा प आ गइल बिया आ तृणमूलिया दीदी के अनेत आ अतहत के जबाब देबे के माहौल गँवे गँवे बनल जात बा बंगाल में. बस तृणमूलिया दीदी आपन सहयोग बनवले राखसु बंगाल में भगवा फहरे में युग नइखे लागे वाला. एक समय लोग आडवाणी का मुकाबले बाजपेयी के सही मानत रहे, फेर मोदी का मुकाबले आडवाणी नीक लागे लगलें. अब अमित शाह का बदले मोदी नीक लागे लागल बाड़ें. हो सकेला आगा चलि के योगी का मुकाबले शाह नीक लागे लागसु. भाजपा खानदानी गोल त हिय ना. बेटा भतीजा के आपन गद्दी सँउपे के परम्परा नइखे ओकरा घरे. से टीपटीपवा से डेराइल जरुरी बा तृणमूलिया दीदिया के. उनुकर सहेजल सगरी धन-जन-बल एह टीपटीपवा का चलते बरबाद होखल तय बा. डेरा दीदिया डेरा ! बस आपन मुस्लिम मोह मत छोड़ीह. अलग बाति बा कि तलाक तलाक तलाक मुद्दा का राहे सेन्ह लगा लीहले बिया भाजपा एहू वोट बैंक में.


(27 अगस्त 2017 का समाज्ञा अखबार में अँजोर भइल)

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