“रेत के सफर” आसिफ रोहतासवी के एगो गजल संग्रह हटे, जवना के प्रकाशन सन् 2010 में वनांचल प्रकाशन, तेनुघाट साहित्य परिषद्, सिंचाई कॉलोनी, तेनुघाट (झारखंड) से भइल बा. एकर कीमत 125 रुपिया बाटे.   आसिफ रोहतासवी भोजपुरी गजल का क्षेत्र में एगो स्थापित नाम बा. इहाँके एह संग्रह केपूरा पढ़ीं…

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-आसिफ रोहतासवी (एक) फेड़न के औकात बताई कहियो अइसन आन्ही आई. घामा पर हक इनको बाटे पियराइल दुबियो हरियाई. पाँव जरे चाहे तरुवाए चलहीं से नू राह ओराई. मोल, चलवले के बा जांगर रामभरोसे ना फरियाई. नाहीं कबरी बिन हिलसवले दिन-पर-दिन आउर जरियाई. अपना खातिर चउकन्ना बा तहरा बेर बहिरपूरा पढ़ीं…

-आसिफ रोहतासवी अब ना बाँची जान बुझाता बाबूजी लोग भइल हैवान बुझाता बाबूजी पढ़ल लिखल हमनी के सब गुरमाटी बा उनका वेद कुरान बुझाता बाबूजी आपुस में टंसन बा फिर हमरा गाँवे खेत जरी, खरिहान बुझाता बाबूजी बबुआ तऽ अबहींए आँख तरेरऽता एक दिन बनी महान बुझाता बाबूजी सटलीं पेवनपूरा पढ़ीं…