MeghnaPatel
रजवा के बेटिया भइली कंगरेसिया हो रामा, चोलिया पर. चोलिया पर जय हिन्द लिखवली हो रामा चोलिया पर.

जानत बानी कि फगुआ के मौसम ह आ ई गीत चइता के ह. बाकिर माहौल कुछ अइसने बन गइल बा आ चरचा में देश के दू गो अइसन मॉडल आ गइल बाड़ी जे अपना अपना नेता के प्रचार करे ला आपन कपड़ा ले उतार दिहले बाड़ी. केहू अपना नेता के पोस्टर से आपन देहि तोपले बा त केहू अपना पार्टी के झंडा आ चुनाव चिह्न के पहिर के आपन खास हिस्सा छिपवले बा.

तय बा कि एह सभ पर बवाल मचबे करी आ मचियो गइल बा. लोग मचमचा के एह पर चरचा करत बा. एगो एंकर त रस ले ले के दु नू मॉडलन के इंटरव्यू लेत रहलन आ उ बेचारी कसमसा कसमसा के अइसने कुछ जवाब देत रहुवे. एगो चैनल बैनर लगा लिहलसि कि ये लड़कियाँ मोदी राहुल को ले डुबेंगी! आजु हो सकेला कि रउरो सभे में से कुछ लोग भड़क जाव कि का बेहूदा बात उठा लिहलन. घर में बेटीओ बेटा पढ़ेलें आ एह तरह के फजूल के चरचा उठा दिहल गइल बा. बाकिर एहिजा बता दिहल चाहब कि एह में कहीं कुछ नाजायज नइखे. वइसे हम नाजायज कबो कुछ लिखलो ना चाहीलें. जे लोग आजु के लेख पर आपत्ति करे ओह लोग से बस अतने पूछल चाहब कि कवना शब्द भा वाक्य प अपने के आपत्ति बा? याद आवत बा मंटो का खिलाफ चलल मुकदमा के एगो मशहूर जवाब जवना में मंटो प आरोप लागल रहे कि ई अपना कहानी में छाती शब्द के इस्तेमाल कइले बाड़न. एह आरोप प झुंझुआ के मंटो पूछलन कि अरे भाई औरत के छाती के छाती ना लिखीं त का लिखीं? खैर हम ई सवाल रउरा से नइखीं करे जात.

असल में हमार इरादा कुछ अउर लिखे के रहुवे. आ उहे सोचत रहीं जब सामने टीवी पर एह निगोड़ियन के चरचा आवे लागल. हमहु चरचा में डूब गइनी आ पत से पतुरिया के बीच के चरचा जवान होखत राजनीति पर चलि आइल. देश के बड़हन आबादी आजु जवान बा. सड़क से ट्रेन ले, सिनेमा हॉल से बाजार ले जँहे देखीं तहें एह नवहियन के झुंड लउकी. फगुनहट के मूड में सवाल पूछीं त बड़के बुढ़वन के जवाब देबे के पड़ी कि आखिर ई आबादी आइल त कइसे. एहमें राउरो योगदान बा मानीं भा मत मानीं. घर के बड़ बूढ़ संस्कार तमीज सिखावल छोड़ दिहले, स्कूल कॉलेज में मास्टरजी लोग पढ़ावल छोड़ दिहल, आ राज करे वाला नेता लोग एह बहकल जमात के सम्हरला का बदले अउरी सहकवले जात बाड़े. रोजगार ना दीहें, बेरोजगारी के भत्ता दे दीहें. स्कूल में मास्टर के जगहा खाली रही बाकिर विद्यार्थियन के लैपटॉप दे दीहें. अस्पताल में डाक्टर ना रहीहें बाकिर घरे से अस्पताल चहुँपावेला एंबुलेंस के कतार लगा दीहें. समय बदल गइल बा आ समय का साथे समाजो बदलि गइल बा. पहिले बसंत पंचमी से फगुआ ले चालीसे दिन के छूट रहुवे भर फागुन बूढ़ देवर लगीहें भा झुलवा झारि के पहिर गावे के. अब त भर साल अइसने गीतन के बहार बहत रहता. कबो शीला जवान हो जात बाड़ी त कबो मु्न्नी बदनाम. जब ले बाति हिंदी में होखे तब ले कवनो हल्ला ना होखे बाकिर अगर कहीँ भोजपुरी में हो गइल त बवाल होखे लागी कि भोजपुरी के अश्लील बनावल जात बा. ठीक ओही तरह जइसे हर हिंदू त्योहार बा विद्वान लोग नियम कूंचे लागेला कि होलिका दहन अइसे ना अइसे होखे के चाहीं, फगुआ में रंगं कादो कीचड़ के खेल ना होखे के चाहीं, दिवाली पर पटाखा ना फूटे के चाहीं, चुनाव में पोस्टर बैनर ना लागे के चाहीं. कहे के मतलब कि हर खुशी उमंग के मौका पर मनहूसियन छितरावे लागेला लोग.

