भोजपुरी चुटपुटिआ
एकदिन दूनु (.)(.)अपने में लड़त रहुवन स कि लफड़ा ).( नीचे होला आ कचराली स हमनी का.
अखबार में पढ़नी ह कि
दोस्तन के एसएमएस भेजला से हार्ट पर असर पड़ेला.
बस, आज से बन्द!
का?
अखबार पढ़ल!
लक्ष्मीजी त हमार पतवे भुला गइल बाड़ी.
कहीं भेंटास त हमार इयाद दिया दीह.
आ कह दीहऽ कि हम इन्तजार करत बानीं.
हाल दुनिया के का कहीं, यारे
झूठ के साँच बनावल जाता
देश के अबले ना सूरत बदलल,
झूठहूँ हल्ला मचावल जाता.
मुँह पर बड़ाई आ पीठ पाछा बुराई करे वालन से दुनिया भरल बा.
दोस्त ऊ होला जे मुँह पर दोष बतावे आ पीठ पाछा बड़ाई करे.
हजार गो दोस्त बना लिहल आसान बा.
एगो दोस्त बनावल मुश्किल!
जे हजार गो दुश्मनन का सामने दोस्ती निभा सको!
सपना देखि जुड़ा गइले जियरा
सपना अब ना देखावऽ हो राम !
जमीनी हकीकत सकारऽ आ लाग जा अपना काम में.
साथी तहरा गाँव में,
कइसन मचल अन्हेर.
आवे जाये के डहर
सब दिहले बा घेर.
"आठ कुआँ नौ बावड़ी, बा सोरह पनिहार
भरल घइलवा ढरकि गे हो, धनि ठाढ़ पछितात.
हम से रउवा बिछड़ के त देखीं कबो
नाहिं हियरा में आई करार तनिको
जीयऽ...
जागऽ...
चूल्हा में लागऽ....
मरल आस- विश्वास जो अउर गइल मन हार.
तब बूझीं जे आदमी, भरलो-पुरल भिखार.

