– ओ. पी. सिंह

भर घर देवर, भतारे से ठट्ठा. कहाउत पुरान ह. जब ना त हम रहनी, ना मोदी जी. बाकिर हालही में मोदी जी के एगो बयान सुनि के मन में इहे कहउतिया याद पड़ गउवे. मोदी जी के दुश्मनन के कमी नइखे बाकिर पता ना का सोचि के ऊ अपना भगतने पर हमला बोल दिहुवन आ भक्तन के ठकुआ मार दिहलसि आ ऊ भकुआत रहि गइलें. बाकिर सोशल मीडिया पर भगतन के नाराजगी देखे जोग रहुवे. पता ना 56 इंचि के सीना होखे के दावा करेवाला कवना सकेता में अपना के पड़ल देखलसि कि जवना डाढ़ी पर गोड़ टिका के अपना आसन पर बइठलें तवने प कुठार मार दिहलें आ निशाना सीधा ठाँवे पर पड़ल. विरोधी गदगदा गइलें आ भगत तिलमिला गइलें.
राजनीति में अबहीं ले इहे परम्परा चलल आवत बा कि अपना गोल के लोगन के दोष ना देखल जाव. कह दीहल जाला कि – बत्ते हैं थोली बहुत गलती कर जाते हैं. एगो नेतइन कहली कि – ई सब त होखते रहेला. बाकिर जल्दिये विरोधी लोग के बुझाए लागल कि निशाना भगतन पर ना हो के सीधे ओही लोग पर भइल बा आ तब फेर शुरु हो गइल उहे तान कि दू बरीस से चुप्पी काहे सधले रहुवन. अलग बाति बा कि एकबग्गा चले वाला भगतन के खीसि कम नइखे भइल.
शेर के सवारी एही से ना कइल जाला कि ओह पर चढ़ गइला का बाद उतरल मुश्किल हो जाला. बाकि गोलन के लागेला कि जइसे ओहन के समर्थक माल टनला का बादे सोहर गावेलें वइसहीं शायद भगतनो के कारोबार चलत होखी. जबकि भगत छुट्टा चरे वाला साँढ़ हउवे. हरियरी लउकला का बाद ई ना देखीहें कि कवना खेत में बा. अगर मोदीओ के बात पर नाराजगी होखी त उनुको खिलाफ पुपुही बजावत देर ना लागी. एह दू बरीस में अगर केहू के ई ना लउकल त उनुकर सगरी गणित गबड़ाहीं के बा. भाजपा के कोर समर्थक चाहे जतना छनछनासि, वोटवा डाले बेरा ऊ दोसरा के वोट देइये ना सकसु. नाराजगी बहुत भइल त वोट डालहीं ना निकलिहें.
आ इहे ऊ ताकत ह जवना से ऊ अपनो लोग पर हमला क देले. जबकि दोसर गोल त हर तरह के कुकर्मियन के अनदेखी क देलें. अपना वोट बैंक खातिरे बाकी गोल देश के बड़का जमात पर चोट करे के बेंवत राखि लेलें. आ चालाकी अइसन कि कबो एह नाम प, त कबो ओह नाम के मुद्दा उठावत बढ़ावत एह जमात के टुकड़ा करावत रहेलें. आ मौका परस्ती में राष्ट्रहित गइल भाँड़ में आपन हित बचावत रहेले. अब गोरक्षकन के मुद्दा पर मोदी के बयान आवते कांग्रेस कह दिहलसि कि गाय के रक्षा कांग्रेसे करी. त लालू के बयान आइल कि अब मोदियो के बुझा गइल कि गाय दूध देबेले वोट ना देव. लालू का लगे एह बाति के जानकारी बहुत पहिलहीं आ गइल रहे तबहियें नू उनुका शासन में ओतना चारा चबा लीहल गइल कि आजु ले ओकर चरबी ना गलल. बिहार का चुनाव में त बीफो के समर्थन कइले रहलें ई गऊ पालक.
बाकिर ईहो लोग भुला गइल बा कि जबरा मारबो करी आ रोवहुं ना दी. दलितन के खरबपति बेटीओ के लागे लागल बा कि खरब त ओकरा लगे रहि गइल बा बाकिर दलित समुझे लागल बाडें. अगर अइसन बाति ना रहल रहीत त सबले बेसी दलित सांसद भाजपा के ना रहितन. यूपी के चुनाव में बिहार के फार्मूला लगावे के कोशिश अवले परवान चढ़ल नइखे लउकत. बाकिर देशे ना दुनियो के नजर यूपी चुनाव पर गड़ल बा. ऊँट जवने करवट बइठो, देश के राजनीति के दशा दिशा बदलल तय बा. तबले दुलहिन भतारे से ठट्ठा करे ला आजाद बाड़ी.

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