– ओ. पी. सिंह

पिछला हफ्ता कर्नाटक के बैंगलुरु में एगो अंगरेजी पत्रकार गौरी लंकेश के कुछ बदमाश गोली मार के खून क डललें आ ओकरा कुछेके मिनट में शुरु हो गइल चुतिया पत्रकारन आ अउरी चुतियन के चुतियापा. आ हम का बात के बतंगड़ करीलें जे ई चुतिया के देखवले सँ. चुतिया शब्द के इस्तेमाल हम आजु जानबूझ के आ पूरा जिम्मेदारी से करत बानी. काहे कि एगो चुतिया नेता देश के पीएम के चुतियापा के रेघरियावे के कोशिश कइलन. ओकरा बाद चुतिया शब्द के लेके एगो अलगे कोहराम मच गइल. एहसे लंकेश वध से पहिले एह चुतिया से निपट लीहल चाहत बानी.
कुछ लोग के ई शब्द गारी लागल त कुछ लोग के फूहड़ भा अश्लील. आम इस्तेमाल में एह तरह के शब्दन के भरमार बा आ चूंकि आम आदमी श्लील ना होखे एहसे ओकरा ई सभ शब्दो इस्तेमाल करत में सहज लागेला. भोजपुरी के कुछ लठमारन से हमार विरोध एही अश्लीलता का चलते हो जाला काहे कि हमार मानना ह कि भोजपुरी के ताकत ह ओकर अश्लीलता. जे लोग अपना के श्लील माने के गुमान पोसले बा ओकरा भोजपुरी बोले बतियावे में लाज लागे लागेला. राजेन्द्र बाबू के ई गुमान कबो ना रहल आ उहाँ के राष्ट्रपति बनला का बादो शान से भोजपुरी में बोलल बतियावल करत रहीं. बाकिर बात बहक गइल आ चुतिया प लवटत बानी.
चुतिया शब्द संस्कृत के च्यूत शब्द से उपजल ह. एकर मतलब भइल गिरल. ई गिरल पद से गिरल हो सकेला भा अपना कर्तव्यबोध भा संस्कार से गिरल. कुछ लोग गलतफहमी में एकरा के चूत से बनल शब्द मान बइठेला. उहो शब्द च्यूत से उपजल ह. बाकिर दूनू के आपसी संबंध ओही जस होला जइसन हिन्दी आ भोजपुरी के. दूनू संस्कृत से निकलल भाषा हईं सँ बाकिर कुछ लोग भोजपुरी के हिन्दी के बोली बतावे के हिमाकत कर बइठेला. भोजपुरी के इतिहास सतवीं शताब्दी से मिल जाला जबकि हिन्दी के सतरहवीं शताब्दी से पहिले के कवनो संदर्भ ना मिल पावे.
लंकेश वध का बाद चुतियन में अचके जान आ गइल आ ओहनी के लागल कि मोदी के एह कांड का बदले लपेटल जा सकेला. एगो लंकेश राम का समय में रहलें. उहो महाविद्वान होखला का बावजूद आर्य संस्कृति के खिलाफत करे में अइसन आन्हर हो गइल रहलें कि आपन एगो अलगे संस्कृति के शुरुआत क दीहलें. गौरी लंकेश उनुके के आपन आदर्श मानल रहली. हिन्दू विरोध आ देश विरोध में उनुका चुतियापा के कवनो सीमा ना रहल. जेएनयू का कन्हैया आ खालिद के ऊ आपन बेटा जस मानत रहली. अपने महतारी का बारे में कहत रहली कि ऊ फ्री सेक्स करत रहली जबकि बाकि हिन्दू औरत उनुका नजर में रंडी जस रहली सँ. पीएम मोदी के ऊ महिनवारी में इस्तेमाल कइल सेनिटरी पैड भेजे के बात करत रही. केरल आ देश में दोसरा जगहा हिन्दूवन के कत्ल प जश्न मनावल रहली. नक्सली हिंसा के पक्षधर रहली आ राष्ट्रविरोध उनुका ला अभिव्यक्ति के आजादी रहल.
एही लंकेश के हत्या का मिनट भितरे चूतियन के चुतियापा शुरु हो गइल कि लंकेश वध का पाछे हिन्दूवन के हाथ बा. वध कर्नाटक में भइल एह नाते विरोध ओहिजा के सरकार के होखल चाहत रहल. जरुरत रहल कि सरकार प दबाव बनावल जाय कि हत्यारन के जल्दी से जल्दी पकड़ल जाव आ ओहनी के कठोर से कठोर सजा दीहल जाव. बाकिर एह चूतियन के ओहसे कवनो मतलब नइखे. ई त अस बवाल खड़ा क दीहलें कि अब पुलिस का सोझा दिक्कत हो जाई खुलासा करे में. अगर हत्या में हिन्दूवन के हाथ ना मिलल आ नक्सली भा कवनो भठियारा कर्नाटकी मंत्री के हाथ मिलल त ऊ फजीहत में पड़ जइहे. एहसे तय मानी कि एह मामिला के खुलासा होखे में समय लागी.
आ जब दिरग्गी राजा देखलन कि चुतियापा करे में ऊ पीछे छूटल जात बाड़न त एगो महाचुतियापा क देखवलन. चुतियापा जिन्दाबाद.


(10 सितम्बर 2017 का दिने समाज्ञा अखबार में अँजोर भइल)

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