भउजी हो

भउजी हो ! सुनलू ह?

तेरी माँ की... आ मंकी वाली?

हँ, उहे भउजी!

हँ, बबुआ. सुनबो कइनी आ कपारो धुननीं.

से काहे भउजी?

कइसन जमाना आ गइल बा कि महतारी के गारी से खराब केहू के मंकी कहल हो गइल बा. एकरा से इहे मालूम भइल कि डारविन ठीके कहले रहुवे कि आदमी बानर के संतान हऽ.आ कतना आराम से ई लोग समुझा देहुवे जज के कि तेरी माँ की... भारत के लोग आइसहीं बोल देला! छीः

दोसरो कुछ सुनलू हऽ?

हँ इहे नू कि अँजोरिया आजु काल्हु एक नम्बर पर चलत बा?

हँ भउजी!

त तनी अँजोरिया वालू से कह देम कि अईंठस जनि! उपर चढ़ल आसान होला, बाकिर उपर बनल रहल बड़ा कठिन काम होला. सफलता का बाद आदमी के मोलायम हो जाए क चाहीं!

से त ठीक कहत बारू भउजी! बाकिर एकरा से ईहो साबित हो गइल कि अगर केहू सही दिशा में लगातार चलत रहे त ऊ कतनो धीरे चलो एक ना एक दिन अपना मंजिल पर जरुर चहुँप जाई.

बाकिर हमरो एगो बाति इयाद राखीं! कवनो मंजिल आखिरी पड़ाव ना होला! हर मंजिल का बाद एगो दोसर मंजिल लउके लागेला आ आदमी के लगातार प्रयास करत रहे के पड़ेला. जे पिछुआइल बा, से पाछा ना छोड़ी! पाछा लागल रही आ मउका मिलते पटकनिया देबे में ना संकोची!

हँ भउजी, इहो ठीके कहतारू!

भउजी हो

भउजी हो ! सुनलू ह?

ना सुनले होखम त अब सुनि लेम. कहीं...

आडवाणी के राजग के लोग आपन नेता मान लिहल.

मानित लोग कइसे ना. अतना नौटंकी अनेरहीं भइल रहे का?

कवन नौटंकी भउजी?

भुला गइनी का जिन्ना प्रकरण?

तहरा कहला के मतलब ऊ चाल रहुवे?

एह सवाल के जवाब हम ना देम एगो छोट कहानी सुना देत बानीं. एक हालि मास्टर साहब स्लेट पर एगो लकीर खींचि के एगो लड़िका से कहलन कि अब एकरा के बिना कटले छँटले मोटवले छोट कर दऽ. लड़िका चट से ओकरा बगल में एगो बड़हन लकीर खिंचि दिहलस. राम रथ यात्रा वाला आडवाणी, अयोध्या वाला आडवाणी, हिन्दूत्व के पुरोधा आडवाणी के सर्वस्म्त नेता बनावे के आसान तरीका इहे रहुवे कि उनका के ढुलमुलिया बना दिहल जाव. बना दिहल गइलन त आजु नेतो बन गइलन!

वाह भउजी, का बाति कहलू!

संघ के कर्ता धर्ता अपना प्रचारकन से नाटक के पात्र लेखा काम लेबे लें. जेकरा जवन रोल मिलेला ऊ रोल ऊ बढ़िया से करेला. बाजपेयी भर जिनिगी आपन रोल निभवलन, आजुवो निभावत बाड़न आ आगहूँ निभावत रहिहन. वइसहीं आडवाणी आपन रोल कइलन, कर रहलबाड़न, करत रहिहन. हमनी का दर्शकन लेखा हर बात पर ताली बजावत रहि जाएम!

भउजी हो

भउजी हो ! सुनलू ह?

हम बाद में सुनब. पहिले ई बताईं कि रउआ आजुकाल्हु केने रहत बानीं कि जमाना हो जात बा भेंट कइले?

तहरा से कवनो बात छिपल बा का भउजी? जवना मुसीबत में फँसल बानीं तवना से निकले खातिर हर जतन करे में लागल बानीं. एहि चलते आजु काल्हु टाइम नइखे मिलत कि तहरा से भेंटो करि पाईं.

जाए दीं. बस भउजी के भुलाएम जनि. हम त हरमेस चाहेम कि रउआ आबाद रहीं, ईहां रहीं चाहे इलाहाबाद रहीं!

वाह भउजी! खैर जाए द. एगो बाति बतावऽ. काल्हु एनडीटीवी का अहमदाबाद आफिस में जवन हंगामा भइल तवन ठीक भइल कि बेजाँए?

जवन काम बाति से हो जाव तवना खातिर लात चलवला के का जरुरत? भारत रत्न खातिर नीमन बाउर हर तरह के आदमी के नाम उठावल जा रहल बा. ऊ लोग अगर एमएफ हुसैन के नाम उठाईये दिहल त का हो गइल?

काल्हु त केहू बाबरो के नाम उठा सकेला?

भारत रत्न भारत सरकार के दीहल उपाधि हऽ. पहिले का जमाना में ब्रिटिश सरकार तरह तरह के उपाधि देत रहुवे. केकरा इयाद बा कि केकरा का मिलल रहुवे. साँच पूछीं त भारत रत्न दीहले बन्द कर देबे के चाहीं.

ईहे त हमहूं कहेम. बाकिर आडवाणी जवन बखेड़ा शुरु कइलन कि पूरा देश में जगहे जगहे भारत रत्न के दावेदार पैदा हो गइलन. हमरो मन करत बा कि तहरा खातिर एगो भारत रत्न माँग ले आईं. कतन नीक नीक बाति करेलू. घर गिरहस्थी सम्हरले बाड़ू. परिवार के एकजुट रखले बाड़ू.

मस्का जाके अपना कनियां के लगाईं. बीबी खातिर एगो गहना खरीदात नइखे, भउजाई खातिर भारत रत्न! कनियवा इहे कही.