भउजी हो
ए बबुआ!
अरे भउजी तूँ?
हँ, एगो जमाना हो गइल राउर मुँह देखले त सोचनीं कि हमहीं चलि चली. रउरा त बोलायब ना.
का भउजी, अब तुँहू शिकायत करबू? आ गइल बाड़ू त देख लऽ घर कइसन छितराइल बा. तहार गोतनी नइहर का गइली घर भकसावन हो गइल बा. एगो कर तानी तले दोसरका काम पाछा छूट जात बा. बुझाते नइखे कि कइसे का करीं!
से त देखते बानीं. अब बुझाइल नू कि हमनी घरवालिन पर का गुजरेला. रउरा लोग के त घर के काम कामे ना बुझाव.
हँ भउजी, से त ठीके कहत बाड़ू बाकिर बहरिओ के कमवा कवनो आसान ना होला.
काम केहू के आसान ना होला. काम ना करीं त काम कइसे कहाई. मरद मेहरारू परिवार के गाड़ी के दू गो पहिया लेखा होला. बाकिर एगो में डिफरेन्शियल लगावे के पड़ेला ना त गाड़ी चलबे ना करी. परिवार के गाड़ी के डिफरेन्शियल वाल पहिया हमनी का हँई सँ जे रउरा लोग का हिसाब से चलीलें जा.
चलऽ बात तो होते हवात रही. बईठ, आज हमरा हाथ के चाय पी के देखऽ. बाकिर पावडर वाला दूध के मिली.
त रहे दीं, हमरा से ऊ ना पियल जाई.
चलऽ देखत बानीं, शायद नींबू होखि त नींबूए पानी के शरबत बना देत बानीं.
भउजी हो
भउजी हो!
का बबुआ?
मनमोहन सिंह मंत्रीमण्डल के नयका विस्तार में सात गो मंत्री जोड़ल गइले.
सात गो जोड़स भा सत्तर गो. उनकर मन. हम रउरा कुछ कहे वाला के हईं?
बाकिर राहुल गाँधी के अबहियों मंत्री ना बनावल गइल. से काहे?
मालिक भला बराहिल का नीचे काम करेला! अरे उनका जब बने के होखी त सोझे प्रधानमंत्री बनिहन. राजीव गाँधी लेखा.
उनकर परिस्थिति दोसर रहुवे. तब इन्दिरा जी के अचानक हत्या हो गइल रहुवे. सोनिया गाँधी इन्दिरा जी लेखा काहे नइखी करत?
का कहे चाहत बानीं, कहीं ना!
इन्दिरा जी प्रधानमंत्री का कुरसी पर जाए का पहिले सूचना मंत्री बन चुकल रही.
जमाना बदलि गइल बा बबुआ. ऊ विदेश से थोड़े आइल रही? एही देश का माटी के जनमल रही से कुछ संस्कार त रहबे करुवे. हम आजुवो ले उनकर इज्जत करीले.
एगो आउरी बाति सुनलू हऽ?
का? मायावती वाला?
हँ. कि राहुल गाँधी जब कवनो दलित का घरे से लवटे लें त गमकउवा साबुन से मल मल के नहालें कि देह से सगरी बास निकल जाव.
राजनीति में गिरहूं के एगो सीमा होखेला. बाति में बाथरुम तक चहुँपल नीक बा नइखे......
भउजी हो
भउजी हो!
का बबुआ?
भोजपुरिहन में अइसनका कवन अएब बा कि ऊ मिल जुल के ना रह सकसु?
इगो.
इगो का कहाला भउजी?
इगो माने अहम्. जे बानीं से हमहीं बानीं, जवन कइनीं हमहीं कइनीं.
अगर हर कोई इहे कहीं त समाज आगे कइसे चली भउजी?
हमरा अनुसार चले के बा त चलीं ना त आपन रास्ता देखीं. इहे आजुकाल्हु के रीत हो गइल बा.
बाकिर भउजी, हमनी का त इहो कहीलें कि अबर बानीं, दुबर बानीं, भाई में बरोबर बानीं.
इहो एक तरह के अहमे हऽ बबुआ. हर कोई बरोबर कइसे हो जाई? घर परिवार समाज हर जगहा केहू आगा त केहू पाछा मिलेला. सबके एक दूसरा के सन्मान देबे के चाहीं.
ठीके कहत बाड़ू भउजी, देखिये ना लऽ भोजपुरी सिनेमा के त्रिमुर्ती एक जगहा एक साथे नइखन रहो पावत.
खाली सिनेमवे के बाति काहे करत बानीं? वेबसाइट वाला लोग एक जगहा बा? ग्रूप वाला लोग ग्रूपिज्म से उपर बा?
जाए द भउजी. बात मत बढ़ावऽ, तू त चुहानी में रहबू, हमरा देश दुनिया में सबका से मिल बेवहर के रहे के बा. जे बा से ठीक बा. जे जवन करत बा अपना हिसाब से ठीके करत बा. हम तू के हईं दोसरा के बुद्धि देब वाला?
त छोड़ीं ई सब बाति. कनिया के हाल चाल सुनाईं.......
