– ओ. पी. सिंह

संस्कृत भा संस्कृत से उपजल भाषावन में कवनो दोसरा शब्द का पहिले लाग के ओह बाद वाला शब्द के माने बदलत भा ओकरा के अउर पोढ़ करेवाला शब्द के उपसर्ग कहल जाला आ वि अइसने एगो उपसर्ग ह. जब ई कवनो दोसरा शब्द का पहिले जुड़ेला त अधिकतर मामिला में ओकर उल्टा मतलब बना देला आ कुछेक मामिलन में ओकरा के अउर बलशाली अउरी भावगर आ पोढ़ क देला. जइसे कल का उल्टा विकल, मल का उल्टा विमल वगैरह. बाकिर जय का साथे जुड़ के ओकरा के अउर भावगर अउर महान विजय बना देला. अब अतना अन्दाज त रउरो होखी कि हम व्याकरण के पढ़ाई करावे नइखीं आइल. हम त एह विजयदशमी प अपना बतंगड़ के विस्तार देबे ला ई सभ करत बानी.
भोजपुरी में अउरीओ बहुत कुछ अइसन बा जवना के इस्तेमाल आजु कइल चाहब, ओहीमें के एगो शब्द ह हेहर आ एगो ह थुथुर. त दीदीया जइसन हेहर आ हिन्दूवन जइसन थुथुर खोजले जल्दी नइखे मिले वाला. सैकड़न बरीस के गुलामी झेलत हिन्दूवन के खून पानी हो गइल बा. ओकरा में जल्दी उबाल ना आ पावे, ना त जवना तरह ओकरा साथे अनेत-अत्याचार हो रहल बा, ऊ अबले बागी हो गइल रहीत. मोहनदास हमनी हिन्दूवन के निकहा से चीन्हले रहलें. तबे उनकर सलाह रहल कि अगर मुसलमान तोहरा प कवनो अत्यचार करत बा त ओकरा के चुपचाप सह ल, ओकर मुकाबला करे के गलती जनि करीह ना त अउरी थूरा जइब, आ सचहूँ हिन्दू लोग उनकर बाति बढ़िया से मान लीहल. अउर ना त उनुका के आपन बाप जइसन ओहदा दे दिहल. जबकि अइसन सलाह देबे वाला मनई के मुँह थूर दीहला में कवनो पाप ना लागीत.
आजु-काल्हु दीदीया के सह पा के बंगाल मे हिन्दूवन का खिलाफ जवन भाषा बोलल जा रहल बा तवना से हिन्दूवन के खून खउल गइल चाहत रहल बाकिर ना, ओकरा त थुराए के आदत पड़ गइल बा. आ ई कमजोरी ओकरा संस्कारे में कतहीं लुका के बइठल बा. ना त जान बचावे ला आपन मजहब बदलि लीहले हिन्दूवन के खानदान आजु अतना खूंखार ना लउकीत. आजु उहे लोग खुलेआम चुनौती दे रहल बा आ केहू में ओह चुनौती के सकारे के बेंवत नइखे लउकत.
परो साल दीदीया हिन्दूवन के रिगवले रहुवे आ आखिर में अदालत के शरण लेबे के पड़ल रहुवे तब जा के मूर्ति भसान के इजाजत मिलल रहल. अबकी लोग गफलत में रहल कि दीदीया पर-साल वाली गलती एह साल ना दुहराई. बाकिर ओह लोग के ओकरा हेहरपन के पहचान ना रहल. एहू साल अपना कुनबा के बढ़ावा देत मूर्ति भसान प रोक लगा दीहली आ अदालत के फेर उनुकर फजीहत करत ओह आदेश के गैर कानूनी बतावे पड़ल.
दोसर कवनो इज्जतगर सीएम आपन गलती मान के चुप बइठ गइल रहीत बाकिर दीदीया त अलगे मनई हीय. अब ऊ एह फैसला का खिलाफ सुप्रीम कोर्ट जाए के सोचत बाड़ी. हो सकेला कि उनुका के सलाह मिलल होखे कि जवन अदालल दही हाँड़ी के ऊँचाई तय कर सकेले, बता सकेले कि दिवाली प फोड़े वाला पटाखन के गिनती कतना होखे के चाहीं, तवन एहू मुद्दा प कवनो वइसने फैसला दे सकेले. आखिर सेकूलरिज्मो त एक तरह के उपसर्गे बन गइल बा हिन्दूस्तान के संविधान ला. हर कायदा कानून एह सेकुलरियन उपसर्ग का इस्तेमाल से बदल दीहल जाले. कश्मीरी पंडितन के अरजी फट से खारिज क दिआइल बाकिर नाजायज तरीका से हिन्दुस्तान में घुस आइल रोहंगियन के अरजी सकार लीहल गइल. आ ई रोहंगियन के ताकत जाने के होखे त एह मुद्दा प पैरवी करत वकीलन के लिस्ट देख लीं सभे.
एहीसे अदालती फैसला का बादो अबहीं ले ई तय नइखे कि – विजया, के जया ?
(अतवार 24 नवंबर का दिने कोलकाता से छपे वाला अखबार समाज्ञा में अँजोर भइल.)

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