– ओ. पी. सिंह


एक बाति आजु हम फेरु रेघरिया दीहल चाहत बानी कि हम सेकूलर ना बन सकीं. हम कम्यूनले रहल नीमन समुझत बानी.
ई बाति आजु दोहरावल तिहरावल एह ले जरुरी हो गइल बा कि देश सेकूलरिज्म के नया परिभाषा गढ़ले जात बिया. भारत में सेकूलरिज्म के मतलब हिन्दू विरोध गइल बा. अगर रउरा गाय के माँस खाईले, बीफ पार्टी दीहिलें तब त सेकूलर बानी आ ई सब ना करीं त रउरा के कम्यूनल मानल जाई. अब रउरो सोचीं कि रउरा का होखल चाहब, सेकूलर कि कम्यूनल. सेकूलर हईं त बताईं कि पिछला बेर गाय के माँस कब खइले रहीं, कवना कवना बीफ पार्टी में शामिल भइल रहीं. अगर नइखीं बता सकत त रउरा के कम्यूनल मानल जाई.
देश के एगो पार्टी हिय कांग्रेस. एकर तुलना ओह खानदानी खुरपी से कइल जा सकेला जवना के खुरपी खीया जाव त ऊ बदला जाला आ मूठ टूट जाव त ऊ, बाकिर खुरपी के खानदानी हैसियत ना बदले. एकर चुनाव निशान एक जमाना में दू गो बैलन के जोड़ी रहल आ बाद में गाय बछरु. खुदे अपना के इस्लामी संस्कार वाला नेहरु का राज में किसानी के अइसन बढ़न्ती भइल कि बैल बेकार हो गइलन सँ. बाद में गाय बछरु के निशान चुनलसि कांग्रेस. दुर्भाग से पहिले बछरुआ मरल आ बाद में गइयो मरा गइल. हालांकि कहे वाला आजुओ कह सकेलें कि निशान हट गइल त का, कांग्रेस में आजुओ गाये आ बछरु के चलत बा. एही कांग्रेस के जमाना का बनल एगो कानून मोदी सरकार लागू क दिहलसि त बखेड़ा मच गइल. एगो उर्दू शेर याद आवत बा कि –
वो बात जिसका फसाने में कोई जिक्र न था,
वही बात उनको नागवार गुजरी है.
एह कानून में कतहीं ना त कसाईखाना के जिक्र बा, ना बीफ के. बाकिर एह बातु प ना त ओह बाति प, कवनो बहाने देश में फसाद करावे खातिर बेचैन विपक्ष लागल जगहे जगह बीफ पार्टी देबे. कांग्रेस के नवही शाखा के नेता केरल के कुन्नुर में एगो बछरु के सरे राह चौराहा प काटि के भोज दे दीहलें. एह लोग के कहना रहल कि आदमी का खाई एकर फैसला सरकार ना कर सके. अरे भाई, मानत बानी कि रउरा एकर छूट बा. रउरा गाय, सूअर, घोड़ा, कूकूर जवन मन करे तवन खाईं बाकि एकर तमाशा मत करीं. जे ई सभ ना खाव ओकरा के रिगाईं मत, ओकरा के चुनौती मत दीं. एकरा के एह तरह से समुझीं कि अपना मेहरारु साथे सहवास कइल राउर अधिकार ह. एकर मतलब ई ना भइल कि चट्टी चौराहा जहवें मन करे तहवें सहवास कइल शुरु क दीं.
बाकि इहो धेयान देबे वाली बाति बा कि एह देश के सेकूलर जमात कबो कवनो दोसरा मजहब के आस्था का खिलाफ कुछ ना करे बाकिर हिन्दूवन का खिलाफ कुछ करे के कवनो मौका ना छोड़ें. आ ओकर साथ देबे में हमेशा आगे रहेला भंड़ुआ मीडिया, भाँड़ आ भँड़ुआ में फरक होला. मीडिया भाँड़ हो जाव त बरदाश्त कइल जा सकेला बाकिर मीडिया भँड़ुआगिरी करे लागे त ई बरदाश्त ना कइल जा सके. केरल वाली घटना के वीडियो जग जाहिर भइला का बादे रंडी टीवियन के एंकरन में होड़ रहल कि एह खबर के कइसे घुमा दीहल जाव. एगो चैनल ओकरा के बैल बतवलसि त दोसरका ओकरा के भईंस बता दिहलसि. अरे भाई गाय , बछरु, बैल, पाठा, आ भईंस में अन्तर ना जान सकऽ त पत्रकार काहे बन गइलऽ ? छोट छोट बाति प पशु अधिकारन के लड़ाई लड़े वाला पेटा के बकार ना फूटल एह बर्बरता का खिलाफ. हँ कांग्रेस के युवराज जब एह घटना का खिलाफ दू लाइन के ट्वीट क के निन्दा क दीहलें त पेटा के नींद टूटल आ बबुआ जी के जयकार क दिहलसि. तबो एह बाति के धेयान रखलसि कि ओकरा से गोहत्या का खिलाफ कुछ कहा मत जाव. छी: !
एहसे हम त तय कर लिहनी कि अगर हमरा के केहू सेकूलर कह दिहलसि त हम ओकरा सात पुहुत के गरिया के राख देब. ना त सेकूलर हईं ना सेकूलर जइसन घिनौना हो सकीलें. हम कम्यूनल हईं आ छाती ठोंक के एह बाति के एलान करत बानी. रउरा तय करीं कि रउरा का करे के बा !

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