– डा0 अशोक द्विवेदी दउर- दउर थाकल जिनगानी कतना आग बुतावे पानी ! बरिसन से सपना सपने बा ; छछनत बचपन बूढ़ जवानी । हरियर धान सोनहुली बाली, रउरे देखलीं , हम का जानी ? कबहूँ -कबहूँ क्षुधा जुड़ाला जहिया सबहर जरे चुहानी । पूत -पतोह बसल परदेसे – उचटलपूरा पढ़ीं…

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पिछला 19 आ 20 सितंबर का दिने भोपाल नें मध्यप्रदेश भोजपुरी साहित्य अकादमी का तरफ से एगो साहित्यिक गोष्ठी के आयोजन भइल. पहिला दिन पहिल सत्र में भोजपुरी कहानी पाठ भइल. एमें कन्हैया सिंह सदय, प्रेमशीला शुक्ल, भगवती प्रसाद द्विवेदी, विष्णुदेव तिवारी, प्रकाश उदय, अजय ओझा, आ तुषारकान्त उपाध्याय आपनपूरा पढ़ीं…

-डाॅ. अशोक द्विवेदी आज दुनिया के बहुते भाषा मर-बिला रहल बाड़ी सऽ. एकर मतलब ई ना भइल कि जवन भाषा कवनो क्षेत्र-विशेष आ उहाँ के जन-जीवन में जियतो बाड़ी सऽ उन्हनियो के मुवल-बिलाइल मान लिहल जाव, जवन आजुओ अपना सांस्कृतिक समाजिक खासियत का साथ अपना ‘निजता’ के सुरक्षित रखले बाड़ीपूरा पढ़ीं…

– डाॅ. अशोक द्विवेदी काल्हु भोरे क निकलल रात एक बजे घरे पहुंचनी. ए साल के सावन में बलिया बनारस ढेर इयाद आइल बाकि महाराष्ट् में भीमा श॔कर ज्योतिर्लिंग के दरस परस खातिर कइल यात्रा अपना आप में अनूठा आ अविस्मरणीय रहल. पहाड़, झरना, बन से होत प्रकृति के अनुपमपूरा पढ़ीं…

– डाॅ. अशोक द्विवेदी ‘लोक’ के बतिये निराली बा. आदर-निरादर, उपेक्षा-तिरस्कार के व्यक्त करे क टोन आ तरीका अलगा बा. हम काल्हु अपना एगो मित्र किहाँ गइल रहलीं. उहाँ दुइये दिन पहिले उनकर माई उनका उनका गाँव आरा (बिहार) से आइल रहुवी. पलग्गी आ हाल चाल का बाद अनासो हमरापूरा पढ़ीं…

– डाॅ. अशोक द्विवेदी गंगा, सरजू, सोन का पाट में फइलल खेतिहर-संस्कृति दरसल “परिवार” का नेइं पर बनल गृहस्थ संस्कृति हऽ. परिवार बना के रहे खातिर पुरुष स्त्री क गँठजोरा क के बिवाह संस्कार से बान्हल आ मर्यादित कइला का पाछा सृष्टिकारी कर्म के गति देबे क भावना रहे. घरपूरा पढ़ीं…

– डाॅ. अशोक द्विवेदी हमार बाबा, ढेर पढ़ुवा लोगन का बचकाना गलती आ अज्ञान पर हँसत झट से कहसु, “पढ़ लिखि भइले लखनचन पाड़ा !” पाड़ा माने मूरख; समाजिक अनुभव-ज्ञान से शून्य. आजकल तऽ लखनचंद क जमात अउर बढ़ले चलल जाता. ए जमात में अधूरा ज्ञान क अहंकार आ छेछड़पनपूरा पढ़ीं…

– डाॅ. अशोक द्विवेदी अनेकता मे एकता क उद्घोष करे वाला हमन के महान देश इहाँ क रहनिहार हर नागरिक के हऽ; बाकिर अइसनो ना कि देश के हेठे दबाइ के सबकर अपने आजादी परमुख हो जाय. पहिले राजा जवन मरजी होखे करे बदे सुतंत्र आ निरकुश रहे बाकि अब,पूरा पढ़ीं…

– डाॅ. अशोक द्विवेदी बहुत पहिले एक बेर क्रिकेट देखत खा, भारत के ‘माही’ मिस्टर धोनी का उड़त छक्का के कमेन्टरी वाला ‘हेलीकाप्टर शाट ‘ का कहलस, ओके नकलियावे क फैशन चल निकलल. नीचे से झटके मे़ ऊपर उठावे वाला ई हेलिकाप्टर स्टाइल विज्ञापन वाला ले जाके लेहना काटे वालापूरा पढ़ीं…