– अशोक कुमार तिवारी हो गइल छीछिल छुछुन्नर, दिल कहाँ दरियाव बा, अब उठावे ना, गिरा देबे में सबकर चाव बा। लगल आगी रहे धनकत भले, हमरा ठेंग से जर रहल बा झोपड़ी, सूतल सूचना गाँव बा। बात-बीतल हो गइल बाटे धरम-ईमान के शेष बा लड़ले-लड़ावल, अब कहाँ फरियाव बापूरा पढ़ीं…

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– अशोक कुमार तिवारी जीए द जनता के चाहे गरदन जाँत मुआव, हटे देश बपौती तहरे जइसे मन चलावऽ. स्वास्थ सड़क शिक्षा तीनोें के धइले बा बदहाली, तोहरा एकर कवन फेर बा काटऽतारऽ छाल्ही. एहिजा जरे बदन घाम में, ओहिजा चले एसी, इहाँ तियन से भेंटे ना बा, उहवाँ मुरगापूरा पढ़ीं…