– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” एक व्यक्ति दू नाव पर सवारी, कइसे ? समस्या विकट बा आ ओहु से विकट बा ओकर समाधान. सबसे बड़ बात ई कि समाधान के चिंता केहु के नइखे काहे से कि आज हर केहु जेतना ज्यादा मिल जाये ओतना नाव पर सवारी करे खातिरपूरा पढ़ीं…

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– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” सच बोलहू में अब सवाल हो रहल बा, खुदके मिटावे खातिर बवाल हो रहल बा, ना रही बाँस ना बाजी बाँसुरिया ऐ विष्णु, कफ़न ओढावे खातिर कमाल हो रहल बा़॥ महाभारतानुसार अब गुरु शिक्षक हो रहल बा, आस्था के सामने धरम भिक्षुक हो रहल बा,पूरा पढ़ीं…

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” श्रद्धालु कभी परेशान ना होले, परेशानी उनकर बा जे यात्रा अउरी तीर्थयात्रा दुनो के लाभ लेबे चाहत बा. ठीक इहे जुमला आज भोजपुरियो खातिर कहा सकत बा कि जेकरा भोजपुरी में जिए मरे के बा ओकरा खातिर 8 वीं के बैशाखी कवनो काम के ना.पूरा पढ़ीं…

– अभय कृष्ण त्रिपाठी “विष्णु” जमाना लाख बुरा चाहे त का होला, उहे होला जे मंजूरे खुदा होला. निकलल बानी सर कफ़न बांध के याद रखीह, मिट जाई हर रावन बस लक्ष के धियान धरीह, बा सेवा के इरादा त बोली के दरकिनार करीह, मरला बिना स्वर्ग नइखे ई मंत्रपूरा पढ़ीं…