पद्मश्री डा0 कृष्ण बिहारी मिश्र

January 29, 2018 Editor 0

जन्म: 01 जुलाई 1936, बलिया जिला के बलिहार गाँव में। श्रीमती बबुना देवी आ श्री घनश्याम मिश्र क एकलौता पुत्र । शिक्षा: प्राथमिक शिक्षा गाँव […]

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साँच उघारल जरूरी बा !

September 26, 2017 Editor 1

– डॉ अशोक द्विवेदी हम भोजपुरी धरती क सन्तान, ओकरे धूरि-माटी, हवा-बतास में अँखफोर भइनी। हमार बचपन आ किशोर वय ओकरे सानी-पानी आ सरेहि में […]

कोइला में हीरा हेराइल !

April 20, 2017 Editor 0

[et_pb_section bb_built=”1″ admin_label=”section”][et_pb_row admin_label=”row”][et_pb_column type=”2_3″][et_pb_text admin_label=”Text” background_layout=”light” text_orientation=”left” use_border_color=”off” border_color=”#ffffff” border_style=”solid”] – अशोक द्विवेदी कोइला में हीरा हेराइल कुफुत में जिनिगिया ओराइल बलमु तोहें कुछ […]

चइत-राग

April 3, 2017 Editor 1

– अशोक द्विवेदी 【 एक 】 रसे – रसे महुआ फुलाइल हो रामा उनुका से कहि दs ! रस देखि भँवरा लोभाइल हो रामा उनुका […]

फिरू बसन्त चलि आइल

February 3, 2017 Editor 0

– अशोक द्विवेदी ओढ़नी पियर, चुनरिया हरियर / फिरु सरेहि अगराइल जाये क बेरिया माघ हिलवलस, रितु बसन्त के आइल! फुरसत कहाँ कि बिगड़त रिश्ता, […]

कवन गीत हम गाईं बसन्ती

January 31, 2017 Editor 1

(वसन्त पंचमी, 1ली फरवरी 2017, प मंगल कामना करत) – अशोक द्विवेदी कठुआइल उछाह लोगन के, मेहराइल कन -कन कवन गीत हम गाईं बसन्ती पियरी […]

रोज-रोज काका टहल ओरियइहें !

December 23, 2016 Editor 0

(भोजपुरी गीत) – डा. अशोक द्विवेदी भीरि पड़ी केतनो, न कबों सिहरइहें.. रोज-रोज काका टहल ओरियइहें! भोरहीं से संझा ले, हाड़ गली बहरी जरसी छेदहिया […]

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चक्कर बनाम चस्का

November 26, 2016 Editor 0

(ललित-व्यंग) – डा0 अशोक द्विवेदी आदमी आखिर आदमी हs — अपना मूल सोभाव आ प्रवृत्तियन से जुड़ल-बन्हाइल। मोह-ममता के लस्का आ कुछ कुछ आदत से […]

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चैन लगे बेचैन (उलटन)

April 26, 2016 Editor 0

– अशोक द्विवेदी ना जुड़वावे नीर जुड़-छँहियो में, बहुत उमस लागे. चैन लगे बेचैन, देश में बरिसत रस नीरस लागे! बुधि, बल, बेंवत, चाकर… पद, […]

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आपन भाषा आपन गांव

December 31, 2015 Editor 0

– डा. अशोक द्विवेदी छोट घर-बार में हमहन क, अब समाव कहाँ नेह ऊ बा कहाँ अपनन में, ऊ लगाव कहाँ जीउ टेघरे लगे गैरन […]

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अब जोर बा हउँजार के

December 5, 2015 Editor 0

– डा. अशोक द्विवेदी बाहुबलियन से चलत बा काम जब सरकार के का सुनी, केहू भला कमजोर के, लाचार के ! हर खबर में बा […]

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शरद सुहावन

November 23, 2015 Editor 0

– डाॅ. अशोक द्विवेदी रतिया झरेले जलबुनिया फजीरे बनि झालर झरे फेरु उतरेले भुइंयाँ किरिनियाँ सरेहिया में मोती चरे ! सुति उठि दउरेले नन्हकी उघारे […]

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गज़ल

November 14, 2015 Editor 0

– डा0 अशोक द्विवेदी हुक्मरानन का खुशी पर फेरु मिट जाई समाज अपना अपना घर का आगा, खोन ली खाई समाज । कर चुकल बा […]