– ओ. पी. सिंह


पिछला हफ्ता लिखले रहीं कि नाम में का धइल बा आ एह हफ्ता फेरु नामे के चरचा ले के बइठ गइनी. बाकि करीं त का ? कुछ दिन पहिले ले नोटबन्दी के चरचा रहुवे. कहीं से शुरू करीं बात घुमा फिरा के नोटबन्दी प आ जात रहुवे. आ अब बाप-बेटा, चाचा-भतीजा के नौटंकी अइसन बाव धइले बा कि केजरीवालो के नौटंकी फेल मार गइल बा एकरा सोझा. भूकंप ले आवेवाला नयका साल के छुट्टी मनावे विदेश चलि गइल बाड़न आ छोड़ गइल बाड़न अपना झंडाबरदारन के कि नोटबन्दी का खिलाफ प्रदर्शन करत रहऽ लोग. जइसे कि केजरीवाल से दिल्ली त ना सम्हरल बाकि पंजाब चहुँप गइलन सरकार बनावे ला. गोवा के जिम्मा दोसरा के दे दिहले बाड़न काहे कि ऊ एगो छोटहन राज्य ह. पंजाब के मुख्यमंत्री बन जइहन त असली राज्य के राजा बन जइहन. दिल्ली का बारे में कुछ गलतफहमी रहल जे अब मेट गइल बा. आ केजरी-चालिसा का फेर में हमहूं मुद्दा से भटक गइनी त अब वापस लवटत बानी अपना मूल मुद्दा प.

बाप-बेटा के आपसी रिश्ता प कहावतन के कमी नइखे. बाप एक नम्बरी त बेटा दस नम्बरी. बापे पूत परापत घोड़ा, बहुत नहीं त थोड़ा थोड़ा. बाप के मरले कुँअर, महतारी का मरले टूअर. बाप चवन्नी, बेटा अट्ठन्नी. बड़े मियाँ त बड़े मियाँ, छोटे मियाँ सुभान अल्लाह. वगैरह. बाप-बेटा के बीच के लड़ाईयो कवनो नया पर नइखे होखत. इतिहास गवाह बा कि केतने बाप अपना बेटन के सत्ता मोह का चलते कगरी फेंका गइलें. जे राजा-बादशाह रहल वइसन लोग के त जेलो काटे के पड़ गइल भो रगदन ले नपा गइल. नया फैशन निकलल बा एह लोग के मार्गदर्शक मण्डल में डाले के. पहिले बाप के उमिर वाला आडवाणी एह मण्डल के शोभा बढ़ावल शुरू कइलन आ अब मुलायमो के इहे नसीब भइल बा. वइसे मुलायमो अपना जमाना में कम लोग संगे कैंचिया दाँव नइखन चलल. अब बेटा उनुके कैंचिया दाँव उनुके प अजमा लिहलसि. हालांकि बाप बेटा के एह लड़ाई में असल फजीहत चाचा के हो गइल. चाचा चोर भतीजा पागल, चाचा का सिर प जूता बाजल वाला कहावत साँच हो गइल बा. चाचा के अपना राजनीतिक पहलवानी के बहुते गुमान हो गइल रहुवे से सगरी गुमान हवा हो गइल. बाकि अतना न मानही के पड़ी के भाई के कवनो ना कवनो कुंजी उनुका हाथे जरुर बा जवना चलते बाप बेबस हो के बेटा से लड़ाई मोल लिहलसि, पुरान देह गबरू पहलवान के ताकत के अन्दाजा ना लगा पवलसि आ चित्ते पटा जाए के पड़ गइल.

नाम में का धइल बा वाला बात से बड़का बात बा कि नामें में सबकुछ लुकाइल बा. अपना बेटा के नाम तैमूर राखे वाला संगे जवन होखी तवन त देखल बाकी बा, बाकि टीपू नाम वाला त आपन बेंवत देखाइए दिहलसि. अब सपा के नाम ला लड़ाई शुरू बा. अलग बाति बा कि साइकिल केकर रही एकर झगड़ा फरियाए से पहिलहीं बिगुल बाज गइल बा. अब बाप बेटा दुनू जने कवनो दोसर सवारी खोजे ला मजबूर हो जइहें. हो सकेला कि बेटा मोटरसाइकिल चुन लेव आ बाप ठेला गाड़ी. भा इहो हो सकेला कि साँसत में जान देखत चुनाव तकले सीजफायर के एलान हो जाव. बाप बेटा के भरोसे एगो महतारीओ-बेटा लार चुआवत बाड़ें. अगर बाप-बेटा अपने में लड़त रहि जइहें त महतारी के दिल टूट जाई. बेचारी अबकी बहुते उम्मीद कइले रहुवे कि यूपी के चुनाव ओकरा बेटा के नेतागिरी जियवले राखे के सहारा दे जाई. बाकि उहो बेहाथ होखत लउकत बा. अलग बाति बा कि बेटा एह सब से बेखबर आपन छुट्टी मनावत बा. बेटा के सुभाव इहो साबित करत बा कि जरूरी ना होखे कि साग पात के बेटा परोरा होइए जाई. हो सकेला कि ऊ खर पतवारे साबित हो के रहि जाव.

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