बबुआ जी वोटवा मांगेले खटिया बिछाई के बाति के बतंगड़ – 8)

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– ओ. पी. सिंह

राजनीति में खटिया के महत्व हमेशा से रहल बा बाकिर अबकी यूपी का चुनाव में ई शान से सामने आइल बा. अपना विरोधी के खटिया खड़ा करे का फेर में बबुआ जी जगहे-जगह खटिया बिछवले जात बाड़न आ लोग जे बा कि ना से खटिया पर बइठ के उनुकर भाषण सुनत बा. देवरिया में भाषण सुनला का बाद लोग खटियो उठा ले भागल. पता ना नुकसान केकर भइल आ कि इहो जीरो लॉस वाला मामिला हो के रहि गइल. बाकिर बाद का मीटिंगन में आयोजक चालाक निकललें आ खटिया के बान्ह के राख दिहलन.

पीके के खाट पर चिन्तन वाला प्रोग्राम चाय पर चर्चा जइसन अनूठा बा, एकरा के केहु नकार ना सके. अब मजाक करे वाला भलही कहत रहि जाव कि बहस विचार करे वाला संसद में सूतल मिले वाला नेता खटिया पर बइठ के बतकही कइल चाहत बा, बाकिर जेकरा खटिया भेंटा गइल से त मगन बा कि अरबो-खरबों तूट लेबे वाला गोल से कम से कम एगो खटिया त भेटा गइल. एह जाड़ा में उहो अब गा सकेला कि सरकाई लेव खटिया जाड़ा लगे हए.

अब सोचल जाव कि पीके बाबू के एकर आइडिया कइसे मिलल कि ओह आदमी के खटिया पर ले अइलें जेकरा पता ना मालूम बा कि ना कि खटिया ना बोले, ओरचनवा काहे बोलेला. हालांकि एह गीत के अगिला लाइन में एकर जवाबो मिल जाला कि कवना कारण से ओरचनवा बोले लागेला. जाने के त हम इहो जानत बानी कि कुछ लोग अब ओरचनवे लेखा बोले लागी. बाति के बतंगड़ बनि जाई. एह से हमार काम त आसान हो जाई मगर हम इचिको ना चाहब कि बतंगड़ करे के मौका केहू दोसरा के मिल जाव.

साठा तब पाठा वाला कहावत के साँच करत पचासा छूवत उमिर में नवही नेता कहाए वाला एह बबुआजी के पता ना खटिया का बारे में जानकारी कतना बा. हो सकेला कि खाट आ खटिया के फरक मालूम होखे बाकिर खचिया आ मचिया के फरक ना बता पइहें. पीके बाबू बिहार में लागू भइल नशाबन्दी के पहिलहीं से बाहर बाड़न आ बिहार सरकार के करोड़ो रुपिया गटक गइला का बादो बिहार के कतना भा का दिहलन से शायदे केहु बता पाई. अब एह बाति से हमरा कवनो लेना देना नइखे. हम त आजु खटिये का बहाने राजनीति के कुछ नीति पर चरचा कइल चाहत बानी.

खटिया खाट होखो भा बँसखट बाकिर ओकर पाटी मजबूत होखल जरुरी होला. राजनीति के एह खटिया के पाटी ओकर विचार धारा होले. ओही विचारधारा के फ्रेम वर्क पर खटिया बीनल जाले. पहिले के खटिया त मूंज के सुतरी से बीनात रहुवे बाकिर नरियर भा प्लास्टिको के रसरी से बुनाइल खटिया मिलल करेले. पइसा वाला लोग नेवार के खटिया बनवा लेला. हालांकि नेवार के खटिया ऊ आनन्द ना देव जवन सूतरी से बीनल खटिया दे देले. एगो बड़का कारण होला कि नेवार वाला खटिया में ओरचन ना होखे आ बिना ओरचन वाली खटिया पर त कवनो सुकन्यो के मौजूदगी बेरस हो जाई. सुकन्या त वइसहीं एगो नाम बना लीहल गइल काहे कि ओह बेचारी लड़की के नाम लीहल बतावल गैर कानूनी काम हो जाई. हालांकि मीडिया के कुछ महारथनियन के नाम एही चलते अधिका भइल कि ऊ आतंकी हमलन का दौरान अपना चैनल से सजीव प्रसारण क के आतंकियन ले सूचना चहुँपावत रहली.

ओरचन ढील भइला का चलते बात तनिका बहक गइल. हम बतावत रहीं की विचारधारा के पाटी पर कई गो सूतरियन के गूंथ के खटिया बीनाला. सोशल इंजिनियरिंग के परिकल्पना त बहुते बाद में आइल. खटिया में ई पहिले से मौजूद बा. सूतरियन के बीनावट अइसन होखेला कि समतल रहो. उबड़ खाबड़ रही त ओहपर नींद आवे में दिक्कत होखी. अलग बाति बा कि टूटटाट घर टपकत खटियो टूट, पीय के बाँह उसीसवाँ सूख के लूट. खटिया बिना ओरचन के हा होले आ बाति जे बा कि अतना लमर गइल कि अब तय फ्रेम से बाहर हो गइल. से ओरचन के चरचा अगिला हफ्ता. तबले ओरचन का कमी से बनल अरुणांचल के देखीं सुनी सभे.

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