अब लवटल जाव फेरु जवान होखत राजनीति पर. रउरा मानीं चाहे मत मानीं अब राजनीति अइसहीं चले के बा. कुछेक साल पहिले के मानीत कि कुछ आन्दोलनकारी बिना कवनो जमीनी संगठन बनवले चुनाव लड़ीहें आ जीतियो जइहें. कबो इंदिरा नाम के गुड़िया के कांग्रेस के बुढ़वा लोग आपन नेता बनवले रहुवे काहे कि ओह लोग में एह प एका ना बनत रहुवे कि केकरा नेतृत्व मे चले कांग्रेस. सामने रहली नेहरू जी के गुड़िया बेटी इंदिरा. सोचल लोग कि इनके के नेता बना दिहल जाव आ इनका के सीखा पढ़ा के आपन काम बनावत रहल जाव. बाकिर तब इंदिरा ओह सगरी जने प भारी पड़ल रही. बाकिर तब के घटना से कांग्रेसी कुछ सिखले ना आ केजरीवाल के समर्थन दे के सरकार बनवा दिहलें दि्ल्ली राज्य में. अब हाल ई बा कि कइसे निबटल जाव एह आफत से. बाढ़ में दहात कम्मर लूटे खातिर नदी में कूदल आदमी के जबले पता चले कि उ कम्मर ना भालू ह तब ले देर हो चुकल रहे. भालू ओकरा के जकड़ि लिहलसि आ उहो संगे संगे दहाए लागल. किनार खड़ा संघतिया चिललइलसि कि छोड़ द कम्मर के, लवटि आव. कम्मर का फेरा में फँसल आदमी बस अतने कहि पावल कि हम छोड़ीं त छोड़ीं, कमरिया छोड़े तब नू. कांग्रेसो के इहे हाल हो गइल बा आ ओकर हाल भई गति साँप छूछून्दर के री, उगिलत आन्हर निगलत कोढ़ी!

हँ त जमाना बदल गइल बा. राजनीति करे के तौर तरीको बदलत बा. पचास साठ के पार चहुँपल लोग एह राजनीति के समुझ ना पाई. एकरा के तनीषा सिंह आ मेघना पटेल जइसन नजरिए से देखे के आदत बनावे के पड़ी. दोसरा केहु के एह दुनू फोटो में कुछ बेजाँय लागल होखे त लागल करे. हमरा त कुछ बेजाँय ना लागल. हँ तनीषा सिंह वाला फोटो में मेघना पटेल वाला कलात्मकता ना लउकल. इंटरव्यू देत घरीओ तनीषा आ मेघना के जवाब में अंतर लउकल. मेघना हर मामिला में, देह, फोटो, जवाब सब में तनीषा प भारी पड़ली ठीक वइसहीं जइसे मोदी हर मैदान में राहुल पर भारी पइत बाड़ें.

सुनत बानी कुछ भाजापाईयनो के आपत्ति बा मेघना के फोटो प. अब एह लोग के के समुझावे कि स्वंयसेवक भाव से उपर उठीं आ नवहियन के नवहियन के नजरिया से देखीं. हो सके त मेघना के अपना प्रचार अभियान में जोड़ लीं. काहे कि बहुते नवही अइसनो मिलिहें जे कवनो लड़की के ई पूछला प कि “अइसन काहे देखत बाड़? घर में माई बहिन नइखे का?” बड़ा आराम से जवाब दे दीहें कि माई बहिन त बड़ले बा, बस मेहरारू के कमी बा!

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