लीनक्स आ विंडोज का बहाने भोजपुरी के चरचा (बतकुच्चन – 190)

admin
कंप्यूटर के दुनिया में दू तरह के साफ्टवेयर होला. एगो त प्रोप्राइटरी, जवना के मलिकान कुछ खास लोग का लगे होला आ उहे लोग तय कर सकेला कि एहमें का रही, कइसे रही, का करी वगैरह. दोसरका होला ओपन सोर्स, जवना के मलिकान केहू का लगे ना होखे. जेकरे मन करे, जइसे मन करे, जवना काम ला मन करे इस्तेमाल कर सकेला. भासा का बारे में अगल एह तरह से सोचल जाव त भोजपुरी ओपन सोर्स भासा ह. जइसे लीनक्स के सैकड़ो रूप मिलेला ओही तरह भोजपुरिओ के अनेके रूप मिल जाला. हर रूप अपना में पूरा होला आ ओकरा में कवनो दोस ना निकालल जा सके. हर रूप के आपन प्रशंसकन बाड़े जिनका बरदाश्त ना होखी कि उनुका भोजपुरी में रउरा कवनो दोस निकाल दीं. अगर निकाले के कोशिश करब त रउरो भोजपुरी का बारे में उनुका लगे गलतियन के फेहरिस्त मिल जाई. एह हालत में कइल का जाव? कवना तरह एकर समाधान खोजल जाव? आजु एह बारे में बतियावत हम ओपन सोर्स वाला नमूना के चरचा बार बार करब काहे कि ओकरे रोशनी में एह ओपन सोर्स भासो के चरचा सहजता से कइल जा सकी.

लीनक्स के बेंवतगर होखला का बावजूद ओकरा के आम आदमी ओह सहजता से इस्तेमाल ना कर सके जतना सहजता से लोग विंडोज आधारित सिस्टम पर काम कर लेला. काहे कि भोजपुरी लीनक्से का तरह निर्बाध होले. रउरा अपना जरूरत, अपना पसन्द का मुताबिक ओकरा के ढाल सकीलें. अब एहसे अनेके रुप सामने आ जाव भोजपुरी आ लीनक्स के तवन अलग बाति बा. लीनक्स का दुनिया में ओपन सोर्स आ प्रोप्राइटरी साफ्टवेयर के बीच के राह निकाले के कोशिश भइल बा डिस्ट्रीब्यूसन का नाम पर. फेडोरा, रेड हैट, उबन्टू वगैरह अनेके डिस्ट्रीब्यूसन बा लीनक्स के. एक के इस्तेमाल करे वाला दोसरका इस्तेमाल करत घरी कुछ देर ला असहज होखी बाकिर चूंकि ओकरा लीनक्स के मूल तत्व के ज्ञान हो चुकल बा त ऊ थोड़ देर बाद दोसरको रूप के इस्तेमाल में सहज हो जाई.

भोजपुरी का दुनिया में एकरा के प्रकाशन का रूप मे लिहल जा सकेला. चूंकि अबहीं भोजपुरी के कवनो सर्वमान्य व्याकरण नइखे, कवनो मानक रूप पर एका नइखे बनल त एह हालत में अलग अलग प्रकाशन आपन शैली बना लिहले. भोजपुरी में दुनिया के सबले पहिलका वेबसाइट रहल अँजोरिया डाॅट काॅम. ओकरा माध्यम से पहिला बेर भोजपुरी के विश्वपटल पर परोसल गइल. स्वाभाविक रहे कि ओकरा आपन खास शैली बनावे के पड़ल आ ओह शैली के अब ओकर अगिला पीढ़ी के वेबसाइट भोजपुरिका डाॅटकाॅम ले के आगे चलत बा. बहुते लोग के ओकरा शैली से विरोध बा. कुछ लोग के ओकरा भोजपुरी से. आजु नाम ले के चरचा करे के कारण ई भइल कि भोजपुरी के अनेके रूप का बीच से गँवे-गंँवे एगो मानक रूप बनावे पर चरचा बढ़ावल जाव. बतकुच्चनो के भासा रूप पर बहुते लोग खुश होला त बहुते लोग के आपत्ति आवत रहेला कि अतना तेज बाउन्सर फेंकला के का जरूरत कि सामने वाला डक क जाव. बाकिर जरूरत त बा. भोजपुरी के जिअवले राखे के बा त एह बारे में चरचा होखल गीत, कहानी, कविता, उपन्यास लिखला से अधिका जरूरी बा.

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