बूड़ल वंश कबीर के जमले पूत कमाल : बतंगड़ – 96

पुरनका जमाना से सुनत आइल बानी स ई तंज कि – बूड़ल वंश कबीर के जमले पूत कमाल. पूत अगर कपूत हो जाव तबो महतारी ओकरा के कपूत माने ला तइयार ना होखे. कबीर का साथे अइसन कवनो पुत्रमोह के बात कबो सुने के नइखे मिलल. अइसन नइखे कि कमाल का नाम से कवनो दोहा लोग के याद नइखे. कहले जाला कि बिगड़लो घड़ी दिन में दू बेर सही समय बता जाले. से कमालो के कहल कुछ दोहा कबीर के दोहा का काट में मौजूद बाड़ी सँ बाकिर गिनले-चुनल. जइसे कि कबीर कहलें कि – चलती चक्की देख के दिया कबीरा रोय । दो पाटन का बीच में साबुत बचे ना कोय। एह दोहा के काट कमाल का नाम से मशहूर एह दोहा में मिल जाला कि – चलती चक्की देख के हँसा कमाल ठठाय। कील पकड़ कर जो रहे कभी ना पिसा जाय।

अब नवकी पीढ़ी के त चक्की भा जाँत देखे के मिलल होखे के उमेद कमे बा से ओह लोग के एह दोहन के माने बहुत विस्तार से समुझावे के पड़ी बाकिर पुरनकी पीढ़ी दुनु दोहन के मर्म समुझे में गलती ना कर सके. दुनु अपना-अपना जगहा सही बाड़ी सँ जइसे कि आधा गिलास में आधा गिलास पानिओ होला आ अधवा खोलिओ होले. से दुनु एकरा के सही बता सकेलें. बस नजरिया के फरक का चलते दू तरह के निष्कर्ष निकल जाला.

कबीर आ कमाल का जमाना में घोस्ट राइटर भा स्क्रीप्ट राइटर होत रहलें कि ना से दावा का साथ ना कहि सकीं बाकिर कुछ ना कुछ त रहले होइहें जे कमाल जइसन कपूतो का नाम से कुछेक दोहा चलवा दिहलें. आ अगर कमाल कपूत ना रहलें त इ कहइबे ना करीत कि बूड़ल वंश कबीर के जमले पूत कमाल. कपूत जनमला का दुख महसूसे होखे त विदेश वाली भउजाई से पूछल जा सकेला. एगो शराबी निकल गइल आ दोसरका नशेड़ी. अपना नशा का फेर में एक बेर ऊ एक बेर अमेरिका में धरइलो रहुवे बाकिर बाजपेयी जी का कृपा से छूट गइल. एकरा बाद से ऊ आजु ले अमेरिका नइखे गइल. काहे कि गइला पर ओकर दुर्गति हो जाए के पूरा अनेसा बा. कुछ लोग ओकरा के नशेड़ी कहला पर भड़क सकेला बाकिर एहमें भड़के जोग कुछ बा ना. ना त स्वामी ओकरा के खुलेआम नशेड़ी कहेलें आ तबो कवनो कांग्रेसी में अतना बेंवत ना होखे कि उनुका खिलाफ मानहानि के केस चलवा सके. एक बेर ओह अखबार का मामिला में ई लोग आपन हाथ जरा चुकल बा आ महतारी बेटा दुनु जमानत पर छूटल बाड़ें.

पिछला दिने संसंद में पेश अविश्वास प्रस्ताव पर एह नशेड़ी के भाषण आ ओकरा बाद के ओकर रहन देख के जवन थूथू भइल तवन देखि के महतारी कपार पीट लिहली आ सोचे लगली कि कवना अभगता का फेर में पड़ि के अविश्वास प्रस्ताव पेश करवावे के गलती कर गइनी. सिखावे-पढ़ावे वालन के बहकावा में पड़ि के इहो पूछ दिहले रहुवी कि कवन कहता कि हमरा लगे नंबर नइखे. आ जवन नंबर सोझा आइल ओकरा से ऊ वाला कहाउत साँच हो गइल कि दूबे गइलन चउबे बने छब्बे बनि के अइलें. सिखावे पढ़ावे वाला के कवनो गलती ना रहुवे. ऊ त बेचारा ठीके पढ़वले-बतवले रहुवे बाकिर अपना पीनक में सिंधिया के देखा के कनखी मारल सब गुड़ गोबर कर दिहलसि. आ अगर जे कहीं लोकसभा के कैमरा ई कनखी ना पकड़ले रहीत त पोसुआ मीडिया उनुका के अगिला पीएम मटेरियल साबित करावे में कवनो कोर-कसर ना छोड़ले रहीतें.

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