Shambhu Nath Upadhyay

Ballia

रामराज सोचलऽ भिखारी भइल देसवा.

शम्भुनाथ उपाध्याय

रामराज सोचलऽ भिखारी भइल देसवा.
दुनिया का सोझा उघारि भइल देसवा.

केहू से केहू के कवनो ना नेह बा,
गुण्डन के गोरून के सउँसे सरेह बा.
इजति ना बाचे लाचार भइल देसवा.
रामराज सोचलऽ भिखारी भइल देसवा.

सभके सिखावे में सभे बा लागल.
सीखे के लालसा ना केहू में जागल.
बिनु चेला गुरू के बखार भइल देसवा.
रामराज सोचलऽ भिखारी भइल देसवा.

हिंसा अहिंसा के दे दिहलसी ढाठी.
सद्गुन के दुर्गुनवा मारेला लाठी.
दुष्टन के सगरी बाजार भइल देसवा.
रामराज सोचलऽ भिखारी भइल देसवा.

दिहले ना भोट कबो घूरहू के पापा.
पोलिंग पर मुर्दा आ, मारेला ठापा.
कैद भइल कायदा, अन्हार भइल देसवा.
रामराज सोचलऽ भिखारी भइल देसवा.

घूरहू तू जगबऽ तऽ देसवा ई जागी.
तोहरे बुतवले, बुताई ई आगी.
तोहरे चुपइले बेकार भइल देसवा.
रामराज सोचलऽ भिखारी भइल देसवा.

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