– ओेमप्रकाश अमृतांशु शंख नाद गरजन सुनावऽ, मिलके जोर लगावऽ आवऽ दियावा जरावऽ, भोजपुरी के भईया . ओका-बोका तिन तड़ोका, घुघुआ के हई माना तार काटो-तरकुल काटो, ढ़ेरन खेल-खजाना, चुट्टा-चुट्टी, बुढ़िया कब्ड्डी, से नेहिया लगावऽ आवऽ दियावा जरावऽ, भोजपुरी के भईया . अद्भूत कला के रूप, कोहबर-पिड़ियां के लेखनवा, मारिपूरा पढ़ीं…

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– ओमप्रकाश अमृतांशु हम बच्चा हिंदुस्तानी आगे-आगे बढ़ब जा. आगे-आगे बढ़ब जा. पीछे ना मुड़ब जा . पीछे ना मुड़ब जा . उषा के किरणन संग जगना, हर मुश्किल से लड़ना, सिखलीं मस्त पवन से, ना कबो केहू से डरना. हम नन्हा हईं तूफानी. आगे-आगे बढ़ब जा. आगे-आगे बढ़ब जा.पूरा पढ़ीं…

– ओ.पी. अमृतांशु चिरई-चुरंगिया के होई गइलें शोर ! भइल भोर, हे आदित्  देव लागिला गोड़ !   हाथ जोड़ ,  हे आदित्  देव लागिला गोड़ ! देर भइल पनिया में  खाड़ बाड़ी जनिया, थर-थर कांपे अउरी ठिठुरे बदनिया, छल-छल छलकेला नेहिया के लोर ! पान-फूल नारियल  हाथवा सजाके, तिकवेला  केहू जोड़ा कलसूप उठा के, हियना के दियनापूरा पढ़ीं…

– ओ.पी. अमृतांशु रंग – अबिरवा लेके गुललवा मस्त फगुनवा आईल बा. केने बाड़ी पुरूवा रानी पछेया बउराईल बा. सरसों फुलाइल, लहराइल बा तीसी, मटर के ढेंढी देखावे बतीसी, झपड़-झपड़ गेहूमा के बालवा कचरी पे लोभाइल बा. मोजरा से रस झर-झर बरसे, कोइलर – मैनो के मन हरसे, फुदुकेले फुद-गुदीपूरा पढ़ीं…

– ओ.पी. अमृतांशु नवमी के दिने देवी लेली बलिदनवा, खस्सिया पे चले तलवार होऽऽऽ. करेले बकरिया गोहारऽ ए माई, करेले बकरिया गोहार होऽऽऽ. बड़ी रे ललसवा से दिहलीं जनमवा, चुमी-चाटी बबुआ के संझिया-बिहनवा, नेहिया -सनेहिया के लहसल बगिया, होई गइले हमरो उजाड़ होऽऽऽ. माई होके माई के ममतवा न जनलू, लोरवा के धार मोरी अँखिया से फोरलू , ओढ़ लेलु सभे के रे दुखवा-बिपतिया, हमरा के कइलू बेसहार होऽऽऽ. उमड़ल थनवा से टपकेला दुधवा, कतहीं ना सूझे माई बचवा के मुँहवा,  छछने जियरवा रे कलपे करेजवा, केकरा के करीं हम दुलार होऽऽऽ. डहकेलू-छछ्नेलु काहे तू बकरिया,  लोरवा के बुनवापूरा पढ़ीं…

– ओ.पी. अमृतांशु टपऽ- टपऽ चुअता पसेनवा हायॅ राम भइल बा उखमवा ! चैन बा दलानी नाहीं बाग-फुलवारी, लेई लुकवारी धावे पछुआ बेयारि, उसिनाई गइल बा परानवा हायॅ राम भइल बा उखमवा ! पोखरा – ईनरवा के होठवा झूराई गइल, खेतवा के नन्ही -नन्ही डिभी झकोराई गइल , छछनी के पीहुके पपिहवा   हायॅ राम भइल बा उखमवा ! गरमी जवानी थाम्हऽ बरखा ये रानी आवऽ, जरती भुभुरिया के  हिकवा मिटानी आवऽ  छम-छमपूरा पढ़ीं…

– ओ.पी .अमृतांशु पाकल मोछवा बोकावा के पोंछवा रुपवा गोबरे लिपावल ! ये  दुलहा. माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा. अइलऽ गदहिया पे, नाहीं तू नहइलऽ, आखीं कजरवा ना माई से करइलऽ, उबड़-खाबड़ बाटे लिलारवा चूनवा वोही पे टिकावल ! ये  दुलहा. माथे मउरवा सजावल ! ये  दुलहा . लेके दहेजवा बगलिया में धइलऽ, एको खिली पान ना मुहंवा में खइलऽ, टूटल दंतवा पचकल गलवा  होंठवा में आलतापूरा पढ़ीं…