– ओ. पी. सिंह

एगो पुरान कहाउत ह कि बाँझि का जनिहें परसवती के पीड़ा. आ हम सोचत बानी कि ई सवाल बाँझिने से काहें पूछल गइल. परसवतिओ के त ना मालूम होला बाँझिन का पीड़ा. बाकिर चुँकि बाँझिन असहाय होले त ओकरा प कहाउत कहल आसान होला. आ एही से इहो कहाला कि समरथ के ना दोष गुसाँई. रानी मधुमाखीओ अइसने समरथ में गिनल जाले. ओकर जी हुजूरी करे वाला हजारन मजदूर माखी होली सँ. ओकरा छत्ता भा किला में कवनो राजा मधुमाखी के चरचो ना होले. जबकि मजदूर मधुमाखियन के जनमावें में थोड़ बहुत योगदान त ओकरो होला.
सोचनी कि काहे ना नर मधुमाखी का बारे में कुछ जानकारी बिटोरल जाव आ एह सवाल के जबाब खोजत में बहुते जानकारी भेंटा गइल रानीओ मधुमाखियन का बारे में. सगरी त ना बाकिर काम भर के जानकारी बाँटल जरुरी बा. रानी मधुमाखी हर छत्ता में एके गो होले जबकि नर मधुमाखी कई गो होलें. बाकिर होते जाड़ा एह लोगन के बाकि मजदूर मधुमाखी चहेट देली सँ. आ ई लोग आपन अलगा ठाँव खोज-बना लेला. असल में नर मधुमाखी रानी मधुमाखी के गाभिन बनावल छोड़ दोसर कवनो काम करे जोग होखबो ना करसु. आ गाभिनो बनावे के मौका हजार में एकाधे गो नर मधुमाखी के मिल पावेला. दोसर खासियत होला कि एह लोग के सहवास उड़ते घरी हो सकेला. रानी मधुमाखी के जब गभिनाए के मौसम आवेला त ई उड़ान प निकल जाली आ नर मधुमाखियन का अड्डा का लगे से उड़ान भर देली. इनकर गंध पावते नर मधुमाखियन में रेस लाग जाला आ ओही में से जे तेज होला ऊ बाजी मार लेला. एकरा साथही ऊ मरियो जालें आ तब दोसरो नर मधुमाखियन के मौका मिल जाला. एह कतार के मजा लूटत रानी मधुमाखी एके उड़ान में नाहियों त एकाध दर्जन नर मधुमाखियन के मौत के कारण बन जाली. एह उड़ान का बाद रानी मधुमाखी हजारन मजदूर मधुमाखियन के जनमावे में समर्थ हो जाली.
अब एह जानकारी का बाद केहू के रानी मधुमाखी कहे में डर लागे के चाहीं. हो सकेला अइसने कवनो कारण से आलू के फैक्टरी लगावे आ नारियल के जूस निकाले वाला बबुअवो मध के फैक्टरी लगावे के बाति ना करे. दोसरे हो सकेला कि ओकरा घरहीं के रानी मधुमाखी के खयाल आ जात होखे. आ अब हम आजु के बतंगड़ का मथैला प लवटत बानी. रानी मधुमाखी के तेजपत्ता के स्वाद मालूम होला कि ना से हमरा नइखे मालूम. बाकिर अगर कवनो रानी मधुमाखी कवनो तेजपत्ता के बड़ाई करे त सोचे वाली बाति होले कि राज का बा. तेजपत्ता के पत्ता अपना तेजे का चलते जानल जाले. खाव ओकरा के केहू ना बाकिर तरकारी के सवात बढ़ावे में ओकर कवनो सानी ना होला. खाए बेरा ओकरा के सभे निकालो फेंकेला. एकरा बावजूद तेजपत्ता तेजे रहेला.
अब तेजपत्ता के बाति कहाँ से आइल त एकर श्रेय हम अरनब के देब. उनुकर चैनल त कबहिएं-कबहीं साफ सुनाला. एहसे ओकरा के सुनल कम जाला देखल जरुर बेसी जाले. कुकुरबझाँव के अइसन बेजोड़ नमूनो दोसरा चैनल प देखे के ना मिल पावे. एहिजा कुछ पैनलिस्ट त बुझाला कि अरनब के डाँटे-फटकार सुने के अपियरेंस मनी लेबे आवेलें. अरनब के चैनल देख के कई बेर मन में आवेला कि नजर कहीं अउर बा आ निशाना कुछ अउर. कहे के त कवनो मुद्दा प खिलाफत कइल मकसद होला बाकिर घुमा फिरा के ओकर प्रचार-पसारो क देलें अरनब. खुल के आते भी नहीं राज छुपाते भी नहीं. से उनुके चैनल प पिछला दिने जया जेटली के किताब के प्रचार करत एह मथैला के विचार बन गइल कि – रानी मधुमाखी आ तेजपत्ता के स्वाद ! राज का बा ?

(अतवार 12 नवम्बर 2017 का दिने कोलकाता से छपे वाला अखबार समाज्ञा में अँजोर भइल.)

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