– ओ. पी. सिंह


मोदी जी के सरकार बनला का बादे से हरमेश कुछ ना कुछ अइसन होत गइल जवन मुश्किल से बरदाश्त करत गइल आदमी. बाकिर अबकी जवन भइल तवन त सीधे बरदाश्त का बाहर हो गइल बा. मीडिया का त पेटे प लात मरले जात बाड़न. एगो ऊ जमाना रहल जब मीडिया में बसल दलाल पत्रकार भा पत्रकारीन तय करा देत रहुवी कि केकरा के मंत्री बनावल जाव, केकरा के कवन विभाग दीहल जाव. आ एगो अब इहो जमाना आ गइल बा जब मीडिया के बड़को बड़का मुद्दन के थाह नइखे लागे दीहल जात. अब राष्ट्रपति के चुनावे के मसला ले लीं. सभे आपन आपन तुक्का लगावत कबो इनकर त कबो उनुकर नाम उछालत अपना के खोजी पत्रकार देखावे बतावे में लागल रहुवे. बाकिर जब नाम सामने आइल त सभका ठकुआ मार दिहलसि. एक जमाना में झाड़ू लगावे के कमिटमेंट देबे वाला आ घर के रसोई के जिम्मा संभाले वाली के एह ओहदा प बइठा दीहल जात रहुवे. वइसनके केहु के अबकियो खोज लीहल गइल रहीत त कवन हरजा हो जाइत. वइसन ना त आडवाणी भा जोशी के एह पद प बइठावल जा सकल रहुवे. कवनो दलिते के चुने के रहल त साक्षी महाराज भा साध्वी निरंजन के चुनल गइल रहीत. अइसन कवनो नाम सामने आइल रहीत त सेकूलर मीडिया के रोजी रोटी कुछ दिन ले तर माल वाला हो गइल रहीत. बिना केहू के नेता चुनले सगरी विपक्ष एकजुटा हो सकत रहुवे. बाकिर विभाजनकारी राजनीति करे वाली भाजपा विपक्षो में विभाजन करा दिहलसि. 2019 के पहिले के भूमिका बनावे में लागल विपक्ष के एके वार में छिन्न भिन्न करा दीहल गइल. आ एगो अइसन दलित के सामने ले के आ गइल भाजपा जेकरा खिलाफ केहू के भड़कावल नइखे जा सकत. ना त सवर्ण शिकायत कर पावत बा ना अवर्ण. आ अब जब अवर्ण सामने आ गइल त अचके में एगो सवाल सामने आ गइल कि काहे ना देश के राजनीती के सवर्ण, अवर्ण, विवर्ण आ निवर्ण में ढाल दीहल जाव. अगड़ा, पिछड़ा, दलित, आ गैर-हिन्दू का जगह सवर्ण, अवर्ण, विवर्ण आ निवर्ण के इस्तेमाल में आलंकारिक प्रवाह आ सकेला. करेरो बाति मुलायमियत से कहल जा सकेला. त बुद्धिजीवियन का सोझा सवर्ण, अवर्ण, विवर्ण आ निवर्ण के ई सवाल फेंकत हम फेरु आम आदमी के स्टाइल में लवटत बानी.
आम का सीजन में आम आदमी के हालत ओह मैंगो रिपब्लिक जइसन हो गइल बा जेकरा के काट चूस लिहला का बाद कूड़ा प फेंक दीहल गइल होखे. आम आदमी के स्वांग करत आआपियन के अलगे शिकायत बा कि ओकरा के दूनू ओर से दूरदुरा दीहल गइल बा. राष्ट्रपति चुनाव में समर्थन खोजत सभका दुआरी गइल भाजपा के गोल बाकिर आआपा कीहाँ ना आइल. भाजपा विरोध के तूतूही बजावत सोनिया कांग्रेस आ उनुकर दुमछल्ला आआपा के चिन्हऊ ला तइयार नइखन. बाकिर साँच पूछीं त मीडिया के दलालन के हाल आआपियनो ले खराब बा.
मीडिया में बहुते लोग के दाना पानी एही प चलेला कि ऊ लोग अपना मुखबिरन का सहारे खबर से पहिले के खबर खबर उजागर करे ला जानल जालें. आ अगर मोदी सरकार अइसहीं चलत रह गइल त कइसे काम चली. अबहीं त लोग इहे माने लागल बा कि फलां के नाम फलां ओहदा खातिर लीहल जात बा त तय बा कि ऊ नइखन चुनाए वाला. अब आडवाणी जी बिहारी बाबू से शिकायत पोस सकेले कि ऊ उनकर नाम काहे आगे ले अइलें. कुछ भेटाइबो ना कइल आ बेमतलब औकातो के थाह लाग गइल.

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