नेता कव तरह के होलन?
चुनाव के गरमा गरमी में भोला बाबू से पूछनीं कि नेता कव तरह के होलन?
भोला बाबू सटाके जवाब दिहलन तीन तरह के.
पुछनी कि तीन तेरह करे वाला आ कि तीन तरह के?
तीन तरह के. पहिलका का पाछा भीड़ चलेला, दोसरका भीड़ का आगा चले लागेला. तीसरका के पते ना चले कि भीड़ ओकरा पाछा चलत बा कि ओकर पीछा करत बा!
जल्दी से पानी गरम करि के दऽ ना त...
भोला भाई जोरु क गुलाम कहात कहात अनसा गइल रहलन. एक दिन सोचलन कि मेहरारू पर रौब गांठे के शुरु कर दीं. धीरे धीरे बात फइलिये जाई. से गरमा के पूरा रोआब से मेहरारू के हुकुम सुनवलन, जल्दी से पानी गरम करि के दऽ ना त...
भोला भाई के मेहरारूओ अचकचा गइली, पूछ बइठली, ना त... का करि लेम?
भोला भाई सिटपिटा के जवाब दिहलन, ना त... का करेम? ठण्ढे पानी से नहा लेम!
भोला बाबू फौज में ना भरती भइलन
एक दिन भोला भाई बतावे लगलन कि ऊ फौज में काहे ना गइलन. कहलन कि दू गो कारण रहुवे, पता ना बहाली होखित कि ना होखित. ना होखित त कवनो बाति ना रहित, बाकिर हो जाइत त दू गो बात होखित. पाकिस्तान का संगे लड़ाई हो सकत रहुवे. ना होखित त कवनो बाति ना रहित, बाकिर हो जाइत त दू गो बात होखित. या त ऊ बांच जइतन, या मरा जइतन. बाँच जइतन त कवनो ना बात ना रहित. बाकिर मर जइतन त दू गो बात होखित. या त लाश मिल जाइत भा ना मिलित. लाश मिल जाइत त कवनो बात ना रहुवे. ना मिलित त दू गो बात होखित. या त कुकुर सियार खा जइतन स या जमीन में गाड़ दिहल जाइत. कुकुर सियार खा जइतन त कवनो बात ना रहे, जमीन में गड़ा जइतन त दू गो बात होखित. या त लाश सड़ गल जाईत या ओकर चर्बी बन जाइत. अब लाश सड़ गइल जाइत त कवनो बात ना रहुवे, चर्बी बन जाइत त दू गो बात होखित. या त अइसहीं रह जाइत या ओकर साबुन बन जाइत. अइसहीं रह जाइत त कवनो बात ना रहुवे. साबुन बन जाइत त दू गो बात होखित. या त कपड़ा के साबुन बनित भा नहाये वाला. कपड़ा धोवे वाला साबुन बनित त कवनो बात ना रहुवे, नहाये वाल साबुन बनित त दू गो बात होखित. या त मरद नहाइत या ओरत. मरद नहाइत त कवनो बात ना रहित, ओरत नहाइत त उनुका बड़ा लाज लागित. ईहे सोच के ऊ फौज में भरती ना भइलन!
ऊ का कहत होखी?
हाजीपुर जंक्शन पर उतरत एगो पैसेंजर टीटी के गरियवले जात रहुवे आ टीटी बेचारा मुँह झुकवले सुनत रहुवे. भोला बाबू से ना रहाईल त टीटी से पूछ लिहलन कि का जी काहे अतना गारी सुनत रहनीं हँ?
टीटी कहलसि का कहीं? ई हमरा के बनारसे में कहले रहुवन कि छपरा चहुँपला पर जगा दीहऽ. इनका छपरा उतरे के रहुवे. ना उतरववनी तऽ गरियावत रहन. हम त ई सोचि सोचि के हलकान बानीं कि जवना बेचारा के छपरा उतार दिहनी ऊ कतना गरियावत होखी! पता ना ओकरा कहाँ जाये के रहे? अधरतिया अनजान शहर का टीशन पर उतर के बेचारा के कइसन लागल होखी?
तरकारी के भाव
भोला बाबू के एगो दोस्त तरकारी बेचेवालन का भाव का बारे में बात करत रहुवन. कहलन कि ऊ वेष देखि के दाम बतावेले स. जहिया झक झक पहिर के जायेम तहिया अतना दाम बढ़ा दीहें स कि खरीदत ना बने. साधारण वेष मे गइला पर ठीक ठाक दमा लगावेले स.
भोला बाबू सलाह दिहलन, धत मरदे. फाटल कुरता पहिर के आ कटोरा लेके जाइल करऽ, फोकटे में दे दीहन स!
